scorecardresearch
Saturday, 1 August, 2026
होमराजनीतिभदोही फिर बना संत रविदास नगर: चौथी बार नाम बदलने के पीछे की राजनीति और पूरी प्रक्रिया

भदोही फिर बना संत रविदास नगर: चौथी बार नाम बदलने के पीछे की राजनीति और पूरी प्रक्रिया

1994 में मुलायम सिंह सरकार द्वारा बनाए गए इस ज़िले का नाम BSP, BJP, SP और अब BJP सरकारों के दौरान भदोही और संत रविदास नगर के बीच बदलता रहा है.

Text Size:

लखनऊ: उत्तर प्रदेश का भदोही जिला एक बार फिर अपना नाम बदलने जा रहा है. 1994 में वाराणसी से अलग जिला बनने के बाद यह चौथी बार होगा जब जिले का नाम बदला जाएगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि भदोही का नाम फिर से संत रविदास नगर रखा जाएगा.

इस घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहस शुरू हो गई है. बसपा प्रमुख मायावती ने संत रविदास से जुड़े नाम को दोबारा बहाल करने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार का धन्यवाद दिया है. वहीं समाजवादी पार्टी ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह विकास के मुद्दों पर काम करने के बजाय सिर्फ नाम बदलने में लगी है.

यह फैसला 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले आया है. इसलिए इसे राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है. बीजेपी को उम्मीद है कि संत रविदास के नाम को दोबारा बहाल करके वह दलित वोटरों को अपनी ओर आकर्षित कर सकेगी.

15वीं सदी के संत और कवि संत रविदास का जन्म वाराणसी में हुआ था. इस इलाके से उनका जुड़ाव पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस नाम को सांस्कृतिक और राजनीतिक दोनों तरह से खास महत्व देता है.

भदोही से संत रविदास नगर और फिर वापस भदोही.

1994 में तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए वाराणसी जिले से अलग करके भदोही जिला बनाया था.

अलग जिला बनाने की मांग कई सालों से चल रही थी. पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित श्यामधर मिश्रा और जनसंघ नेता मुरलीधर पांडे उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने 1980 के दशक के आखिर और 1990 के दशक की शुरुआत में इसके लिए लंबा आंदोलन चलाया था.

जिला बनने के बाद लोगों ने इसका स्वागत किया. लेकिन कुछ ही सालों में जिले के नाम को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद शुरू हो गया.

4 दिसंबर 1997 को तत्कालीन मायावती सरकार ने भदोही नाम हटाकर जिले का नाम संत रविदास नगर कर दिया. उसी समय जौनपुर से भदोही में जोड़ी गई बरसाठी तहसील को वापस जौनपुर भेज दिया गया.

इसके बाद जिले में फिर आंदोलन शुरू हो गया. कई लोगों ने भदोही नाम वापस रखने की मांग की. स्थानीय लोगों का कहना था कि मध्यकाल में इस इलाके पर भर राजाओं का शासन था. माना जाता है कि उनके सम्मान में इस क्षेत्र का नाम पहले भरदोही पड़ा, जो बाद में बदलकर भदोही हो गया.

जब उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी तो तत्कालीन मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्ता ने 12 नवंबर 1999 को आदेश जारी कर आधिकारिक नाम में भदोही भी जोड़ दिया. इसके बाद जिले का नाम संत रविदास नगर-भदोही हो गया.

इसके बाद अखिलेश यादव सरकार में फिर नाम बदला गया. 6 दिसंबर 2014 को जिले का नाम आधिकारिक तौर पर फिर से भदोही कर दिया गया.

29 जुलाई 2026 को योगी आदित्यनाथ सरकार ने घोषणा की कि जिले का नाम फिर से संत रविदास नगर होगा. जिला बनने के बाद यह चौथी बार होगा जब इसका नाम बदला जाएगा.

योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में एक कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की. उन्होंने 2014 में भदोही नाम बहाल करने के समाजवादी पार्टी सरकार के फैसले की आलोचना भी की.

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी सरकार ने जिले से संत रविदास का नाम हटाकर पाप किया था. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जिले की पहचान फिर से संत रविदास नगर के रूप में बहाल करेगी.

बीजेपी का दलितों तक पहुंचने का प्रयास

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संत रविदास दलित समुदाय, खासकर जाटव और रविदास समाज में बहुत सम्मानित हैं. उनकी धार्मिक और सामाजिक विरासत ने उन्हें दलित राजनीति का एक बड़ा प्रतीक बना दिया है.

बीजेपी लगातार उत्तर प्रदेश में दलित वोटरों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, खासकर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले. ऐसे में जिले का नाम फिर से संत रविदास नगर करना पार्टी को यह संदेश देने का मौका देगा कि वह दलित समाज के सबसे प्रभावशाली संतों और सामाजिक नेताओं की विरासत का सम्मान करती है.

