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Thursday, 23 July, 2026
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CJP प्रदर्शन के बहाने उद्धव ठाकरे की शिवसेना की नई रणनीति, युवाओं के बीच फिर से पकड़ बनाने की कोशिश

मुंबई के शिवाजी पार्क में बड़ी रैली, सीजेपी को समर्थन और आदित्य ठाकरे की युवाओं से अपील—शिवसेना (यूबीटी) अब जनता और युवाओं के मुद्दों पर फोकस कर रही है.

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मुंबई: ऐसा लगता है कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए एक नया दौर शुरू हो गया है. अपनी खोई हुई राजनीतिक ज़मीन वापस पाने की कोशिश में पार्टी अब युवाओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देकर नया वोट बैंक बनाने की कोशिश कर रही है.

धर्म आधारित राजनीति के लिए पहचानी जाने वाली इस पार्टी के छह सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में चले गए थे. अब शिवसेना (यूबीटी) दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन का समर्थन कर रही है और मुंबई में भी इसी तरह के प्रदर्शन आयोजित कर रही है. यह बदलाव पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में भी साफ दिखाई दे रहा है. पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे दिल्ली में जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं से मिल रहे हैं. वहीं उनके बेटे और विधायक आदित्य ठाकरे मुंबई में युवाओं को जोड़ने और प्रदर्शन आयोजित करने में जुटे हैं.

उद्धव ठाकरे उन पहले नेताओं में शामिल थे जिन्होंने सीजेपी के अभिजीत दीपके और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का समर्थन किया. सोमवार देर रात वह जंतर-मंतर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर अपना समर्थन जताया.

मंगलवार को उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह पहले दिन से ही सीजेपी और युवाओं के साथ हैं. उन्होंने यह भी बताया कि सोनम वांगचुक पहले उनके मुंबई स्थित घर ‘मातोश्री’ भी आ चुके हैं. उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उसके शासन को ‘रावण राज’ बताया.

उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में मीडिया से कहा, “सरकार जो कर रही है, वह लोकतांत्रिक नहीं है. अब लोग कहने लगे हैं कि अंग्रेज इनसे बेहतर थे. युवा हमारा भविष्य हैं और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए.”

उन्होंने आगे कहा, “सरकार और रावण में कोई फर्क नहीं दिखता, क्योंकि सरकार महिलाओं और छोटी बच्चियों के साथ गलत व्यवहार कर रही है. अब देश जाग रहा है और सरकार को लोगों की बात सुननी ही होगी.”

बुधवार को उनके बेटे आदित्य ठाकरे ने युवाओं से शुक्रवार को मुंबई के शिवाजी पार्क पहुंचने की अपील की. उन्होंने कहा कि सभी लोग तिरंगे के नीचे एक साथ राष्ट्रगान गाने के लिए इकट्ठा हों.

आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन दिल्ली में हुई कथित बर्बर कार्रवाई, देशभर में छात्रों की हिरासत और यह दिखाने के लिए है कि महाराष्ट्र उन बहादुर युवाओं के साथ खड़ा है, जो देश के लिए लड़ रहे हैं. अगर आप सोनम वांगचुक, अभिजीत दीपके और जंतर-मंतर पर मौजूद लोगों के साथ हैं तो आइए. अगर आप राहुल गांधी और दूसरे सांसदों को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने का विरोध करते हैं, तब भी आइए. अगर उनके साथ ऐसा हो सकता है, तो जल्द आपके साथ भी हो सकता है.”

पार्टी का सोशल मीडिया पेज भी लगातार अंग्रेजी में पोस्ट कर रहा है और ‘वन नेशन, वन इमोशन’ नाम से एक अभियान शुरू किया गया है.

इससे पहले रविवार को मुंबई के शिवाजी पार्क में युवाओं के समर्थन में शिवसेना (यूबीटी) का बड़ा प्रदर्शन हुआ था. इसका आयोजन आदित्य ठाकरे ने किया था. इस दौरान उन्होंने कहा, “यह सिर्फ शुरुआत है. बदलाव और अच्छे दिन आने तक हम यह लड़ाई जारी रखेंगे. हम अपने देश को तानाशाही के हवाले नहीं होने देंगे.”

