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Saturday, 30 May, 2026
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पंजाब नगर चुनाव में AAP की बड़ी जीत, कांग्रेस-BJP-अकाली दल 2027 से पहले फीके पड़े

AAP ने ज़्यादातर नगर परिषदों और नगर पंचायतों में भी बहुमत हासिल किया है—जो मध्यम और छोटे शहरों के स्थानीय शहरी निकाय हैं—और 2022 के विधानसभा चुनावों के बाद से ये ही उसकी राजनीतिक रीढ़ रहे हैं.

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चंडीगढ़: पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने नगर निकाय चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है. शुक्रवार को घोषित नतीजों के मुताबिक, पार्टी के उम्मीदवारों ने कुल 1,977 वार्डों में से 958 वार्ड जीते. 26 मई को 1,897 वार्डों के लिए मतदान हुआ था, जबकि 80 वार्डों में उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके थे.

कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (SAD) दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे. कांग्रेस ने 397 और अकाली दल ने 192 वार्ड जीते.

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 172 वार्ड जीते, जो 251 वार्ड जीतने वाले निर्दलीय उम्मीदवारों से भी कम हैं. बहुजन समाज पार्टी (BSP) सिर्फ 7 वार्ड जीत सकी.

8 नगर निगमों, 75 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों के प्रतिनिधियों को चुनने के लिए 22.38 लाख से अधिक मतदाताओं ने मतदान किया, जो कुल मतदाताओं का लगभग 64 प्रतिशत है. इन चुनावों में कुल 7,555 उम्मीदवार मैदान में थे. 2027 की शुरुआत में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले इन्हें एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा था.

विपक्षी दलों ने AAP पर चुनाव जीतने के लिए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया. वहीं, सत्तारूढ़ पार्टी का कहना है कि शुक्रवार के नतीजे जनता का मूड दिखाते हैं और चार साल सरकार में रहने के बाद भी वह पंजाब की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत बनी हुई है.

कपूरथला में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला, जबकि अबोहर में BJP को बहुमत मिला, जहां AAP दूसरे स्थान पर रही. BJP के पारंपरिक गढ़ पठानकोट में पार्टी ने सबसे ज्यादा वार्ड जीते, लेकिन बहुमत के लिए पर्याप्त संख्या नहीं जुटा सकी. यहां कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही. अकाली दल किसी भी नगर निकाय में बहुमत हासिल नहीं कर सका.

AAP ने कई नगर परिषदों और नगर पंचायतों में भी बहुमत हासिल किया. इस तरह उसने मध्यम और छोटे शहरों वाले उस शहरी वर्ग पर अपनी पकड़ बनाए रखी, जो 2022 विधानसभा चुनावों के बाद से उसका राजनीतिक आधार बन गया है.

नतीजे बताते हैं कि कम आय और मध्यवर्गीय शहरी मतदाताओं के बीच AAP की लोकप्रियता काफी हद तक बरकरार है.

नतीजों के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि पंजाब की जनता ने एक बार फिर अपनी ही सरकार को चुना है.

उन्होंने कहा, “विधानसभा, लोकसभा, पंचायत चुनाव और अब नगर निकाय चुनाव. आम आदमी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की है. अगर कांग्रेस, अकाली दल और BJP समेत सभी विपक्षी दलों के वोट जोड़ दिए जाएं, तब भी वे AAP को मिले वोटों के बराबर नहीं होंगे.”

उन्होंने कहा, “यह जीत सरकार की नीतियों की जीत है, जिसमें मुफ्त बिजली, आम आदमी क्लीनिक, अच्छे स्कूल और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता शामिल है. मैं विजेता उम्मीदवारों और पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई देता हूं. पंजाब के किसी भी हिस्से के साथ भेदभाव नहीं होगा. पंजाब का हर शहर, कस्बा और गांव समान रूप से विकास करेगा.” मान ने यह बात X पर लिखी.

अगर शुक्रवार के नतीजों को आधार माना जाए, तो AAP ने राज्य के कुछ हिस्सों में दिख रही सत्ता विरोधी लहर को काफी हद तक पीछे छोड़ दिया है. इसके अलावा, कई ऐसे इलाकों में भी पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया, जिन्हें पहले कांग्रेस या अकाली दल का गढ़ माना जाता था. वहां या तो उसने आसानी से जीत हासिल की या सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी.

जिन पांच नगर निगमों में AAP जीती, उनमें सबसे कठिन जीत एसएएस नगर (मोहाली) में रही. यहां 50 में से 27 वार्ड AAP ने जीते. कांग्रेस को 12, अकाली दल को 4, BJP को 3 और निर्दलीयों को 4 वार्ड मिले.

AAP की सबसे उल्लेखनीय जीतें श्री मुक्तसर साहिब, धूरी, मलेरकोटला, गिद्दड़बाहा, सुनाम, कोटकपूरा, गोबिंदगढ़, खन्ना, जंडियाला गुरु, रामां, जैतो, दसूया और कोट इसे खान की परिषदों में रही, जहां उसने लगभग पूरी तरह जीत दर्ज की. पार्टी एसएएस नगर, संगरूर, रूपनगर, पटियाला, मुक्तसर और फतेहगढ़ साहिब जिलों में प्रमुख राजनीतिक ताकत बनकर उभरी.

