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Thursday, 11 June, 2026
होमदेशशुभेंदु सरकार बनने के बाद बंगाल से 1,930 बांग्लादेशी घुसपैठिए वापस भेजे गए, मार्च से आंकड़ा 2,980 पहुंचा

शुभेंदु सरकार बनने के बाद बंगाल से 1,930 बांग्लादेशी घुसपैठिए वापस भेजे गए, मार्च से आंकड़ा 2,980 पहुंचा

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) इस मामले में बेहतर सहयोग के लिए फिलहाल नई दिल्ली में बातचीत कर रहे हैं.

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नई दिल्ली: मार्च से अब तक कम से कम 2,980 “अवैध” बांग्लादेशी घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल के कई बॉर्डर आउटपोस्ट के जरिए वापस भेजा गया है. इनमें से 1,930 लोगों को पिछले महीने राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद वापस भेजा गया. दिप्रिंट को इस बारे में जानकारी मिली है.

यह आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) इस मुद्दे पर बेहतर सहयोग के लिए नई दिल्ली में बातचीत कर रहे हैं.

बीएसएफ सूत्रों द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 19 मई से अब तक कम से कम 1,930 “अवैध” बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा गया है. इसी दिन पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पहली बार “डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट” नीति की घोषणा की थी.

बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को दिप्रिंट से कहा, “19 मई से 10 जून के बीच पश्चिम बंगाल के बॉर्डर आउटपोस्ट से भारत में अवैध रूप से रह रहे कम से कम 1,930 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा गया.”

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में पश्चिम बंगाल की पूर्वी सीमा से कम से कम 450 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा गया था, जबकि मार्च में यह संख्या 600 थी.

पिछले महीने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि “जनसंख्या संरचना में बदलाव एक गंभीर समस्या है, जो केवल हमारी संप्रभुता ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, सामाजिक ढांचे में बड़े बदलाव और आदिवासी समाजों की सुरक्षा से भी जुड़ी है.”

उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि “अवैध घुसपैठ और अन्य असामान्य कारणों” से भारत में हो रहे जनसंख्या संबंधी बदलावों का व्यापक अध्ययन करने के लिए एक समिति बनाई जाएगी.

बीएसएफ-बीजीबी के बीच ‘तीखी बहस’

इधर, पिछले कुछ दिनों में भारत से “अवैध पुश-बैक” के आरोपों को लेकर बीएसएफ और बीजीबी के बीच कई बार तीखी बहस भी हुई है. “पुश-बैक” वह प्रक्रिया है, जिसमें “अवैध” बांग्लादेशी घुसपैठियों को बिना बीजीबी को जानकारी दिए जमीनी सीमा के जरिए बांग्लादेश वापस भेज दिया जाता है.

एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, नियमों के तहत जो विदेशी नागरिक अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते हैं, उन्हें बीएसएफ को सौंपा जाता है. इसके बाद बीएसएफ पड़ोसी देश की सीमा सुरक्षा एजेंसी, इस मामले में बीजीबी, से संपर्क कर उन्हें वापस भेजने की व्यवस्था करती है.

मंगलवार को एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें बीएसएफ और बीजीबी अधिकारियों को चार लोगों के एक परिवार को लेकर बहस करते देखा गया. इस परिवार में दो महिलाएं और एक छोटा बच्चा भी शामिल था.

वीडियो में बीजीबी अधिकारी आरोप लगाते दिखे कि बीएसएफ हर रात कई लोगों को “अंदर धकेल रही है”.

उनमें से एक अधिकारी कहता है, “अगर वे बांग्लादेशी भी हैं, तब भी उन्हें कानूनी तरीके से भेजा जाना चाहिए.”

इस पर बीएसएफ अधिकारी जवाब देता है, “उन्होंने अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया है और यही समस्या है.”

मामले की जानकारी रखने वाले बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि यह परिवार 5 मई को मिला था. उस समय दोनों देशों के अधिकारियों के बीच परिवार की नागरिकता को लेकर बहस हुई थी. अधिकारी ने कहा, “इस परिवार को शनिवार रात बांग्लादेश भेज दिया गया.”

पिछले एक हफ्ते में ऐसा सिर्फ यही मामला नहीं था.

6 जून की सुबह तड़के 10 लोगों के एक समूह को कथित तौर पर उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी इलाके से बीएसएफ द्वारा बांग्लादेश की ओर भेजा गया था, लेकिन बीजीबी ने कथित तौर पर उन्हें बांग्लादेश में प्रवेश नहीं करने दिया और भारत-बांग्लादेश के बीच स्थित नो-मैन्स लैंड में छोड़ दिया.

बीएसएफ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “सोमवार तक यह समूह जलपाईगुड़ी के सकाती आउटपोस्ट के पास नो-मैन्स लैंड में फंसा हुआ था. मौसम की कठिनाइयों को देखते हुए उन्हें भोजन दिया गया और बाद में जलपाईगुड़ी होल्डिंग सेंटर ले जाया गया.”

4 जून को 28 लोगों के एक समूह को बांग्लादेश के चपाईनवाबगंज इलाके के पास बीजीबी ने रोका था. बीजीबी का आरोप था कि गुरुवार तड़के बीएसएफ ने इस समूह को सीमा पार धकेला था.

इसके बाद इस मुद्दे पर बीएसएफ और बीजीबी के बीच फ्लैग मीटिंग हुई.

बीएसएफ के एक अधिकारी ने कहा, “उनकी पहचान बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में हुई है. हमने बीजीबी से पहचान सत्यापन की प्रक्रिया तेज करने को कहा है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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