नई दिल्ली: अयोध्या बार एसोसिएशन ने अयोध्या पुलिस को शिकायत देकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और प्रशासक गोपाल राव के खिलाफ राम मंदिर के दान चोरी के कथित मामले में कार्रवाई की मांग की है.
चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव और अन्य ट्रस्टियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए हिंदी में दी गई शिकायत में कहा गया है, “चोरी में शामिल सभी जिम्मेदार ट्रस्ट अधिकारी और सदस्य भी साफ तौर पर दोषी हैं. इन्होंने सुनियोजित साजिश के तहत दान की रकम चोरी करने के लिए एक संगठित गिरोह बनाया. जब मामला सामने आया तो सबूत भी मिटा दिए. इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करना बेहद ज़रूरी है, ताकि करोड़ों राम भक्तों की अपने आराध्य भगवान श्रीराम और उनके भव्य मंदिर के प्रति आस्था और विश्वास बना रहे.”
दिप्रिंट के पास मौजूद इस शिकायत को बार एसोसिएशन के महासचिव अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार जायसवाल ने राम जन्मभूमि थाने में दिया है.
शिकायत में कहा गया है कि फैजाबाद बार एसोसिएशन, अयोध्या ने राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका निभाई थी. बार एसोसिएशन के कई वरिष्ठ वकीलों ने राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की ओर से अदालत में पैरवी भी की थी.
शिकायत में आगे कहा गया है, “इसके हज़ारों सदस्य कार सेवा आंदोलन में शामिल हुए थे, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था. इसके अलावा, एसोसिएशन और उसके सदस्यों ने राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए बड़ी राशि का दान भी दिया. आज भी बार एसोसिएशन के कई सदस्य अपनी मेहनत की कमाई का एक हिस्सा मंदिर और भगवान के लिए रखी गई दान पेटियों में डालते हैं.”
लेकिन शिकायत में कहा गया है कि दान चोरी के आरोपों के बाद बार एसोसिएशन के सदस्य खुद को “ठगा हुआ और पीड़ित” महसूस कर रहे हैं.
शिकायत में कहा गया है कि चंपत राय ने मीडिया से कहा था कि ट्रस्ट की दान पेटियों की ऑडिट में कोई चोरी या गड़बड़ी नहीं मिली. शिकायत के मुताबिक, इससे “साफ पता चलता है” कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव भक्तों के दान की चोरी या गबन में पूरी तरह शामिल थे और अब झूठी व मनगढ़ंत बातें कहकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं.
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि जनता के गुस्से के बाद ही एसआईटी का गठन किया गया. इसमें आरोप लगाया गया है कि ट्रस्टी कृष्ण मोहन को ही शिकायतकर्ता बना दिया गया, जबकि मंदिर में चढ़ाए गए पैसे और गहने उन्हीं की निगरानी में थे.
इससे पहले बार एसोसिएशन ने फैसला किया था कि राम मंदिर दान चोरी मामले में कोई भी वकील आरोपियों की तरफ से पैरवी नहीं करेगा. यदि कोई वकील यह केस लेता है, तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा.
अयोध्या बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजेश कुमार उपाध्याय ने पहले दिप्रिंट से कहा था, “जिन लोगों को जेल भेजा गया है, वे ड्राइवर या सफाई कर्मचारी हैं. वे असली आरोपी नहीं हैं. मुख्य आरोपी चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा उन्हें बचाया जा रहा है.”
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