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Saturday, 1 August, 2026
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हॉकी इंडिया की नई केसरी जर्सी पर कांग्रेस ने जताया कड़ा विरोध, खड़गे ने पुनर्विचार की मांग की

कांग्रेस प्रमुख का कहना है कि नीली जर्सी भारत की खेल विरासत का हिस्सा है; उन्होंने फ़ैसला लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और सरकार से इस फ़ैसले को वापस लेने की अपील की है.

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नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आगामी एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप के लिए भारतीय हॉकी टीम की पारंपरिक नीली जर्सी की जगह केसरी रंग की जर्सी लाने के फैसले की आलोचना की है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला राष्ट्रीय खेल प्रतीकों पर एक राजनीतिक विचारधारा थोपने की कोशिश है.

यह विवाद तब शुरू हुआ जब हॉकी इंडिया ने पुरुष और महिला टीमों के लिए नई केसरी रंग की मुख्य जर्सी पेश की. हॉकी इंडिया का कहना है कि जर्सी का नया डिजाइन खिलाड़ियों को नीले सिंथेटिक टर्फ पर ज्यादा साफ दिखाई देने के लिए बनाया गया है. साथ ही केसरी रंग इसलिए चुना गया क्योंकि यह भारतीय तिरंगे के रंगों में से एक है.

लेकिन इस फैसले पर सवाल उठने लगे हैं. विपक्षी नेताओं के साथ-साथ ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम के कप्तान रहे वासुदेवन बास्करन और भारत के पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा जैसे कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने भी इसकी आलोचना की है.

खड़गे ने एक्स पर हिंदी में किए गए एक पोस्ट में कहा कि यह मामला “सिर्फ खेल से जुड़ा फैसला नहीं है.” बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की भावनाओं और देश की खेल परंपरा से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि भारतीय टीमों को लंबे समय से “मेन इन ब्लू”, “द ब्लूज” और “ब्लू टाइगर्स” के नाम से जाना जाता है. उन्होंने नीली जर्सी को भारतीय खेलों की विरासत बताया.

इस फैसले की वजह पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा, “आज यह समझना मुश्किल है कि इस ऐतिहासिक पहचान को बदलने की जरूरत क्यों पड़ी.”

उन्होंने कहा, “सवाल किसी रंग का नहीं है, बल्कि फैसला लेने की प्रक्रिया, पारदर्शिता और जनता की भावनाओं के सम्मान का है.” खड़गे ने साफ किया कि उन्हें केसरी रंग से कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने कहा, “केसरी, सफेद और हरा हमारे राष्ट्रीय ध्वज के रंग हैं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के झंडे में भी इन तीनों रंगों को समान सम्मान दिया गया है.”

कांग्रेस अध्यक्ष ने भारतीय जनता पार्टी-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (बीजेपी-आरएसएस) के वैचारिक समूह पर आरोप लगाया कि वह राष्ट्रीय संस्थानों और प्रतीकों पर अपनी छाप छोड़ने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिनकी वैचारिक परंपरा का आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं था, वे आज हर राष्ट्रीय प्रतीक और हर सार्वजनिक संस्था पर अपनी विचारधारा की छाप छोड़ने की जल्दबाजी में हैं.”

उन्होंने कहा, “इतिहास गवाह है कि आरएसएस ने तिरंगे का जोरदार विरोध किया था और सरदार पटेल ने भी उन्हें चेतावनी दी थी.”

खड़गे ने यह भी कहा कि जर्सी का यह मामला सार्वजनिक संस्थानों और प्रतीकों में किए जा रहे बड़े बदलावों का हिस्सा है.

उन्होंने लिखा, “सड़कों के फुटपाथों से लेकर संसद के कर्मचारियों की यूनिफॉर्म तक, दूरदर्शन के लोगो से लेकर अब खिलाड़ियों की जर्सी तक. यह सब बिना व्यापक जन सहमति के किया जा रहा है.”

उन्होंने इस फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए कहा, “राष्ट्रीय प्रतीकों, खेल और खिलाड़ियों को संकीर्ण राजनीतिक प्रयोगों का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए.”

उन्होंने सरकार से कहा कि वह “इस फैसले पर तुरंत दोबारा विचार करे.” साथ ही उन्होंने सवाल पूछा कि जर्सी का रंग बदलने का फैसला लेने से पहले हॉकी इंडिया की कार्यकारी समिति से सलाह क्यों नहीं ली गई.

हॉकी इंडिया ने इस बदलाव के पीछे किसी भी राजनीतिक वजह से इनकार किया है. इस मुद्दे पर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार राष्ट्रीय खेल प्रतीकों की पहचान बदलने की कोशिश कर रही है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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