चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 12 सितंबर को डेरा सच्चा सौदा और उसके विवादित प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह से जुड़ा फ्रंट पेज विज्ञापन प्रकाशित करने को लेकर द हिंदू और दैनिक भास्कर के प्रधान संपादकों और प्रकाशकों के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना की कार्यवाही शुरू की है.
‘What is Dera Sacha Sauda? (Facts vs Fiction)’ शीर्षक वाले इस विज्ञापन में “क्या गुरु जी के खिलाफ साजिश हुई थी?” शीर्षक से एक हिस्सा था. इसका जवाब था: “हां, बिल्कुल.” इसमें आरोप लगाया गया था कि “ड्रग माफिया और डेरा के विरोधी ताकतों” ने झूठे गवाहों और मामलों के जरिए राम रहीम को फंसाने की कोशिश की थी. इसमें यह भी दावा किया गया था कि ये ताकतें “आज भी इस झूठ को सच साबित करने की कोशिश में लगी हुई हैं.”
यह विज्ञापन उस समय प्रकाशित हुआ था जब राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल से 21 दिन की फरलो पर बाहर था. इस साल यह उसकी तीसरी रिहाई थी और 2017 में अपने दो शिष्यों से बलात्कार के दोषी ठहराए जाने के बाद नौ साल में यह उसकी 17वीं रिहाई थी. वह 20 साल की सजा काट रहा है.
विज्ञापन में राम रहीम को बार-बार अस्थायी रूप से रिहा किए जाने को लेकर जनता की आलोचना का जवाब देने की भी कोशिश की गई थी. “क्या राम रहीम को दी गई पैरोल और फरलो VIP ट्रीटमेंट है?” शीर्षक वाले एक हिस्से में जवाब दिया गया था: “नहीं, बिल्कुल नहीं.” इसमें दावा किया गया था कि उसे दी गई पैरोल और फरलो 1894 के Prisoners Act और हरियाणा सरकार के नियमों के अनुसार ही दी गई हैं.
विज्ञापन प्रकाशित होने के करीब एक महीने बाद, न्यायमूर्ति विनोद एस. भारद्वाज और न्यायमूर्ति रविंदर मलिक की खंडपीठ ने बुधवार को डेरा सच्चा सौदा के प्रबंधन के जरिए उसे, साथ ही दोनों अखबारों के प्रकाशकों और प्रधान संपादकों को नोटिस जारी किया. पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर तक टाल दी.
रजिस्ट्री को विज्ञापनों की प्रतियों के साथ नोटिस भेजने का निर्देश दिया गया. चंडीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से कहा गया कि वे उन लोगों की जानकारी हासिल करने में रजिस्ट्री की मदद करें, जिनके खिलाफ यह कार्यवाही शुरू की गई है.
यह कार्यवाही न्यायमूर्ति सुभाष मेहला ने 16 सितंबर को शुरू की थी, यानी विज्ञापन प्रकाशित होने के चार दिन बाद. विज्ञापन की सामग्री पर ध्यान देते हुए उन्होंने अवमानना की कार्यवाही शुरू की और नोटिस का जवाब 7 अक्टूबर तक देने को कहा था. इसके बाद रोस्टर के मुताबिक मामला खंडपीठ के सामने रखा गया.
न्यायमूर्ति मेहला ने कहा कि जब किसी दोषी या आरोपी के खिलाफ मुकदमा या अपील लंबित हो, तब अदालतों को उसके खिलाफ साजिश का हिस्सा बताने वाले सार्वजनिक अपील और पैसे देकर प्रकाशित किए गए नैरेटिव लोगों की राय को अपने पक्ष में करने और न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित करने की कोशिश हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह का आचरण सीधे तौर पर न्याय देने की प्रक्रिया में बाधा डालता है.
गौरतलब है कि राम रहीम के खिलाफ कई आपराधिक मामले अभी भी अदालतों में लंबित हैं. इनमें 2002 में पत्रकार राम चंदर छत्रपति की हत्या के मामले में उसकी बरी किए जाने के खिलाफ अपील और डेरा के करीब 400 अनुयायियों की कथित जबरन नसबंदी से जुड़ा मामला शामिल है.
अदालत ने पहली नजर में माना कि विज्ञापन की सामग्री में “अदालत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने या उसकी अथॉरिटी को कम करने” या न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित करने की प्रवृत्ति हो सकती है. अदालत ने कहा कि इसलिए इन आरोपों की जांच Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 2(c) के तहत जरूरी है. इस धारा में ‘आपराधिक अवमानना’ की परिभाषा दी गई है. इसमें ऐसा आचरण भी शामिल है जो अदालत की प्रतिष्ठा या अधिकार को नुकसान पहुंचाता है या न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करता है.
अदालत ने यह भी कहा कि वह एक रिकॉर्ड कोर्ट है और संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत उसके पास अपनी अवमानना के लिए सजा देने की संवैधानिक शक्ति है. अदालत ने कहा कि Contempt of Courts Act की धारा 15(1), जो आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से जुड़ी है, हाई कोर्ट को ऐसी अवमानना का अपने आप संज्ञान लेने की अनुमति देती है.
इसके अनुसार अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत, Contempt of Courts Act की धाराओं 2(c)(i), 2(c)(iii) और 15(1) के साथ पढ़ते हुए, स्वत: संज्ञान लिया.
Apology — This is a screenshot of the front page of today’s Delhi edition of The Hindu. The apology that appears on this page has been published on the front page of all the editions of The Hindu. pic.twitter.com/manZfhQkER
— N. Ram (@nramind) September 13, 2026
द हिंदू की माफी
द हिंदू ने अदालत की ओर से कार्यवाही शुरू किए जाने से पहले ही माफी मांग ली थी. 13 सितंबर को, यानी विज्ञापन वाले अखबार पाठकों तक पहुंचने के एक दिन बाद, अखबार ने अपने फ्रंट पेज पर माफी प्रकाशित की थी. इसमें कहा गया था: “द हिंदू इस बेहद आपत्तिजनक विज्ञापन को प्रकाशित करने के लिए अपने पाठकों से बिना शर्त माफी मांगता है.”
द हिंदू पब्लिशिंग ग्रुप के निदेशक और पूर्व प्रधान संपादक एन. राम ने एक्स पर माफी की एक कॉपी पोस्ट की थी और कहा था कि यह सभी संस्करणों के फ्रंट पेज पर प्रकाशित हुई थी. बाद में अखबार ने कहा कि वह डेरा सच्चा सौदा से इस विज्ञापन के पैसे नहीं लेगा. अखबार ने इस फैसले को अपनी माफी की “भावना के अनुरूप” बताया.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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