यह फैसला योगी आदित्यनाथ सरकार के उस बड़े अभियान का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें मुगल या ब्रिटिश दौर से जुड़े नामों को बदलकर धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले नाम बहाल किए जा रहे हैं.

2018 में राज्य सरकार ने फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या और इलाहाबाद जिले का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया था.

हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक यह नहीं बताया है कि जिलों और दूसरे प्रशासनिक क्षेत्रों के नाम बदलने, सरकारी रिकॉर्ड, साइनबोर्ड, स्टेशनरी और डिजिटल डेटाबेस में बदलाव पर कुल कितना खर्च हुआ है.

कैसे बदला जाता है जिले का नाम 

उत्तर प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने द प्रिंट को बताया कि इसकी शुरुआत जिला प्रशासन के प्रस्ताव से होती है. यह प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाता है.

सरकार से मंजूरी मिलने के बाद राजस्व विभाग इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी करता है. इसके बाद यह अधिसूचना सभी संबंधित विभागों को भेजी जाती है ताकि सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव किया जा सके.

यह बदलाव जिला स्तर के रिकॉर्ड से लेकर पंचायतों और नगर निकायों के दस्तावेजों तक हर जगह किया जाता है.

अधिकारी ने बताया कि जिले का नाम बदलने का मतलब यह नहीं है कि वहां मौजूद बाकी संस्थानों के नाम भी अपने आप बदल जाएंगे.

उदाहरण के लिए, जिले का नाम बदलने की अधिसूचना जारी होने से रेलवे स्टेशन, विश्वविद्यालय या किसी दूसरे स्वतंत्र संस्थान का नाम अपने आप नहीं बदलता. उनके लिए अलग प्रक्रिया होती है.

अधिकारी ने बताया कि प्रशासनिक क्षेत्रों में हुए बदलाव की जानकारी केंद्र सरकार को भी भेजी जाती है.

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 6(2) के तहत राज्य सरकार को अधिसूचना जारी करके किसी भी राजस्व क्षेत्र, जिसमें जिला भी शामिल है, का नाम रखने या बदलने का अधिकार है.

इसलिए जिले का नाम बदलने की प्रक्रिया मुख्य रूप से राज्य के राजस्व और प्रशासनिक नियमों के तहत होती है. हालांकि सरकारी रिकॉर्ड और केंद्र सरकार के अधीन आने वाले संस्थानों के नाम बदलने के लिए अलग प्रक्रिया अपनाई जाती है.

भदोही के जिलाधिकारी शैलेश कुमार ने कहा कि नए नाम को लागू करने से जुड़ा प्रशासनिक काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि इसमें ज्यादा परेशानी नहीं होगी क्योंकि पहले भी जिले का आधिकारिक नाम संत रविदास नगर रह चुका है. अब ज्यादातर सरकारी रिकॉर्ड डिजिटल हो चुके हैं. इसलिए दस्तावेजों और डेटाबेस में बदलाव करना 1990 के दशक और 2014 की तुलना में काफी आसान है.

मायावती ने फैसले का स्वागत किया

बसपा प्रमुख मायावती ने इस फैसले का स्वागत किया. लेकिन उन्होंने लोगों को यह भी याद दिलाया कि सबसे पहले उनकी सरकार ने ही जिले का नाम संत रविदास नगर रखा था.

एक्स पर किए गए पोस्ट में मायावती ने कहा कि बसपा सरकार ने नया जिला बनाकर उसका नाम संत रविदास नगर रखा था. उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में समाजवादी पार्टी सरकार ने अपनी “संकीर्ण जातिवादी सोच” की वजह से इसका नाम बदल दिया.

मायावती ने कहा कि वह मौजूदा राज्य सरकार की आभारी हैं जिसने फिर से जिले का नाम संत रविदास नगर कर दिया.

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने अपने चार कार्यकाल में कई नए जिले, तहसील, विकास खंड, पुलिस जोन और रेंज बनाए थे. इनमें से कई का नाम दलित और ओबीसी समाज के प्रमुख संतों, गुरुओं और समाज सुधारकों के नाम पर रखा गया था.

वहीं समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मनोज काका ने बीजेपी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह सरकार लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने से ज्यादा नाम बदलने में रुचि रखती है.

उन्होंने कहा, “बीजेपी सरकार का ध्यान सिर्फ नाम बदलने पर है, काम पर नहीं.” उन्होंने कहा कि सरकार को बार-बार नाम बदलने की बात करने के बजाय यह बताना चाहिए कि उसने भदोही के विकास के लिए क्या किया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: भारत की Gen Z ने एक दरार बना दी है, यह BJP पर है कि उसे भरे या विपक्ष उसे और चौड़ा करे


 

share & View comments