नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किए जाने के दो महीने के भीतर ही शामली के पास इस सड़क पर दो बड़े गड्ढे हो गए हैं. यह गड्ढे इलाके में मानसून की पहली बारिश के बाद दिखाई दिए. इस मामले को लेकर कांग्रेस ने सत्ताधारी दल पर फंड में गड़बड़ी का आरोप लगाया है, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इसके लिए स्थानीय लोगों को जिम्मेदार ठहराया है.
12,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे पर चलने वाले वाहन चालक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं.
एक्स पर एक यूजर ने लिखा, “12,000 करोड़ रुपये का दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पहली ही बारिश में टूट गया. 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भव्य उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद दुनिया-स्तरीय बताए गए इस एक्सप्रेसवे पर मानसून की पहली बारिश में ही बड़े-बड़े गड्ढे हो गए, जिससे वाहनों को भारी नुकसान हो रहा है.”
कई अन्य यूजर्स ने भी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को टैग करते हुए सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाए और इसकी जांच कराने की मांग की. हालांकि, गडकरी ने अभी तक इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
एक्स पर एक अन्य यूजर ने लिखा, “गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई. इसे जल्द ठीक कराया जाए और इस काम में शामिल कंपनी, ठेकेदार और अन्य संबंधित फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया जाए.”
‘भारी भ्रष्टाचार’
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस मामले पर बयान जारी करते हुए कहा कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर बारिश के बाद पानी भर जाने और उस स्थान पर स्थायी जल निकासी (क्रॉस-ड्रेनेज) व्यवस्था शुरू न हो पाने के कारण गड्ढे बने.
NHAI ने घटना के कई घंटे बाद एक्स पर लिखा, “1 जुलाई की सुबह नियमित गश्त के दौरान प्रभावित हिस्से की पहचान कर ली गई थी. इसके तुरंत बाद मरम्मत का काम शुरू किया गया. प्राथमिकता के आधार पर सड़क की मरम्मत की गई, ताकि वाहनों की आवाजाही सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के जारी रहे.”
NHAI ने स्थानीय लोगों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उन्होंने उस जगह पर बैलेंसिंग कलवर्ट (पुलिया) बनाने नहीं दिया. प्राधिकरण का दावा है कि स्थानीय लोग कलवर्ट के रास्ते का इस्तेमाल वाहनों के आने-जाने के लिए करते थे.
NHAI ने कहा, “फिलहाल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर लगभग 1.5 किलोमीटर लंबी समानांतर नाली बनाई जा रही है. साथ ही बारिश के पानी की सुरक्षित निकासी के लिए ड्रेनेज की ढलान को दोबारा डिजाइन किया जा रहा है. यह व्यवस्था तब तक रहेगी, जब तक स्थायी ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह शुरू नहीं हो जाता.”
इस बीच, कांग्रेस ने एक्सप्रेसवे परियोजना में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया.
गुरुवार को एक्स पर कांग्रेस ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 14 अप्रैल को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था, लेकिन सिर्फ दो महीने बाद ही इस एक्सप्रेसवे पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए.
कांग्रेस ने कहा, “यह दिखाता है कि इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया.”
पार्टी ने आगे कहा कि यह पहला ऐसा मामला नहीं है. कांग्रेस ने दावा किया, “देशभर में कहीं पुल टूट रहे हैं, कहीं सड़कें, कहीं हाईवे, कहीं पानी की टंकियां, तो कहीं रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट की छतें गिर रही हैं. हर जगह बुनियादी ढांचा ढह रहा है.”
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार देश और जनता के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है.
गौरतलब है कि 36,000 करोड़ रुपये की लागत से बने गंगा एक्सप्रेसवे में भी प्रधानमंत्री मोदी के उद्घाटन के एक महीने के भीतर ही बड़ी दरारें दिखाई दी थीं.
‘यह सिर्फ एक सड़क नहीं’
अप्रैल में डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने 213 किलोमीटर लंबे छह लेन वाले दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया था. यह एक्सप्रेसवे दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से होकर गुजरता है. इसमें इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव कम करने के लिए भी विशेष सुविधाएं बनाई गई हैं.
उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “देहरादून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल देगा. इससे समय की बचत होगी, यात्रा सस्ती और तेज होगी, पेट्रोल-डीजल पर खर्च कम होगा, किराया और माल ढुलाई की लागत घटेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.”
मोदी ने कहा कि गाजियाबाद, बागपत, बड़ौत, शामली और सहारनपुर से होकर गुजरने वाला यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के इन शहरों के विकास में भी बड़ी भूमिका निभाएगा.
उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक सड़क नहीं है. यह पूरे क्षेत्र में व्यापार, उद्योग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स के लिए नए अवसर खोलने वाला प्रोजेक्ट है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां
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