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Monday, 3 August, 2026
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टिकट नहीं मिला, वरिष्ठ नेताओं ने नज़रअंदाज़ किया, नाराज़ नेताओं को हरियाणा BJP की नई टीम में जगह

प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता की पदाधिकारियों की सूची में उन नेताओं को जगह मिली है, जिन्होंने पार्टी के खिलाफ अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की थी. इनमें भाव्य बिश्नोई से लेकर सुनीता दुग्गल और लतिका शर्मा तक शामिल हैं.

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गुरुग्राम: जब हरियाणा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने इस हफ्ते पार्टी के पदाधिकारियों की अपनी सूची जारी की, तो एक बात साफ नज़र आई—पार्टी के कई ऐसे नेताओं को, जिन्हें चुनाव में टिकट नहीं मिला था या जिन्होंने खुले तौर पर वरिष्ठ नेतृत्व के प्रति अपनी नाराजगी जताई थी, नई टीम में जगह दी गई है.

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सहमति से मंजूर की गई इस सूची में आठ प्रदेश उपाध्यक्ष, तीन महासचिव, नौ प्रदेश सचिव, खजाने और प्रशासन का काम देखने वाले चार पदाधिकारी, मीडिया और आईटी का काम देखने वाले चार लोग, छह मोर्चा अध्यक्ष और दो प्रकोष्ठ प्रभारी बनाए गए हैं.

इस सूची में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला नाम भाव्य बिश्नोई का है. वह पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई के बेटे और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के पोते हैं. उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है.

कुछ महीने पहले तक बिश्नोई परिवार सार्वजनिक विवाद के केंद्र में था. अप्रैल में पंचकूला मेयर चुनाव से पहले एक बैठक को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा ने आरोप लगाया था कि बीजेपी उम्मीदवार श्याम लाल बंसल कई साल पहले इसी सीट पर इसलिए हार गए थे क्योंकि उस समय के मुख्यमंत्री भजन लाल और उनके लोगों ने “बदमाशी” की थी. कुलदीप और भाव्य ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और बाद में शर्मा ने माफी मांग ली.

इसके बाद से हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी के साथ कुलदीप बिश्नोई की नजदीकी दिखाई देती रही है. हालांकि, पिछले महीने हिसार की गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी में नायब सैनी के कार्यक्रम में वह शामिल नहीं हुए थे.

इससे पहले 2024 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान हिसार में कुलदीप बिश्नोई और उनके समर्थकों ने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को निशाना बनाया था. खट्टर ने बिना नाम लिए भजन लाल पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था. पार्टी ने कुलदीप को भी चुनाव का टिकट नहीं दिया था.

भाव्य बिश्नोई के अपने राजनीतिक सफर में भी कई उतार-चढ़ाव रहे हैं.

2019 के लोकसभा चुनाव में कुलदीप ने खुद चुनाव लड़ने के बजाय अपने बेटे को हिसार से मैदान में उतारा था. भाव्य तीसरे स्थान पर रहे. 2022 में जब कुलदीप ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा, तो उन्होंने आदमपुर उपचुनाव में भाव्य को उम्मीदवार बनाया. यह वही सीट थी, जिसे उन्होंने खुद खाली किया था और भाव्य ने आसानी से जीत हासिल की.

2024 में पिता-पुत्र दोनों को हिसार लोकसभा सीट से टिकट नहीं मिला. इसके बजाय खट्टर की पसंद के उम्मीदवार रणजीत सिंह को टिकट दिया गया. वह चुनाव हार गए और बाद में बीजेपी छोड़ दी.

सूची में एक और नाम सुनीता दुग्गल का है. टिकट मिलने और कटने के मामले में उनका राजनीतिक सफर भी काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है.

भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) की पूर्व अधिकारी दुग्गल ने 2014 के चुनाव से पहले सरकारी नौकरी से इस्तीफा दिया था. उन्हें भरोसा दिया गया था कि उन्हें सिरसा (एससी) सीट से लोकसभा का टिकट मिलेगा. लेकिन BJP ने यह सीट कुलदीप बिश्नोई की हरियाणा जनहित कांग्रेस को दे दी.

इसके बाद दुग्गल को कई महीनों तक पटौदी विधानसभा क्षेत्र में काम करने के लिए कहा गया, लेकिन आखिर में टिकट बिमला चौधरी को दे दिया गया. बाद में आखिरी समय पर उन्हें रतिया से उम्मीदवार बनाया गया, जहां वह इंडियन नेशनल लोकदल के रविंदर बालियाला से मामूली अंतर से हार गईं.

