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Thursday, 11 June, 2026
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राज्यसभा नामांकन रद्द होने के खिलाफ SC पहुंचीं कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन, क्या है पूरा विवाद

यह मामला सितंबर 2025 में तेलंगाना के हैदराबाद में नामपल्ली डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट कोर्ट में एक महिला कांग्रेस वर्कर द्वारा फाइल की गई प्राइवेट कंप्लेंट से जुड़ा है.

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हैदराबाद: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन ने गुरुवार सुबह सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की. उन्होंने मध्य प्रदेश के रिटर्निंग अधिकारी द्वारा हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी न देने के आधार पर उनका राज्यसभा नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती दी है.

मामले पर सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ के सामने जल्द सुनवाई होने की उम्मीद है. कांग्रेस नेता का मध्य प्रदेश से राज्यसभा सीट के लिए नामांकन मंगलवार को चुनाव आयोग द्वारा खारिज कर दिया गया था.

यह मामला सितंबर 2025 में तेलंगाना के हैदराबाद स्थित नामपल्ली जिला मजिस्ट्रेट अदालत में कांग्रेस कार्यकर्ता ए. श्रीलता द्वारा दायर एक निजी शिकायत से जुड़ा है.

अपनी लिखित शिकायत में, जिसकी प्रति दिप्रिंट के पास है, श्रीलता ने आरोप लगाया कि मीनाक्षी नटराजन ने कुंभम शिवकुमार रेड्डी को राजनीतिक संरक्षण दिया. रेड्डी पर उन्होंने यौन दुराचार, छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना था कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद तेलंगाना कांग्रेस के नेताओं, जिनमें मीनाक्षी नटराजन भी शामिल हैं, ने शिवकुमार रेड्डी की प्राथमिक सदस्यता रद्द कराने के लिए कोई हस्तक्षेप नहीं किया.

श्रीलता ने अपनी शिकायत में सात कांग्रेस नेताओं के नाम लिए थे. इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़, पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री वाकाटी श्रीहरि और नारायणपेट विधायक चित्तेन पार्निका रेड्डी भी शामिल हैं.

मामले के दस्तावेज़ के अनुसार यह घटनाक्रम लगभग छह साल पहले, 2020 में शुरू हुआ था. उस समय कांग्रेस नेता कुंभम शिवा कुमार रेड्डी जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) के अध्यक्ष थे. उन्हें श्रीलता के साथ काम करने को कहा गया था, जिन्हें 2020 के नारायणपेट नगर पालिका चुनाव की जिम्मेदारी दी गई थी. चुनाव के दौरान दोनों नेताओं के बीच कथित रूप से विवाद हो गया, जिसके कारण कांग्रेस यह चुनाव भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) से हार गई.

तेलंगाना कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद ने दिप्रिंट को बताया कि जब श्रीलता ने रेड्डी के खिलाफ कुछ कथित आपत्तिजनक सामग्री सार्वजनिक करने की धमकी दी, तो रेड्डी ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया. यह मामला कांग्रेस नेतृत्व के सामने लाया गया, जिसके बाद 2021 के मध्य में शिवा कुमार रेड्डी को डीसीसी अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए कहा गया.

नगरपालिका चुनाव के बाद भी श्रीलता ने 2022 और 2023 में हैदराबाद और बेंगलुरु में शिवा कुमार रेड्डी के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज कराईं.

अदालत के निर्देश पर 7 मई 2022 को पंजागुट्टा पुलिस स्टेशन और 28 जून 2023 को बेंगलुरु के कब्बन पार्क पुलिस स्टेशन में मामले दर्ज किए गए. दोनों शिकायतें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 223 (लोक सेवक के वैध आदेश की जानबूझकर अवहेलना) के तहत दर्ज की गई थीं.

हालांकि, सबूतों की कमी के कारण ये मामले बाद में खारिज कर दिए गए.

इसके बाद शिवा कुमार रेड्डी और श्रीलता दोनों ने नारायणपेट विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस की राज्य चुनाव समिति से टिकट मांगा. कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, दोनों टिकट के लिए दबाव बना रहे थे, लेकिन उनके बीच जारी विवाद को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने आखिरकार रेड्डी की बहू चित्तेन पार्निका रेड्डी को टिकट दिया, जो अब नारायणपेट की विधायक हैं.

दिसंबर 2023 में कांग्रेस सत्ता में आई और फरवरी 2025 में मीनाक्षी नटराजन ने दीपा दासमुंशी की जगह एआईसीसी तेलंगाना प्रभारी का पद संभाला.

सितंबर 2025 में, नटराजन के प्रभारी बनने के सात महीने बाद, श्रीलता ने फिर आरोप लगाया कि उन्हें रेड्डी और उनके समर्थकों से जान का खतरा है. इस बार उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट के सामने मीनाक्षी नटराजन और सात अन्य कांग्रेस नेताओं के खिलाफ निजी शिकायत दायर की. उनका आरोप था कि उन्हें बार-बार धमकियों की जानकारी देने के बावजूद नेताओं ने शिवा कुमार रेड्डी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की.