AAP के पक्ष में क्या काम आया

AAP के पक्ष में कई कारक काम करते दिखे. पहला, सरकार का लगातार चलाया जा रहा नशा विरोधी अभियान.

पंजाब में नशे की समस्या राज्य के सबसे संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों में से एक है. सरकार ने नशे के खिलाफ अभियान को अपनी राजनीति का प्रमुख विषय बनाया है. आलोचक मानें या नहीं कि समस्या हल हुई है, लेकिन राजनीतिक रूप से AAP लोगों के एक बड़े वर्ग को यह भरोसा दिलाने में सफल रही कि वह कम से कम उस समस्या से निपटने की कोशिश कर रही है, जिसे पिछली सरकारें हल नहीं कर सकीं.

दूसरा कारण कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी रहा.

सरकार की 10 लाख रुपये तक की मुफ्त स्वास्थ्य बीमा योजना और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जुड़े ऐलानों का असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर पड़ा है.

इसके अलावा, सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि उसने अपने सभी चुनावी वादे पूरे कर दिए हैं, जिनमें महिलाओं को वित्तीय सहायता देने की लंबे समय से चर्चा में रही योजना भी शामिल है. भले ही कुछ योजनाओं का क्रियान्वयन अभी जारी हो, लेकिन यह धारणा कि सरकार अपने वादों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, AAP को राजनीतिक फायदा पहुंचाती दिखी.

इसके विपरीत, विपक्ष कोई मजबूत वैकल्पिक राजनीतिक कहानी नहीं बना सका.

कांग्रेस अब भी गुटबाजी और संगठनात्मक कमजोरी के चक्र में फंसी हुई है. पंजाब में मुख्य विपक्षी दल होने के बावजूद वह स्थानीय मुद्दों पर जनता की नाराजगी को एक संगठित राजनीतिक आंदोलन में नहीं बदल सकी. आंतरिक खींचतान पार्टी को दोबारा खड़ा करने की कोशिशों पर भारी पड़ती रही. इन चुनावी नतीजों से लगता है कि कांग्रेस ने अपने कुछ पारंपरिक समर्थन क्षेत्रों को तो बचाए रखा, लेकिन उससे आगे नहीं बढ़ सकी.

कांग्रेस का सबसे अच्छा प्रदर्शन कपूरथला में रहा, जहां नगर निगम के 50 में से 31 वार्ड उसने जीते. उसने पठानकोट नगर निगम में 18, बटाला नगर निगम में 14, मोहाली नगर निगम में 13 और बठिंडा नगर निगम में 5 वार्ड जीते. इन सभी नगर निगमों में कुल 50-50 वार्ड हैं.

नगर परिषदों में कांग्रेस ने फाजिल्का, फिरोजपुर, फरीदकोट, राजपुरा, जगराओं, रायकोट, मलेरकोटला, मेहतापुर, मोरिंडा, चमकौर साहिब, नंगल, भवनीगढ़, फतेहगढ़ चूड़ियां, मौर, जीरा और मलोट में अच्छा प्रदर्शन किया.

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने X पर लिखा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ बहादुरी से मुकाबला किया, जिसने “सत्ता का दुरुपयोग किया और सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल किया.”

उन्होंने कहा, “नगर निकाय चुनावों के दौरान पूरे पंजाब में उनकी घोषित नीति ‘साम, दाम, दंड, भेद’ खुलकर दिखाई दी. मैं फिर दोहराता हूं कि 2027 में AAP दस सीटें भी नहीं जीत पाएगी. AAP नगर निकाय चुनावों की ‘चुराई हुई जीत’ का जश्न मना सकती है, लेकिन यह जश्न फरवरी 2027 तक ही चलेगा.”

ऐसे चुनाव में, जहां सत्ता विरोधी माहौल का फायदा उठाने का मौका था, दूसरे स्थान पर रहना कांग्रेस के लिए उत्साहजनक संकेत नहीं माना जा सकता.

BJP का प्रदर्शन शायद इससे भी ज्यादा निराशाजनक रहा. 2020 में अकाली दल से अलग होने के बाद पार्टी लगातार यह दावा करती रही है कि वह पंजाब में अपने दम पर एक बड़ी ताकत बन सकती है. उसका भरोसा इस बात पर टिका था कि शहरी पंजाब में BJP की स्वीकार्यता बढ़ रही है. लेकिन इन नतीजों ने उस धारणा को चुनौती दी है.

अगर शहरी निकाय चुनाव BJP के लिए अपने दम पर सत्ता की दावेदार बनने की शुरुआत थे, तो नतीजे बताते हैं कि यह लक्ष्य अभी काफी दूर है. राष्ट्रीय स्तर की पहचान को राज्य स्तर की चुनावी सफलता में बदलने के लिए पार्टी के पास अभी भी पर्याप्त संगठनात्मक ताकत और स्थानीय नेतृत्व नेटवर्क नहीं है.

