नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर उनसे विपक्ष से बात करने और NEET पेपर लीक के विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा के लिए समय तय करने का आग्रह किया. यह बात उन्होंने विपक्ष के इस आरोप को खारिज करने के तुरंत बाद कही कि वह संसद से बच रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं.
यह ऐसे समय में हुआ है जब विपक्ष और मोदी सरकार के बीच तीखी खींचतान चल रही है. विपक्ष ने शाह को निशाना बनाते हुए साफ संकेत दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है और गृह मंत्री का “लेक्चर” सुनने में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं है. वहीं, बीजेपी ने कहा है कि अब विपक्ष ही चर्चा से भाग रहा है, जबकि शाह पहले ही इस मुद्दे पर चर्चा की पेशकश कर चुके हैं. इस गतिरोध के कारण संसद में बार-बार हंगामा और कार्यवाही में रुकावट हुई है.
बिरला को लिखे अपने पत्र में शाह ने कहा कि सरकार पेपर लीक के विरोध प्रदर्शनों पर विस्तार से चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष की ओर से उठाए गए सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है.
उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र में चर्चा और बातचीत के जरिए समाधान निकलते हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें “लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं में अटूट विश्वास” है और “यह सदन चर्चा और संवाद के लिए है”.
“आप जानते हैं कि माननीय संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में सरकार की ओर से संसद में NEET परीक्षा को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर चर्चा के लिए सहमति दी है. मैं यह भी बताना चाहता हूं कि विपक्ष के अनुरोध पर सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर संसद के मौजूदा सत्र में पहले ही चर्चा हो चुकी है, जिसमें किसी भी माननीय विपक्षी सांसद ने NEET परीक्षा को लेकर कोई विचार नहीं रखा. इसके बावजूद सरकार इस मुद्दे पर फिर से चर्चा के लिए तैयार है,” शाह ने स्पीकर को लिखे पत्र में कहा.
उन्होंने कहा, “मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप इस मुद्दे पर विपक्ष से चर्चा करें और आपसी सहमति से आज से जितना समय उचित समझें, उतना समय चर्चा के लिए तय करें. मैं तय समय के दौरान सदन में मौजूद रहना चाहता हूं, इस मुद्दे पर चर्चा में हिस्सा लेना चाहता हूं और विपक्ष के सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं.”
उन्होंने आगे लिखा, “इसलिए आपसे अनुरोध है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर विपक्षी नेताओं से चर्चा करें और ऐसा माहौल बनाएं जिसमें चर्चा हो सके, ताकि सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी माननीय सदस्य इस मुद्दे पर अपने महत्वपूर्ण विचार और राय रख सकें.”
अमित शाह का ‘लेक्चर’ सुनने में दिलचस्पी नहीं: विपक्ष
दिन की शुरुआत में विपक्ष ने कहा कि उसे अमित शाह की “कल्पना” या “लेक्चर” सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है और उसने उनके इस्तीफे की मांग की.
“क्या अमित शाह ने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया था? अगर उन्होंने दिया था, तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वह दोषी हैं. और अगर उन्होंने आदेश नहीं दिया, तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वह अक्षम हैं. पिछले 20 दिनों से अमित शाह गायब हैं. भारत के गृह मंत्री में हिम्मत नहीं है, वह सदन में नहीं आ सकते,” कांग्रेस सांसद ने कहा.
इस बीच शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा में दिलचस्पी नहीं रखता. विपक्ष के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए शाह ने संसद परिसर के बाहर मीडिया से कहा, “सबसे पहले, ‘लापता’, ‘भाग गए’ जैसे शब्द भारत के सार्वजनिक और संसदीय जीवन में तेजी से सुनने को मिल रहे हैं. सत्र शुरू होने के बाद से मैं नियमित रूप से संसद आ रहा हूं. मैं अपने चैंबर में बैठता हूं, लेकिन विपक्ष दोनों सदनों में संसद को चलने नहीं दे रहा है, तो कोई क्या कर सकता है?”
विपक्ष की मांग है कि शाह सदन में यह बयान दें कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हिंसक कार्रवाई की अनुमति किसने दी.
शाह ने आगे कहा कि जहां तक चर्चा की बात है, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने यह “बहुत साफ” कर दिया है कि सरकार NEET विरोध प्रदर्शनों पर पूरी चर्चा के लिए तैयार है.
शाह ने कहा, “हमने समय तय करने और विपक्ष के तैयार रहने के लिए कहा था. यह उनकी शुरुआती मांग थी और हमने इसे मान लिया था. मैंने भी कहा है कि मैं संसद में किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूं, फिर भी वे चर्चा नहीं चाहते. अब जनता तय करे कि कौन भाग रहा है. वे आज दोपहर 3 बजे तक स्पीकर को पत्र दे दें. हम आज दोपहर 3 बजे से कल दोपहर 3 बजे तक सभी पहलुओं पर चर्चा के लिए तैयार हैं. मैं सदन में बैठूंगा, सबकी बात सुनूंगा और हर मुद्दे का जवाब दूंगा.”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है. “मैं इस बात पर भी चर्चा करूंगा कि वे चर्चा क्यों नहीं चाहते थे. मोदी जी के नेतृत्व वाली NDA सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, उन्हें बस संसद को चलने देना चाहिए.”
मीडिया से पहले बात करते हुए राहुल ने कहा, “खड़गे जी और मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की हैं और बाकी विपक्षी दलों ने भी साफ कर दिया है कि हमें अमित शाह की कल्पना सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है. हमें उनका लेक्चर या चर्चा सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है. हम सिर्फ एक आसान सी बात जानना चाहते हैं.”
उन्होंने कहा, “और जब मैं ‘हम’ कहता हूं, तो मेरा मतलब इस देश की युवा पीढ़ी से है: उन छात्रों पर दिल्ली में किसने गोली चलाई? उन छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया? एक छात्र की आंखों की रोशनी किसने छीनी? छात्रों को कील लगी लाठियों से पीटने का आदेश किसने दिया? वह आदेश किसने दिया? वह आदेश गृह मंत्रालय ने लागू कराया.”
राहुल ने कहा कि दिल्ली पुलिस और RAF गृह मंत्रालय के अधीन हैं. “पिछले 20 दिनों से अमित शाह गायब हैं. भारत के गृह मंत्री में हिम्मत नहीं है, वह सदन में नहीं आ सकते.”
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