कांग्रेस सांसद ने कहा, “श्रीलता ने तीसरी बार पीड़िता के रूप में शिकायत दर्ज कराई थी. वह चाहती थीं कि रेड्डी को केवल पद से हटाया न जाए, बल्कि पार्टी से भी निकाला जाए.”

हालांकि, कांग्रेस नेताओं को भी यह स्पष्ट नहीं है कि श्रीलता अब भी कांग्रेस की सदस्य हैं या नहीं. सांसद ने कहा, “न तो उन्हें पार्टी से निकाला गया है और न ही उन्होंने इस्तीफा दिया है.”

श्रीलता से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी.

पूर्व ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) के तारनाका क्षेत्र की पूर्व पार्षद रह चुकीं श्रीलता 2002 से 2007 तक तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) में थीं. वह 2007 से 2010 तक संयुक्त आंध्र प्रदेश में पार्टी की महिला सचिव और संयुक्त सचिव भी रहीं. बाद में उन्होंने कांग्रेस जॉइन कर ली.

9 जून को मामला सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने कोशिश की कि यह विवाद मीनाक्षी नटराजन की राज्यसभा उम्मीदवारी पर असर न डाले. 2022 और 2023 के मामले अब प्रभावी नहीं हैं, लेकिन सितंबर 2025 में दर्ज मामला अभी भी लंबित है, इसलिए चुनाव आयोग ने उसे ध्यान में रखा.

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शिकायत में मीनाक्षी नटराजन का नाम केवल एक बार आया है और उसमें सिर्फ यह कहा गया है कि उन्हें रेड्डी द्वारा दी गई कथित धमकियों की जानकारी दी गई थी. फिर भी उन्हें अदालत की ओर से नोटिस भेजा गया था.

कांग्रेस के एक नेता ने कहा, “मीनाक्षी जी ने अदालत के सवालों का जवाब दिया था, लेकिन मजिस्ट्रेट के आगे के निर्देशों के बाद हम मामले की प्रगति पर नजर नहीं रख सके.”

तेलंगाना हाईकोर्ट के वकील के. करुणा सागर, जो राज्य भाजपा की ओर से पेश होते हैं, उन्होंने दिप्रिंट को बताया कि मीनाक्षी नटराजन को इस मामले की जानकारी थी और कांग्रेस ने अदालत में जवाब देने के लिए एक वकील भी नियुक्त किया था.

उन्होंने कहा, “चुनावी हलफनामों का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है. खबरों के अनुसार, रिटर्निंग अधिकारी ने पाया कि मीनाक्षी नटराजन को हैदराबाद अदालत में लंबित मामले की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसका खुलासा नहीं किया. इसी आधार पर उनका नामांकन खारिज किया गया.”

उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36(2)(b) के तहत राज्यसभा नामांकन रद्द होना लोकतंत्र के एक मूल सिद्धांत को दर्शाता है—पूर्ण जानकारी देना अनिवार्य है, वैकल्पिक नहीं.

हालांकि, मध्य प्रदेश में मीडिया से बात करते हुए मीनाक्षी नटराजन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और नामांकन रद्द होने को “राज्यसभा चुनाव को प्रभावित करने की भाजपा की कोशिश” बताया.

चुनाव आयोग द्वारा उनकी उम्मीदवारी खारिज किए जाने के बाद कई कांग्रेस नेता उनके समर्थन में सामने आए.

तेलंगाना से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने विदेश से रिकॉर्ड किए गए संदेश में कहा, “मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी एक गलतफहमी के कारण रद्द की गई है. उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है. ऐसे में यह सवाल ही नहीं उठता कि उन्हें किसी आपराधिक मामले की जानकारी देनी थी. अदालत का साधारण नोटिस ऐसी चीज नहीं है जिसे अनिवार्य रूप से हलफनामे में बताया जाए.”

तेलंगाना कैबिनेट के लगभग सभी मंत्रियों ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इस कार्रवाई को अनुचित बताया है. वहीं राज्य के कई पदाधिकारियों ने शहर में अंबेडकर प्रतिमा के पास विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है.

इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा के वरिष्ठ नेता बी.एल. संतोष ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “कांग्रेस और उसके समर्थक मीडिया में जोर-जोर से शोर मचा रहे हैं, लेकिन एक सवाल का जवाब नहीं दे पा रहे हैं—तेलंगाना वाला मामला सबसे पहले कांग्रेस के ही किस व्यक्ति ने सार्वजनिक किया? भविष्य में ऐसी शर्मिंदगी से बचना है तो पहले उस छेद को बंद कीजिए.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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