2019 के लोकसभा चुनाव में दुग्गल ने सिरसा सीट से तीन लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की. उन्होंने कांग्रेस के अशोक तंवर को हराया, लेकिन 2024 में BJP ने उन्हें फिर टिकट नहीं दिया. इस बार पार्टी ने खुद तंवर को टिकट दिया, जो कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और AAP में रहने के बाद BJP में शामिल हुए थे. तंवर कांग्रेस की कुमारी सैलजा से चुनाव हार गए.

दुग्गल को एक बार फिर रतिया से उम्मीदवार बनाया गया, लेकिन वह कांग्रेस के जरनैल सिंह से हार गईं.

अब दुग्गल को हराने वाले नेताओं में से एक नेता गुप्ता की सूची में उनके साथ शामिल हैं. 2014 में दुग्गल को हराने वाले रविंदर बालियाला 2019 में बीजेपी में शामिल हुए थे और उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है.

सूची में दीपक मंगला का नाम भी है. उन्होंने 2019 में पलवल विधानसभा सीट जीती थी. इससे पहले 2014 में वह कांग्रेस के करण सिंह दलाल से हार गए थे. लेकिन 2024 में उन्हें टिकट नहीं दिया गया और पार्टी ने गौरव गौतम को उम्मीदवार बनाया. अब मंगला को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है.

लतिका शर्मा ने 2014 में बीजेपी के टिकट पर कालका विधानसभा सीट जीती थी, लेकिन 2019 में वह कांग्रेस के प्रदीप चौधरी से हार गईं. 2024 में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया और पूर्व मंत्री विनोद शर्मा की पत्नी शक्ति रानी शर्मा को टिकट दिया. इस पर लतिका शर्मा का पार्टी के साथ सार्वजनिक विवाद हुआ था. उस समय उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने रोते हुए अपने साथ अन्याय होने का आरोप लगाया था. अब उन्हें भी प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है.

बाकी प्रदेश उपाध्यक्षों में मौजूदा विधायक लक्ष्मण यादव और लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे जींद के जवाहर सैनी और कैथल के अशोक गुर्जर शामिल हैं.

दूसरे ऑफिस-बेयरर

गुप्ता की लिस्ट में दूसरे ऑफिस-बेयरर जनरल सेक्रेटरी गोपाल शर्मा (फरीदाबाद), सत्यप्रकाश जरावता (गुरुग्राम) और वेद फुल्ला (फतेहाबाद) हैं.

नौ स्टेट सेक्रेटरी हैं मदन चौहान (यमुनानगर), हरविंदर कोहली (गुरुग्राम), अमरपाल राणा (जींद), प्रतिभा सुमन (रोहतक), मीना चौहान (करनाल), नागेंद्र शर्मा (रोहतक), विकास दहिया (सोनीपत), रवि बतन (कुरुक्षेत्र) और गुरप्रीत कौर (अंबाला).

अजय बंसल (रोहतक) स्टेट ट्रेजरर, नरेंद्र गुप्ता (फरीदाबाद) को-ट्रेजरर, हरिप्रकाश यादव (झज्जर) ऑफिस सेक्रेटरी और रामेश्वर चौहान (यमुनानगर) को-ऑफिस सेक्रेटरी.

इसके अलावा, डॉ. संजय शर्मा (अंबाला) चीफ स्पोक्सपर्सन, भूपेश्वर दयाल (सोनीपत) मीडिया कोऑर्डिनेटर, आदित्य चावला (यमुनानगर) आईटी कोऑर्डिनेटर और सोमबीर कटारिया (झज्जर) सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर हैं.

मोर्चा प्रेसिडेंट हैं अक्षित दहिया (सोनीपत)—युवा मोर्चा, ऋचा पाहवा (यमुनानगर)—महिला मोर्चा, महेश चौहान (गुरुग्राम)—किसान मोर्चा, सुनील सैन (दादरी)—ओबीसी मोर्चा, अजय खुंडिया (रोहतक)—एससी मोर्चा और डॉ. अवनीत वडैच (कुरुक्षेत्र)—माइनॉरिटी मोर्चा.

सेल इंचार्ज हैं मुकेश गौड़ (भिवानी) और मनीष यादव (गुरुग्राम).

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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