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Thursday, 3 September, 2026
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हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद: खरगे ने की FIR की मांग, नड्डा से पूछा—कार्रवाई में देरी क्यों?

बीजेपी नेता के कार्रवाई किए जाने का भरोसा देने के लगभग एक महीने बाद कांग्रेस नेता ने ‘हैरानी’ जताई. उन्होंने कहा कि यह मामला ‘करोड़ों लोगों की भावनाओं’ से जुड़ा है.

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नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर हल्द्वानी के रामलीला मैदान में 8 अगस्त को हुई उनकी जनसभा के बाद वहां किए गए ‘शुद्धिकरण’ समारोह में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.

दो सितंबर के पत्र में खरगे ने नड्डा को 13 अगस्त को राज्यसभा में दिए उनके उस भरोसे की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस मामले को देखा जाएगा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. अब खरगे ने कार्रवाई में देरी पर सवाल उठाया है और कहा है कि घटना को 24 दिन हो चुके हैं.

उन्होंने लिखा, “मुझे हैरानी है कि इस घटना के 24 दिन बीत जाने के बाद भी हल्द्वानी में इस निंदनीय काम को करने वाले संबंधित संगठनों और लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई है.”

खरगे ने कहा कि रैली की जगह पर जो हुआ, उसे समानता और सम्मान के संवैधानिक मूल्यों से अलग करके नहीं देखा जा सकता. उन्होंने कहा, “जिस रामलीला मैदान में मैंने रैली को संबोधित किया था, वहां भारत के संविधान और मानवीय मूल्यों की भावना के खिलाफ तरीके से शुद्धिकरण किया गया.”

उन्होंने महाड़ सत्याग्रह के दौरान बी.आर. आंबेडकर के साथ हुए अनुभव का भी ज़िक्र किया. खरगे ने कहा कि आंबेडकर के महाड़ तालाब से पानी पीने के बाद, उनका विरोध करने वाले लोगों ने गोमूत्र और गोबर का इस्तेमाल करके मंत्र पढ़ते हुए शुद्धिकरण किया था. खरगे ने लिखा, “सिर्फ मंत्र पढ़ने या हवन करने से जातिवादी तरीके से किया गया शुद्धिकरण पवित्र नहीं हो जाता.”

खरगे ने साफ किया कि वह इस घटना को सिर्फ अपने अपमान के तौर पर नहीं देखते. उन्होंने कहा, “यह मामला सिर्फ मेरे या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के पद तक सीमित नहीं है; यह करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है, जो आज भी हर दिन इस क्रूर सच्चाई का सामना करते हैं.”

उन्होंने कहा कि यह मामला संसद में इसलिए उठाया गया क्योंकि यह ऐसी सोच को दिखाता है, जो समाज के एक हिस्से को आज भी प्रभावित करती है और जिस पर सरकार का ध्यान जाना जरूरी है.

खरगे ने नड्डा से संसद में दिए अपने भरोसे को पूरा करने और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को निर्देश देने की मांग की है, ताकि समारोह में शामिल लोगों और संगठनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सके.

यह विवाद 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खरगे के कांग्रेस की रैली को संबोधित करने के बाद शुरू हुआ. इसके बाद वहां शुद्धिकरण समारोह किया गया. बाद में खड़गे ने 13 अगस्त को राज्यसभा में यह मामला उठाया.

नड्डा ने इस घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया था. उन्होंने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती. उन्होंने खरगे को भरोसा दिया था कि मामले की जांच की जाएगी और दोषियों को सज़ा दी जाएगी. हालांकि, इसके कुछ ही दिन बाद उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने ‘शुद्धिकरण’ का बचाव किया.

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की और समारोह के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि यह जातिगत भेदभाव को दिखाता है. उनकी टिप्पणियों से जातिगत भावनाएं आहत होने के आरोप में कांग्रेस नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. इसके बाद कांग्रेस ने राहुल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किए.

सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि खरगे ने कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में भी यह मामला उठाया था. उन्होंने अपने साथियों के उनके पक्ष में खड़े नहीं होने पर निराशा जताई थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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