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Tuesday, 30 June, 2026
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मोदी और सेशेल्स ने ब्लू इकॉनमी और क्लाइमेट एड के लिए टीम बनाई, सिर्फ मछली और जहाज़ के लिए नहीं

PM मोदी का ऐतिहासिक दौरा आइलैंड ग्रुप की खास क्लाइमेट कमज़ोरियों को दूर करने के साथ-साथ कम्युनिकेशन के स्ट्रेटेजिक समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने के बारे में है.

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भारत और सेशेल्स की दोस्ती को इस हफ्ते नई मजबूती मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पूरी की. दोनों देशों की लंबे समय से चली आ रही मित्रता का प्रतीक माने गए एक विशेष क्षण में प्रधानमंत्री मोदी ने जोनाथन नाम के 196 वर्षीय विशाल एल्डाब्रा कछुए को खाना खिलाया. माना जाता है कि यह दुनिया का सबसे उम्रदराज़ जीवित स्थलीय जानवर है. प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली के विशेष सत्र को भी संबोधित किया. ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने. मोदी की इस राजकीय यात्रा के प्रमुख परिणामों में 17.5 करोड़ डॉलर का विकास पैकेज, नौ व्यापक समझौतों पर हस्ताक्षर और समुद्री सुरक्षा सहयोग को बड़ी मजबूती मिलना शामिल है.

दोनों देशों की यह मित्रता इतिहास में गहराई से जुड़ी हुई है, लेकिन साथ ही भविष्य की चुनौतियों के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक बनी हुई है.

यह ऐतिहासिक यात्रा सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह के साथ भी हुई. इसे हिंद महासागर क्षेत्र के लिए भारत के MAHASAGAR (महासागर) विजन के तहत एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

सेशेल्स क्यों है महत्वपूर्ण

सेशेल्स हिंद महासागर में अफ्रीका के पूर्वी तट के पास स्थित 116 द्वीपों वाला एक द्वीपीय देश है. यह पूर्वी अफ्रीका का सबसे छोटा देश है, जिसकी आबादी 2022 तक लगभग 1 लाख से अधिक थी. 18वीं सदी तक यह क्षेत्र लगभग निर्जन था. बाद में फ्रांस ने इस पर दावा किया और यहां के बागानों में काम करने के लिए अफ्रीकी, अरब और भारतीय मजदूरों को लाया गया. 19वीं सदी की शुरुआत में जब ब्रिटेन ने यहां नियंत्रण स्थापित किया, तब भारत से भी अनुबंधित मजदूरों को लाया गया.

सेशेल्स को 1976 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिली. इसके बाद देश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि आधारित व्यवस्था से निकलकर बाज़ार और सेवा आधारित अर्थव्यवस्था में बदल गई, जो काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर है. 1976 से 2015 के बीच देश की जीडीपी में लगभग 700 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

सेशेल्स, मुंबई से लगभग 3,800 किलोमीटर दूर है. मुंबई से सेशेल्स के सबसे बड़े और सबसे अधिक आबादी वाले द्वीप माहे के लिए इंडिगो की सीधी उड़ान भी संचालित होती है. समुद्री मामलों के विशेषज्ञ अभिजीत सिंह ने कहा कि यह पूर्वी अफ्रीकी देश प्रमुख समुद्री संचार मार्गों (Sea Lines of Communication-SLOCs) पर रणनीतिक रूप से स्थित है.

उन्होंने कहा, “शांतिपूर्ण समय में समुद्री संचार मार्ग व्यापारिक रास्तों के रूप में काम करते हैं, लेकिन इन्हें ऐसे रणनीतिक राजमार्ग भी माना जाता है जो देशों को दूर-दराज के क्षेत्रों में मौजूद संसाधनों तक पहुंच देते हैं. यह खास तौर पर तेल और गैस की खेपों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनका बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से ही पहुंचाया जाता है. इसलिए SLOCs की सुरक्षा क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं के विकास और स्थिरता के लिए बेहद ज़रूरी हो गई है.”

