नई दिल्ली: गिरिबाला सिंह न सिर्फ ट्विशा शर्मा से उसके पीरियड्स की तारीखों को लेकर बार-बार सवाल करती थीं, बल्कि उन्होंने अपनी बहू को मेडिकल अबॉर्शन कराने से जबरदस्ती रोकने की भी कोशिश की. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी चार्जशीट में यह बात कही है.
12 मई की रात भोपाल में अपने ससुराल में मृत मिलने से पांच दिन पहले ट्विशा ने कथित तौर पर एक डॉक्टर को बताया था कि उनके पति समर्थ सिंह और उनका परिवार उस पर अबॉर्शन की प्रक्रिया को “वापस लेने” के लिए दबाव डाल रहे थे.
मई के आखिरी हफ्ते में गिरफ्तारी से पहले गिरिबाला ने मीडिया से कहा था कि परिवार की आपत्ति के बावजूद उनकी बहू ने MTP (Medical Termination of Pregnancy) की दवाएं ली थीं और बाद में वह इस प्रक्रिया को रिवर्स करना चाहती थीं. रिटायर्ड जज ने कहा था, “7 मई को उसने गोली ली होगी. उसने पूरी MTP प्रक्रिया पूरी कर ली थी और हमें उसका साथ देना पड़ा.”
CBI ने गिरिबाला और समर्थ दोनों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) (दहेज से मौत), 85 (पति या पति के रिश्तेदार द्वारा महिला के साथ क्रूरता), 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 3(5) (साझा इरादा) और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत आरोप लगाए हैं.
600 से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट में CBI ने आरोप लगाया कि गिरिबाला के बड़े बेटे की पूर्व पत्नी के साथ भी इसी तरह का व्यवहार किया गया था, क्योंकि उनके बच्चे नहीं थे और शादी के बाद वह नौकरी नहीं कर रही थीं.
चार्जशीट में यह भी कहा गया कि ट्विशा ने अपने भाई की पत्नी को बताया था कि गिरिबाला उनके अबॉर्शन के फैसले से बहुत नाराज़ थीं और समर्थ ने अपनी मां से कहा था: “पहली वाली को भी आपने बांझ कहकर भगा दिया था.”
एजेंसी ने चार्जशीट में आरोप लगाया, “शादी के बाद से ही वह (गिरिबाला) लगातार उनके (ट्विशा की) पीरियड्स के बारे में पूछती थीं. जब ट्विशा इन बार-बार पूछे जाने वाले सवालों से परेशान हो गई और उन्होंने आरोपी से कहा कि वह गर्भधारण करने के अपने फैसले के बारे में खुद बताएंगी, तो आरोपी गुस्सा हो गई. आरोपी गिरिबाला सिंह ने इस बारे में आरोपी समर्थ सिंह से भी शिकायत की.”
एजेंसी ने आरोप लगाया, “उस समय आरोपी समर्थ सिंह ने ट्विशा के पिछले रिश्तों का ज़िक्र करके उनके चरित्र पर सवाल उठाए. इससे उसे मानसिक प्रताड़ना और परेशानी हुई.”
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा की रहने वालीं 33 साल की ट्विशा भोपाल के घर में फंदे से लटकी मिली थीं. उनकी शादी समर्थ से सिर्फ पांच महीने पहले हुई थी. गिरिबाला और उनके वकील बेटे को भोपाल सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में रखा गया है.
ट्विशा की मौत को लेकर हुए हंगामे के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने केस ट्रांसफर कर दिया था. इसके कुछ घंटे बाद CBI ने रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया था.
दिप्रिंट ने गिरिबाला और उनके बेटे की ओर से वकील एनॉश जॉर्ज कार्लो को CBI के आरोपों के बारे में व्हाट्सएप मैसेज और फोन कॉल के जरिए सवाल भेजे हैं. जवाब मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा.
मार्च और मई के बीच शादीशुदा ज़िंदगी पूरी बदल गई
CBI की चार्जशीट के मुताबिक, ट्विशा और समर्थ की मुलाकात पिछले साल फरवरी में एक ऑनलाइन डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी. ट्विशा ने मार्च में ही समर्थ से शादी करने का फैसला कर लिया था और अपने परिवार को इसकी जानकारी दी थी. चार्जशीट में कहा गया कि शादी 9 दिसंबर को हुई थी और शादी का पूरा खर्च ट्विशा के परिवार ने उठाया था.
CBI की चार्जशीट के मुताबिक, समर्थ ने कई बार ट्विशा को मानसिक रूप से परेशान किया. इसमें ऐसे अपमानजनक शब्द भी शामिल थे, जिनसे यह संकेत मिलता था कि शादी से पहले उसके कई रिश्ते थे. CBI ने आरोप लगाया कि जब ट्विशा ने अपनी सास से इन घटनाओं की शिकायत की, तो गिरिबाला अपने बेटे को “बचाती” थीं.
