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Thursday, 8 October, 2026
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अखिलेश के राज्यसभा उम्मीदवार नाथवानी ने की मोदी की तारीफ, विरोधियों ने ‘मैच फिक्सिंग’ का आरोप लगाया

गुजरात का नाथवानी परिवार पीएम मोदी और एचएम शाह के करीब माना जाता है. धनराज के पिता परिमल नाथवानी ने बीजेपी के समर्थन से झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर तीन बार राज्यसभा चुनाव जीता है.

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सीट के लिए अखिलेश यादव की ओर से उम्मीदवार चुने जाने को लेकर समाजवादी पार्टी के अंदर उठ रही नाराज़गी के बीच, उनके उम्मीदवार धनराज नाथवानी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर की गई तारीफ ने पार्टी की चिंता और बढ़ा दी है. साथ ही, इसने विरोधियों को गुजरात और सैफई के बीच “मैच फिक्सिंग” का आरोप लगाने का मौका भी दे दिया है.

गुजरात का नाथवानी परिवार पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीब माना जाता है. धनराज नाथवानी के पिता परिमल नाथवानी ने बीजेपी के समर्थन से झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर तीन बार राज्यसभा चुनाव जीता है.

वह मोदी और शाह के गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के अध्यक्ष रहने के दौरान GCA के उपाध्यक्ष थे. धनराज ने 2022 में शाह के बाद GCA के अध्यक्ष का पद संभाला. पिता-पुत्र दोनों रिलायंस ग्रुप से जुड़े रहे हैं.

सपा ने 30 सितंबर को धनराज नाथवानी की उम्मीदवारी का ऐलान किया था. उन्होंने उसी दिन अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था. सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी वहां मौजूद लोगों में शामिल थे. धनराज के नामांकन पत्र 7 अक्टूबर को सही पाए गए और अब उनका निर्विरोध चुना जाना तय है.

बुधवार शाम धनराज नाथवानी ने एक्स पर एक लंबा संदेश पोस्ट कर सार्वजनिक जीवन में मोदी के 25 साल पूरे होने पर उन्हें बधाई दी. उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री के तौर पर नेतृत्व करने तक के राजनीतिक सफर को दिखाया गया था.

नाथवानी ने लिखा, “नेतृत्व के 25 साल. समर्पण के 25 साल. ‘सेवा करने के संकल्प’ के 25 साल. 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद से नरेंद्र मोदी ने एक शानदार सफर तय किया है. गुजरात की सेवा करने से लेकर प्रधानमंत्री के तौर पर भारत का नेतृत्व करने तक.”

उन्होंने आगे कहा, “समय बदलने और नई चुनौतियों के आने के बावजूद, उनका मजबूत विश्वास, दृढ़ संकल्प और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता लगातार बनी रही है. सार्वजनिक सेवा के 25 साल पूरे होने पर हम ऐसे सफर का जश्न मना रहे हैं, जो एक भावना से चलता रहा है. यह भावना है सेवा करने का संकल्प, राष्ट्रीय कर्तव्य और एक उभरते भारत के लिए मजबूत प्रतिबद्धता.” उन्होंने मोदी को देश की सेवा में आगे भी ताकत और सफलता मिलने की शुभकामनाएं दीं.

मोदी 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे और 2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले 12 साल से ज्यादा समय तक इस पद पर रहे.

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया है कि ऐसे समय में जब सपा बीजेपी की एक प्रमुख विरोधी पार्टी है, तब सपा के राज्यसभा उम्मीदवार ने सार्वजनिक तौर पर प्रधानमंत्री की तारीफ क्यों की.

सपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न बताने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया कि एक्स पर किए गए इस पोस्ट ने पार्टी नेताओं को असहज स्थिति में डाल दिया है.

नेता ने कहा, “एक तरफ हम बीजेपी और मोदी का विरोध करते हैं, वहीं दूसरी तरफ हमारे अपने राज्यसभा उम्मीदवार मोदी की तारीफ कर रहे हैं. हमें समझ नहीं आ रहा कि हमें इसका बचाव कैसे करना है. हमारे मुख्य समर्थक इस चुनाव से निराश हैं. नथवानी परिवार मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीब है.”

AIMIM ने सवाल उठाए

इस घटनाक्रम ने AIMIM को भी अखिलेश यादव के नाथवानी को उम्मीदवार बनाने के फैसले पर सवाल उठाने का मौका दे दिया है.

AIMIM के प्रवक्ता शादाब चौहान ने एक्स पर पूछा, “ये रिश्ता क्या कहलाता है? अखिलेश जी के पसंदीदा राज्यसभा उम्मीदवार मोदी जी की तारीफ कर रहे हैं.”

उन्होंने आरोप लगाया कि नाथवानी की पोस्ट ने उनकी पार्टी के पहले के उस दावे को सही साबित कर दिया है, जिसमें गुजरात और यादव परिवार के गढ़ सैफई के बीच ‘मैच फिक्सिंग’ की बात कही गई थी. उन्होंने सपा नेताओं, जिसमें उसके मुस्लिम सांसद और विधायक भी शामिल हैं, से पूछा कि क्या वे मोदी की नथवानी द्वारा की गई तारीफ से सहमत हैं.

चौहान ने सपा पर और आरोप लगाते हुए कहा, “क्या आप भी मोदी जी की तारीफ करते हैं, जिन्होंने मुसलमानों के खिलाफ कानून बनाए हैं? या यह सब आपकी ही इच्छा पर किया गया? क्या अखिलेश जी बाहर से एक पार्टी के साथ गठबंधन करते हैं, जबकि अंदर से गुजरात और सैफई के बीच गठबंधन है?”

इस बीच, बीजेपी ने नाथवानी की पोस्ट को मोदी के लिए राजनीतिक फायदे में बदलने की कोशिश की. उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि नाथवानी राजनीति में नए हैं और उन्होंने “दिमाग से नहीं, दिल से” बात की है.

त्रिपाठी ने कहा, “अखिलेश यादव भी दिल से मोदी जी की तारीफ करते हैं, लेकिन उनके दिमाग में राजनीतिक मजबूरियां हैं. मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 सालों ने गरीबों की ज़िंदगी में बड़े बदलाव किए हैं. कई देशों के नेताओं ने भी प्रधानमंत्री की तारीफ की है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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