सेशेल्स पूर्वी अफ्रीका, खाड़ी क्षेत्र और भारतीय उपमहाद्वीप के बीच एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार का काम करता है. युद्ध या संकट के समय यह भारत की ऊर्जा ज़रूरतों के लिए आने वाले तेल के परिवहन में एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक स्थान बन जाता है.

सेशेल्स अपनी ‘ब्लू इकोनॉमी’ के लिए भी महत्वपूर्ण है. यह एक ढांचा है जिसे 2018 में टिकाऊ समुद्री विकास को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास को पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक विकास के साथ जोड़ने के लिए शुरू किया गया था. विशाल समुद्री क्षेत्र कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर उसे अलग रखने और ऑक्सीजन में बदलने की क्षमता रखते हैं. यह क्षमता पेड़ों और जंगलों की तुलना में लगभग चार गुना अधिक मानी जाती है. संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), विशेष रूप से SDG-14 के अनुरूप समुद्री संसाधनों का संरक्षण और समुद्रों के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना द्वीपीय देशों का प्रमुख उद्देश्य है.

सेशेल्स रणनीतिक रूप से ऐसी स्थिति में भी है, जहां से खुले समुद्र में होने वाली समुद्री डकैती पर नज़र रखी जा सकती है और हिंद महासागर की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है.

यह देश अवैध मछली पकड़ने, समुद्री आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी पर भी निगरानी रखता है. साथ ही, वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण समुद्र के बढ़ते जलस्तर से जुड़ी आपदाओं से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

भौगोलिक दृष्टि से सेशेल्स समुद्र से जुड़े इन खतरों का मुकाबला करने के लिए बेहद उपयुक्त स्थान पर स्थित है.

भारत की हिंद महासागर नीति में सेशेल्स

हिंद महासागर आज कई देशों के हितों का केंद्र बन गया है. इन हितों में समुद्र पर प्रभुत्व कायम करना, समुद्री मार्गों पर नियंत्रण और समुद्री व्यापार में बढ़त हासिल करना शामिल है. ऐसे में जिस महासागर का नाम ही भारत के नाम पर है, उसमें भारत अपनी महत्वपूर्ण भूमिका क्यों न निभाए?

सेशेल्स के साथ भारत का सहयोग यह दिखाता है कि भारत की समुद्री नीति अब केवल भूमि आधारित सुरक्षा दृष्टिकोण तक सीमित नहीं रही है. अब भारत हिंद महासागर को अपने रणनीतिक हितों के केंद्र के रूप में देखता है.

इस बदलाव को SAGAR (Security and Growth for All in the Region) की सोच के जरिए सामने रखा गया है. यह नीति सामूहिक सुरक्षा, टिकाऊ विकास और क्षेत्रीय सहयोग पर जोर देती है.

हाल ही में MAHASAGAR (Mutual And Holistic Advancement for Security And Growth Across Regions) की अवधारणा ने इस सोच को और विस्तार दिया है. इसके तहत भारत खुद को व्यापक हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में एक सक्रिय भागीदार के रूप में स्थापित कर रहा है. भारत एक ऐसी समुद्री व्यवस्था को बढ़ावा देना चाहता है जो खुली, समावेशी और मजबूत हो तथा वैश्विक समुद्री व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए.

इस नीति के तहत सेशेल्स भारत के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरा है. यह भारत की उस भूमिका को आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है, जिसमें भारत क्षेत्र में सुरक्षा उपलब्ध कराने वाले प्रमुख देश के रूप में अपनी पहचान बना रहा है.

नई दिल्ली लगातार विभिन्न द्वीपीय देशों की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने में निवेश कर रहा है. इसके लिए तटीय निगरानी प्रणाली, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण, रक्षा प्रशिक्षण, समुद्री बुनियादी ढांचे के विकास, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में सहयोग दिया जा रहा है.