BJP ने अबोहर नगर निगम के 50 में से 28 वार्ड और फाजिल्का के 25 में से 11 वार्ड जीते. फाजिल्का पूर्व BJP प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ का क्षेत्र माना जाता है. गुरुवार को उनकी जगह केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. ढिल्लों के प्रभाव वाले बरनाला में BJP 8 वार्ड जीत सकी.

पार्टी ने अपने पारंपरिक गढ़ पठानकोट में पकड़ बनाए रखने की कोशिश की. यहां उसने 50 में से 20 वार्ड जीते. हालांकि यह BJP विधायक अश्विनी कुमार शर्मा का विधानसभा क्षेत्र है, फिर भी पार्टी सुजानपुर नगर परिषद में ज्यादा वार्ड नहीं जीत सकी, जिसे उसका महत्वपूर्ण गढ़ माना जाता है.

BJP ने कपूरथला, मोगा और बटाला नगर निगमों में भी कुछ वार्ड जीते.

AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने चुनावी प्रदर्शन के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान को बधाई दी और BJP को “ED पार्टी” कहा.

उन्होंने कहा कि पंजाब के व्यापारियों और कारोबारियों ने ED की छापेमारी के जरिए उन्हें परेशान करने के लिए BJP को करारा जवाब दिया है.

वहीं अकाली दल लगातार कमजोर होता दिख रहा है. हालांकि कुछ इलाकों में पार्टी ने अपनी मौजूदगी बनाए रखने के संकेत दिए हैं, लेकिन वह उस राज्यव्यापी प्रभाव से अभी बहुत दूर है, जो कभी उसके पास हुआ करता था. पार्टी ने मोहाली, कपूरथला, मोगा और बठिंडा नगर निगमों में कुछ वार्ड जीते, लेकिन किसी भी जगह उसका आंकड़ा 10 तक नहीं पहुंच सका. बठिंडा में उसके प्रदर्शन पर खास नजर थी, क्योंकि बठिंडा लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व अकाली नेता हरसिमरत कौर बादल करती हैं.

नगर परिषदों में अकाली दल का प्रदर्शन कोट शमीर, मलूका, भाई भगतान के, मौर, नथाना और संगत में अच्छा रहा. ये सभी बठिंडा जिले में हैं. पार्टी ने मानसा जिले के बुढलाडा और मानसा में भी कुछ वार्ड जीते, साथ ही मुक्तसर जिले के मलोट में भी सफलता हासिल की.

मजीठा नगर परिषद में अकाली दल ने 6 वार्ड जीते, जबकि AAP ने 7 वार्ड जीते. मजीठा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व अकाली विधायक गनीव मजीठिया करती हैं, जो वरिष्ठ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की पत्नी हैं.

SAD के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी ने चुनाव जीतने के लिए अपने पद और सरकारी ताकत का दुरुपयोग किया.

बादल ने X पर लिखा, “नामांकन पत्र खारिज करने, पुलिस और राज्य चुनाव आयोग के दुरुपयोग, और @AamAadmiParty की खुली गुंडागर्दी समेत व्यापक दमन के बावजूद पंजाब की जनता ने साफ दिखा दिया है कि उसका भरोसा किस पर है. यह एक बहुत मजबूत संदेश है.”

इन नतीजों ने BJP और अकाली दल, दोनों के सामने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है. अगर 2027 में AAP को प्रभावी ढंग से चुनौती देना लक्ष्य है, तो ये नतीजे उन्हें राजनीतिक हकीकत पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर सकते हैं.

अलग-अलग चुनाव लड़ते हुए, इनमें से कोई भी पार्टी फिलहाल सत्तारूढ़ AAP के लिए गंभीर चुनौती बनती नहीं दिख रही है.

ऐसे में दोनों के बीच व्यापक समझ या गठबंधन राजनीतिक पसंद नहीं, बल्कि राजनीतिक जरूरत बन सकता है.

जहां तक AAP की बात है, नतीजे उसके लिए उत्साहजनक जरूर हैं, लेकिन चंडीगढ़ के DAV कॉलेज सेक्टर-10 की प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक डॉ. कंवलप्रीत कौर का कहना है कि ये नतीजे 2027 की जीत की गारंटी नहीं हैं.

उन्होंने कहा, “विधानसभा चुनाव कहीं बड़े स्तर पर लड़े जाते हैं. हालांकि ये नतीजे एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक बढ़त जरूर देते हैं. सत्तारूढ़ पार्टी ने दिखा दिया है कि उसका मुख्य शहरी वोट बैंक अभी भी उसके साथ है और सत्ता विरोधी भावना अभी तक सरकार विरोधी लहर में नहीं बदली है.”

उन्होंने आगे कहा, “विपक्ष के लिए संदेश और भी साफ है. समय तेजी से निकल रहा है. जब तक कांग्रेस अपने अंदरूनी संघर्ष खत्म नहीं करती और BJP व अकाली दल अपनी रणनीति पर दोबारा विचार नहीं करते, तब तक पंजाब के नगर निकाय चुनावों का यह फैसला 2027 के विधानसभा चुनाव की दिशा का पहला संकेत माना जा सकता है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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