लखनऊ: राज्यसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (SP) ने चौंकाने वाला फैसला लिया है. पार्टी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) समूह के अध्यक्ष धनराज नाथवानी को उत्तर प्रदेश से उच्च सदन के लिए अपने उम्मीदवारों में से एक बनाया है.
पार्टी ने बुधवार को उनकी उम्मीदवारी का ऐलान किया और नाथवानी ने उसी दिन बाद में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी इस दौरान मौजूद थे.
गुजरात के रहने वाले नाथवानी को उम्मीदवार बनाने का फैसला चौंकाने वाला था, क्योंकि माना जा रहा था कि पार्टी उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीट के लिए अपने ही किसी नेता को उम्मीदवार बनाएगी.
समाजवादी पार्टी ने वरिष्ठ नेता और यादव परिवार के सदस्य राम गोपाल यादव को भी राज्यसभा के एक और कार्यकाल के लिए उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है. पार्टी के संस्थापक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई राम गोपाल यादव को पार्टी की रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाने वाला नेता और उच्च सदन में पार्टी की आवाज माना जाता है.
कौन हैं धनराज नाथवानी
RIL में ग्रुप प्रेसिडेंट होने के अलावा 40 साल के धनराज नाथवानी गुजरात में खेल प्रशासन से भी जुड़े रहे हैं. वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के अध्यक्ष हैं. उन्होंने 2022 में अमित शाह की जगह यह पद संभाला था. इससे पहले वह GCA के उपाध्यक्ष रह चुके हैं.
नाथवानी झारखंड से राज्यसभा सांसद परिमल नाथवानी के बेटे हैं. परिमल नाथवानी भी RIL से जुड़े हुए हैं.
परिमल नाथवानी पहली बार 2008 में बीजेपी के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर झारखंड से राज्यसभा के लिए चुने गए थे. 2014 में वह दूसरी बार चुने गए. इसके बाद 2020 में YSRCP कोटे से फिर राज्यसभा पहुंचे.
2024 में वह चौथी बार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचे. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हराया था. प्रणव झा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी माने जाते हैं. चुनाव से जुड़े लोगों के मुताबिक, कांग्रेस-जेएमएम गठबंधन के लिए संख्या अनुकूल मानी जा रही थी, लेकिन नाथवानी ने जरूरी वोट हासिल कर लिए. उन्हें बीजेपी विधायकों के अलावा आरजेडी और निर्दलीय विधायकों समेत दूसरे विधायकों का भी समर्थन मिला था.
समाजवादी पार्टी के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि धनराज नाथवानी कुछ महीने पहले दिल्ली में अखिलेश यादव से मिले थे. इसके बाद से वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में बने हुए हैं.
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, नाथवानी के पार्टी में आने से समाजवादी पार्टी को आगामी चुनाव में राज्यसभा की तीसरी सीट हासिल करने में भी मदद मिल सकती है. तीसरी सीट जीतने के लिए पार्टी को अपनी मौजूदा संख्या के अलावा 10 और विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी.
समीकरण
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव की नामांकन प्रक्रिया मंगलवार को शुरू हुई. सपा ने बुधवार को अपने दो उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया.
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी की ओर से 8 नामांकन फॉर्म और सपा की ओर से 4 नामांकन फॉर्म लिए गए हैं. हालांकि, सपा के तीन उम्मीदवार उतारने की संभावना है. पार्टी आने वाले दिनों में अपने तीसरे उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर सकती है.
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए उम्मीदवार को 37 वोटों की जरूरत होती है. उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों में से 6 सीटें फिलहाल खाली हैं. ऐसे में मौजूदा विधायकों की संख्या 397 है.
एनडीए के पास 289 विधायक हैं. इनमें बीजेपी के 256, अपना दल (S) के 13, आरएलडी के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं.
विपक्ष की तरफ समाजवादी पार्टी के 101 विधायक और कांग्रेस के 2 विधायक हैं. रघुराज प्रताप सिंह की जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के 2 विधायक हैं, जबकि 3 विधायक अन्य दलों से हैं.
101 विधायकों के साथ समाजवादी पार्टी के पास दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए जरूरी 74 वोटों से 27 वोट ज्यादा हैं. इसलिए सपा के समर्थन वाले तीसरे उम्मीदवार को राज्यसभा भेजने के लिए पार्टी को 10 और वोटों की जरूरत होगी.
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