प्रदर्शन के बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया. कई लोगों के खिलाफ नोटिस और एफआईआर दर्ज की गई. इसके बाद आदित्य ठाकरे और उनकी टीम प्रभावित लोगों की मदद के लिए पुलिस थानों तक पहुंची. उन्होंने प्रदर्शनकारियों की कानूनी मदद के लिए एक ईमेल आईडी भी जारी की, ताकि जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर या नोटिस है, वे संपर्क कर सकें. उन्होंने वकीलों से भी बिना फीस लिए ऐसे मामलों में छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद करने की अपील की.

राजनीतिक विश्लेषक हेमंत देसाई का कहना है कि पार्टी में एक और टूट के बाद शिवसेना (यूबीटी) के पास अपनी रणनीति बदलने और खुद को नए तरीके से खड़ा करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है.

उन्होंने कहा, “मेरी नजर में अभी कोई चुनाव सामने नहीं है. उद्धव ठाकरे समझ चुके हैं कि उन्हें पार्टी को नए तरीके से बनाना होगा. इसमें युवा सबसे बड़ा फैक्टर हैं. सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ माहौल है और उन्होंने समझ लिया है कि रोजगार, तकनीक और छात्रों की शिक्षा जैसे मुद्दे युवाओं को अपनी ओर खींच सकते हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “लगता है कि अब उनकी रणनीति बदल गई है. वे अब अर्थव्यवस्था और युवाओं जैसे आम लोगों के मुद्दे उठा रहे हैं. अगर वे इसी रास्ते पर चलते रहे, तो उन्हें लोगों का समर्थन मिल सकता है.”

बदलती रणनीति

बुधवार को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए आदित्य ठाकरे ने दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की और हिरासत में लिए गए युवाओं को तुरंत रिहा करने की मांग की.

उन्होंने कहा, “हमारी मांग साफ है. जिन बच्चों और युवाओं को हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत छोड़ा जाए. पहली बार ऐसा हो रहा है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण है, लेकिन सरकार हिंसक हो रही है.”

रविवार को शिवसेना (यूबीटी) की ओर से किए गए प्रदर्शन में सैकड़ों लोग मुंबई के शिवाजी पार्क की सड़कों पर उतरे. उनके हाथों में तख्तियां थीं और वे सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे. उद्धव ठाकरे ने युवाओं से इस आंदोलन को आगे बढ़ाने की अपील की.

उन्होंने कहा, “मैं तुम्हारे अंदर का जोश देख सकता हूं. इसे तब तक ज़िंदा रखो, जब तक यह सरकार सत्ता से बाहर नहीं हो जाती. यहां मौजूद युवाओं का गुस्सा एक चिंगारी है, जो पूरे देश में फैलेगी और भाजपा की अगुआई वाली सरकार के खिलाफ आग बन जाएगी.”

रविवार के कार्यक्रम से पहले शिवसेना (यूबीटी) ने मुंबई और नागपुर में राम रक्षा पाठ का आयोजन किया था. इसका मकसद अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा उठाना था.

इसके साथ ही पार्टी ने सीजेपी के समर्थन में प्रदर्शन शुरू किए और पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की सरकार की नीति जैसे मुद्दे भी उठाए.

आदित्य ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी भी लिखी थी. उसमें उन्होंने केंद्र सरकार से E20 ईंधन को अनिवार्य बनाने के फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की. उन्होंने कहा कि लोगों को साधारण पेट्रोल और एथेनॉल मिले पेट्रोल में से अपनी पसंद चुनने का अधिकार मिलना चाहिए और E20 को सभी के लिए जरूरी नहीं बनाया जाना चाहिए.

आदित्य ठाकरे मुंबई के फुटबॉल मैदानों के समर्थन में भी लगातार आवाज उठा रहे हैं. राज्य सरकार इन मैदानों की जगह कन्वेंशन सेंटर बनाने की योजना पर काम कर रही है. आदित्य ठाकरे फुटबॉल खिलाड़ियों से इन मैदानों को बचाने के लिए एकजुट होने की अपील कर रहे हैं.

ऐसा लगता है कि अब एक नई राजनीतिक शुरुआत हो चुकी है और शिवसेना (यूबीटी) पूरे जोश के साथ इस नई रणनीति पर आगे बढ़ रही है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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