भारत केवल सैन्य शक्ति के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश नहीं कर रहा है, बल्कि वह लंबे समय के लिए संस्थागत क्षमता निर्माण और क्षेत्रीय मजबूती पर भी ध्यान दे रहा है. यह तरीका दिखाता है कि भारत पारंपरिक विदेश नीति की सोच से आगे बढ़ने को तैयार है. यह भारत की उस मंशा को भी दर्शाता है कि वह केवल अपनी सुरक्षा पर केंद्रित एक क्षेत्रीय शक्ति बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा बढ़ाने वाला एक भरोसेमंद साझेदार बनना चाहता है, जिससे पूरे हिंद महासागर क्षेत्र को लाभ मिल सके.

हिंद महासागर में जलवायु के प्रति मजबूती का निर्माण

सेशेल्स जैसे छोटे द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) के लिए जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का कोई दूर का खतरा नहीं रह गया है, बल्कि यह उनके अस्तित्व के लिए सीधा खतरा बन चुका है.

समुद्र का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, तटीय कटाव एक स्थायी समस्या बन गया है और अत्यधिक मौसम संबंधी घटनाओं की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है.

समुद्री जैव विविधता को होने वाला नुकसान सीधे लोगों की आजीविका, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करता है. यह असर खास तौर पर उन द्वीपीय देशों पर अधिक पड़ता है, जिनकी अर्थव्यवस्था ब्लू इकोनॉमी पर निर्भर है.

इसी कारण जलवायु के प्रति मजबूती (क्लाइमेट रेजिलिएंस) अब राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा से अलग नहीं रह गई है.

भारत का सेशेल्स के साथ सहयोग इसी बदलती स्थिति को ध्यान में रखकर किया जा रहा है. इसमें रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ सतत विकास लक्ष्यों को भी महत्व दिया गया है.

इंटरनेशनल सोलर एलायंस, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने, आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के निर्माण और जलवायु अनुकूलन परियोजनाओं जैसी पहलों के माध्यम से भारत सेशेल्स को पर्यावरणीय और आर्थिक झटकों का सामना करने के लिए मजबूत बनाने में मदद कर रहा है.

जलवायु वित्त, क्षमता निर्माण और तकनीक साझा करने पर भारत का जोर विकास आधारित सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है.

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इस बात का संकेत है कि भारत की हिंद महासागर नीति केवल रक्षा और समुद्री सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जलवायु कार्रवाई को भी एक रणनीतिक आवश्यकता के रूप में शामिल किया गया है.

पर्यावरणीय स्थिरता को क्षेत्रीय स्थिरता के साथ जोड़कर भारत खुद को ऐसे साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है, जो द्वीपीय देशों की विशेष चुनौतियों को समझता है और एक अधिक सुरक्षित, मजबूत तथा टिकाऊ हिंद महासागर के निर्माण में योगदान देता है. हिंद महासागर बहुत विशाल और अनंत है. इसकी गहराइयों में छिपे कई रहस्य सदियों तक छिपे रहते हैं.

इसका एक उदाहरण लापता विमान MH370 है, जो कहीं हिंद महासागर की गहराइयों में खो गया और आधुनिक तकनीक की तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक उसका पता नहीं चल पाया है.

ऐसी स्थिति में हिंद महासागर में नियम आधारित समुद्री व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां सुरक्षा और सहयोग अंतरराष्ट्रीय कानून तथा साझा प्रशासन के पालन पर निर्भर करते हैं.

समुद्री चुनौतियां लगातार सीमा-पार स्वरूप लेती जा रही हैं. ऐसे में संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) में शामिल सिद्धांत, जैसे समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता, विवादों का शांतिपूर्ण समाधान और समुद्री संसाधनों का टिकाऊ उपयोग, पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं. सेशेल्स के साथ भारत की साझेदारी इन सिद्धांतों की रक्षा करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है. साथ ही यह उन क्षेत्रीय संस्थाओं को मजबूत करने का प्रयास भी है, जो समुद्री सहयोग, पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक सुरक्षा को बढ़ावा देती हैं.

मीनाक्षी लेखी बीजेपी लीडर, वकील और सोशल एक्टिविस्ट हैं. उनका एक्स हैंडल @M_Lekhi है. विचार व्यक्तिगत हैं.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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