ट्विशा और उनके पति और सास के बीच रिश्ते में मार्च में ज्यादा तनाव आने लगा. उस समय ट्विशा अपने पिता के साथ थीं, जो हार्ट अटैक के बाद ठीक हो रहे थे.
CBI ने चार्जशीट में बताया कि गिरिबाला और समर्थ दोनों ने कथित तौर पर ट्विशा को 14 मार्च को भोपाल वापस आने के लिए मजबूर किया. अगले महीने ट्विशा गर्भवती हो गईं, लेकिन वह कुछ समय लेना चाहती थीं और अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में सोचना चाहती थीं. इसके पीछे उन्होंने अपने पति के खराब व्यवहार को वजह बताया था.
CBI की चार्जशीट में लिखा है, “जांच में पता चला कि शादी के बाद ट्विशा शर्मा को आरोपी समर्थ सिंह ने कई बार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया. आरोपी समर्थ सिंह ने कई बार उनके लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया…जबकि मृतका ने शादी से पहले अपने पुराने रिश्तों के बारे में उसे ईमानदारी और सच्चाई से बताया था.”
ट्विशा की मां ने अपने दामाद के व्यवहार की शिकायत करने के लिए गिरिबाला को फोन किया, लेकिन CBI ने आरोप लगाया कि गिरिबाला ने ट्विशा को परेशान करना जारी रखा और उनके पुराने रिश्तों के बारे में लगातार पूछताछ करके उन्हें तनाव में रखा.
बाद में दोनों परिवार भोपाल में मिले. CBI के मुताबिक, दोनों परिवारों ने “आपसी सहमति” से फैसला किया कि अपने रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए दंपति काउंसलिंग कराएंगे. CBI ने कहा कि इसी बैठक में 23 अप्रैल को समर्थ ने ट्विशा को बताया कि वह बेंगलुरु जाने की योजना बना रहा है और पूछा कि क्या वह उसके साथ जाएंगी.
ट्विशा ने मानसिक प्रताड़ना के डर से यह प्रस्ताव ठुकरा दिया और नौकरी के अवसर तलाशने के लिए नोएडा लौट गईं. इसके बाद वह 30 अप्रैल को भोपाल पहुंचीं, जब समर्थ को बेंगलुरु से वापस आना था.
उसी दिन ट्विशा और समर्थ एक अस्पताल गए. वहां उन्होंने डॉक्टर को अनचाही प्रेग्नेंसी को खत्म करने के अपने फैसले के बारे में बताया. डॉक्टर ने दवाओं से अबॉर्शन की सलाह दी, लेकिन शांत दिमाग से फैसला लेने से पहले 10 दिनों तक चिंता का इलाज करने वाली दवाएं लेने की सलाह दी.
12 मई को CBI के मुताबिक, ट्विशा ने कथित तौर पर अपनी मां से 3,000 रुपये भेजने के लिए कहा था, ताकि वह नसीराबाद जाने का टिकट बुक कर सके. ट्विशा ने बताया था कि समर्थ उसे कपल काउंसलिंग सेशन में ले जाने के लिए तैयार नहीं था. उसी दिन CBI के मुताबिक, ट्विशा ने अपनी मां और भाभी को बताया कि उन्होंने शादी बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन अब वह वापस लौटना चाहती हैं.
ट्विशा के परिवार के वकील अंकुर पांडे और शुभांक दीक्षित ने कहा कि CBI की जांच में दो कमियां हैं.
उन्होंने कहा कि पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बताया गया था कि ट्विशा के शरीर पर चोट और नीले निशान थे, जो “मौत के बाद नहीं हो सकते, क्योंकि चोट के निशान के लिए खून का बहना ज़रूरी होता है.”
दीक्षित ने दिप्रिंट को बताया, “हालांकि, दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ऐसी किसी चोट को नहीं माना गया. इसमें उस लंबे समय को भी ध्यान में नहीं रखा गया, जब जांच और दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग के बीच शव रखा गया था.”
दूसरी कमी यह थी कि CBI ने गिरिबाला और समर्थ के अलावा किसी और व्यक्ति पर आरोप नहीं लगाया, जबकि ट्विशा का पति गिरफ्तारी से बचने के लिए एक हफ्ते से ज्यादा समय तक फरार रहा था.
दीक्षित ने कहा, “किसी व्यक्ति को अपराध के लिए उकसाने के लिए कोई न कोई उकसाने वाला जरूर होता है. जब समर्थ गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहा था, तब किसी ने उसे छिपाकर रखा था. ऐसे लोगों की पहचान करने या उनके खिलाफ कार्रवाई करने की कोई कोशिश नहीं की गई.”
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