नई दिल्ली: संसद की ओर मार्च के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन को हिंसक हुए 10 दिन से ज्यादा समय हो चुका है. अब घायल दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवारों ने सांसदों से प्रदर्शन स्थलों पर तैनात पुलिस अधिकारियों के काम करने की स्थिति और उनकी सुरक्षा पर ध्यान देने की मांग की है.
20 जुलाई को नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘चलो संसद’ मार्च निकाला गया था. इस दौरान हुई हिंसा में कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए थे.
शुक्रवार को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुलिस अधिकारियों के परिवारों ने कहा कि पुलिसकर्मियों को लगी चोटों को नजरअंदाज किया गया है.
ASI रैंक के एक अधिकारी की पत्नी सीमा ने कहा, “एक नैरेटिव यह है कि प्रदर्शन छात्र कर रहे थे और पुलिसकर्मियों ने बर्बरता की, लेकिन यह सिर्फ एकतरफा बात है.”
उन्होंने कहा कि अधिकारी और उनके परिवार संसद में पुलिसकर्मियों के घायल होने के मुद्दे पर चर्चा की उम्मीद कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि पुलिसकर्मी कैसे घायल हुए. इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए…यही पुलिसकर्मी संसद और देश की सुरक्षा में तैनात होते हैं और हमें उम्मीद है कि इस मुद्दे को संसद में उठाया जाएगा.”
परिवारों ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग रैंक के 250 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए और 110 से ज्यादा बैरिकेड, 300 से ज्यादा बॉडी प्रोटेक्टर, 350 से ज्यादा हेलमेट और 25 से ज्यादा पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हुए. नई दिल्ली जिला पुलिस के अधिकारियों ने भी दिप्रिंट को बताया कि करीब 250 पुलिसकर्मी घायल हुए.
पुलिस के अनुसार, संसद की ओर मार्च के दौरान सुरक्षा बलों ने लाठी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसमें 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए.
‘हमले के लिए चप्पल, जूते, गमले और पत्थरों का इस्तेमाल’
अन्य पुलिसकर्मियों के परिवारों से घिरीं सीमा ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर तैनात अपने पति के साथ कथित तौर पर हुई घटना के बारे में बताया.
उन्होंने कहा कि उनके पति 33 साल से पुलिस में हैं और उन्होंने कांस्टेबल के रूप में पुलिस में नौकरी शुरू की थी. उस सुबह भी वह रोज की तरह घर से निकले थे. “20 जुलाई को वह भी सुबह जल्दी अपना टिफिन लेकर निकले थे. सुबह 11 बजे मेरी उनसे बात हुई. उन्होंने बताया कि भीड़ बढ़ रही है और प्रदर्शनकारी संसद जाने की योजना बना रहे हैं. एक पुलिसकर्मी की पत्नी होने के नाते मैंने उनसे सावधान रहने को कहा. इसके बाद कुछ समय तक मेरी उनसे बात नहीं हुई.”
जब उनके पति ने शाम करीब 7 बजे फोन किया, तो उन्हें पता चला कि उनका इलाज एलएनजेपी अस्पताल में चल रहा है. “उन्होंने बताया कि भीड़ भड़क गई थी और कुछ असामाजिक तत्व भी वहां थे.”
उन्होंने कहा कि उनके पति ने उन्हें बताया था कि “पुलिस पर हमला करने के लिए चप्पल और जूते, गमले और पत्थरों का इस्तेमाल किया गया.”
“मैं बहुत टेंशन में थी. वह रात 11 बजे देर से घर आए और बताया कि बैरिकेड तोड़ दिए गए थे और पुलिसकर्मियों को पीटा गया था. उनका हेलमेट भी टूट गया था. अगर उस समय कोई पत्थर लग जाता, तो वह शायद बच नहीं पाते.”
‘पिता घायल थे, अस्पताल में बेहोश थे’
सीमा के साथ कुंजन भी मौजूद थीं. वह दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट हैं और उनके पिता एसआई हैं, जो प्रदर्शन स्थल पर बैरिकेड के सामने सबसे आगे तैनात थे. दिल्ली पुलिस में शामिल होने से पहले वह भारतीय नौसेना में मरीन कमांडर थे.
कुंजन ने दावा किया कि 25 जुलाई को उनके पिता को भीड़ खींचकर ले गई थी और वह अस्पताल में बेहोश थे. उन्होंने कहा, “मैंने उस दिन रात 10 बजे उन्हें देखा. चारों तरफ खून लगा हुआ था, उनकी वर्दी पर भी खून था. यह बहुत दर्दनाक था. उन्होंने मुझसे कहा, ‘ड्यूटी पर रहते हुए ऐसी चीज़ें होती हैं.’”
बाद में कुंजन ने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट देखीं. “मैंने देखा कि लोगों ने उन्हें पहले ही अपराधी घोषित कर दिया था.”
लक्ष्य सिंह बिष्ट के पिता एसीपी रैंक के अधिकारी हैं और उन्हें चार वीरता पुरस्कार मिले हैं. उन्होंने कहा कि झड़प के दौरान उनके पिता के सिर में गंभीर चोटें आईं.
उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मेरे पिता भी जंतर-मंतर पर तैनात थे. 25 जुलाई को हमें पता चला कि उनके सिर में गंभीर चोटें आई हैं. उनका पूरा सिर मुंडा हुआ था और टांके लगे थे. मैं डर गया था.”
उन्होंने कहा, “जब वह घर पहुंचे, तो उन्होंने मुझे बताया कि छात्रों के अलावा कई ऐसे लोग भी थे जो हंगामा करना चाहते थे. जब उन्होंने पत्थर फेंकना शुरू किया, तो मेरे पिता पुलिस अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे…तभी एक पत्थर उनके सिर पर लगा और उनका सिर लगभग फट गया.”
उन्होंने आगे कहा, “जो हुआ, उसे लेकर संसद में कोई बातचीत नहीं हो रही है. मुझे पता चला कि जिन लोगों ने हमला किया, उन्होंने अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवेदन दिया है. इसलिए हमने भी याचिका दायर की है.”
इसी तरह की चिंता उपनीत कौर ने भी जताई, जिनके पति एसीपी रैंक के अधिकारी हैं. उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को जब उनके पति घर लौटे, तो वह घायल थे.
उन्होंने कहा, “एक पुलिस अधिकारी के पीछे सिर्फ एक अधिकारी नहीं होता. उसके पीछे एक पत्नी, बच्चा, माता-पिता और परिवार इंतजार कर रहा होता है.”
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं
25 जुलाई को प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन खत्म कर दिया गया था. प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना सरकार के साथ बातचीत के दौरान CJP की एक प्रमुख मांग थी.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को अपनी जांच जारी रखने और आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति दी.
गुरुवार को दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने CJP प्रदर्शन के संबंध में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज 13 मामलों को लेकर एक आदेश जारी किया.
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की मंजूरी से जारी इस आदेश में कहा गया कि प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी, सिवाय उन लोगों के जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है.
आदेश में कहा गया कि इन मामलों में की गई किसी भी गिरफ्तारी और हिरासत में “गिरफ्तारी की समीक्षा और गिरफ्तार लोगों को रिहा करने की प्रक्रिया जल्द से जल्द” पूरी की जाएगी.
प्रमुख सचिव (गृह) संतोष डी. वैद्य द्वारा जारी यह आदेश ऐसे समय आया है जब कई राज्यों ने भी प्रदर्शनों से जुड़े FIR वापस लेने के लिए इसी तरह के कदम उठाए हैं.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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