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Thursday, 1 October, 2026
होममत-विमतगोवा का पोर्वोरिम फ्लाईओवर भारत में सड़कें कैसे नहीं बनानी चाहिए, इसकी 641 करोड़ रुपये की सीख है

गोवा का पोर्वोरिम फ्लाईओवर भारत में सड़कें कैसे नहीं बनानी चाहिए, इसकी 641 करोड़ रुपये की सीख है

शुरू होने के पहले दो हफ्तों में ही गोवा के पोर्वोरिम एलिवेटेड कॉरिडोर पर 4 बड़े हादसे और तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने के 580 मामले सामने आए.

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नौ सितंबर को सुपरकार्स का एक काफिला गोवा के पोर्वोरिम एलिवेटेड कॉरिडोर से होकर गुज़रा. आसपास के इलाकों के व्हाट्सएप ग्रुप में हलचल मच गई. लोग जल्दबाजी में नई 641 करोड़ रुपये की फ्लाईओवर पर जाने के लिए कार शेयर करने का प्लान बनाने लगे. इस फ्लाईओवर का काम 2023 से चल रहा था. शुरुआती कुछ दिनों तक 5.15 किलोमीटर लंबा यह रास्ता सिर्फ पैदल चलने वालों के लिए खुला था. वहां ज़मीन पर कई कार्यक्रम हुए और ड्रोन शो के जरिए आसमान को रोशन किया गया.

लोगों का उत्साहित होना समझ में आता था. एनएच-66 पर दक्षिण और उत्तर गोवा को जोड़ने वाली 6 लेन की इस फ्लाईओवर का लोग काफी समय से इंतज़ार कर रहे थे. एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की एक वजह पोर्वोरिम वाले हिस्से में सड़क सुरक्षा बढ़ाना भी बताई गई थी. 2022 से 2024 के बीच इस हिस्से में 238 हादसे हुए थे, जिनमें 22 लोगों की मौत हुई थी.

11 सितंबर को गोवा बीजेपी के इंस्टाग्राम हैंडल ने एक शानदार वीडियो के साथ फ्लाईओवर को ट्रैफिक के लिए खोलने का ऐलान किया. वीडियो में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत फ्लाईओवर पर गाड़ी चलाते दिखे. सड़क इतनी नई थी कि उस पर बिछा तारकोल अभी भी चमक रहा था. इसके साथ लिखा गया था: “The elevated corridor is open, the jam is history, and the road to Panaji is a straight run. This is what delivery looks like.” (एलिवेटेड कॉरिडोर खुल गया है, जाम अब बीती बात हो गई है, और पणजी की सड़क सीधी है. डिलीवरी ऐसी दिखती है.)

24 घंटे बाद ही पोर्वोरिम की ओर फ्लाईओवर के एकमात्र एग्जिट पॉइंट पर एक स्कूटर सवार और कार में बैठे एक यात्री की मौत हो गई. इसके बाद सरकार को फ्लाईओवर पर दोपहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोकनी पड़ी.

हादसे का सीसीटीवी फुटेज बेहद डरावना है. तेज़ रफ्तार से आ रही एक बलेनो, एक ट्रक के पीछे रुकी एक्टिवा से टकरा जाती है. टक्कर इतनी जोरदार थी कि स्कूटर सवार हवा में उछल गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई.

उसी शाम हम भी इस हादसे के बाद लगे जाम में एक घंटे से ज्यादा समय तक फंसे रहे. इस दौरान पोर्वोरिम के विधायक और पर्यटन मंत्री रोहन खाउंटे एक बड़े होर्डिंग से हमारी ओर मुस्कुराते हुए नज़र आ रहे थे और हमें नए फ्लाईओवर की बधाई दे रहे थे.

हम एक ऐसे एग्जिट की ओर धीरे-धीरे बढ़ते रहे, जो वहां था ही नहीं. आखिरकार हमें पणजी तक जाना पड़ा, जो करीब 8 किलोमीटर आगे था. वहां जाकर ही हम यू-टर्न ले सके.

खामी वाला कॉरिडोर

यह दर्दनाक हादसा फ्लाईओवर की परेशानियों की सिर्फ शुरुआत थी. शुरू होने के पहले दो हफ्तों में ही कॉरिडोर पर 4 बड़े हादसे और तेज़ रफ्तार से गाड़ी चलाने के 580 मामले सामने आ चुके हैं. वाहनों पर लगाई गई पाबंदियों और एंट्री-एग्जिट पॉइंट अचानक बंद किए जाने से उस इलाके में ट्रैफिक की स्थिति और खराब हो गई है, जहां पहले से ही गलत डायवर्जन और पर्याप्त साइनबोर्ड न होने की समस्या थी.

पिछले हफ्ते थोड़ी देर हुई बारिश से कॉरिडोर पर भारी जलभराव हो गया. पानी निकालने के लिए कर्मचारियों को नए बने कंक्रीट के बैरियर तोड़ने पड़े.

अगर गोवा का राजनीतिक नेतृत्व फ्लाईओवर का श्रेय लेने के लिए उत्सुक रहा है, तो इसकी कमियों की जिम्मेदारी लेने को लेकर उतना उत्साह नहीं दिखा है.

गोवा के PWD मंत्री दिगंबर कामत, जिनके विभाग के पास इस फ्लाईओवर के निर्माण की जिम्मेदारी है, अगस्त में पत्रकारों को भरोसा दिला रहे थे कि प्रोजेक्ट की समयसीमा को लेकर “घबराने की ज़रूरत नहीं” है. उस समय कॉरिडोर का आखिरी टेस्ट चल रहा था. हादसे के बाद कामत ने कहा कि दुर्घटना तेज़ और लापरवाही से गाड़ी चलाने की वजह से हुई. उन्होंने पत्रकारों से यह भी कहा कि उन्हें निशाना न बनाया जाए.

यह तब हुआ जब राज्य के ट्रैफिक डिपार्टमेंट ने PwD को एक डिटेल्ड लेटर लिखकर उन्हें आगाह किया था कि एक्सीडेंट से बचने के लिए एंट्री और एग्जिट पॉइंट पर, जहां एलिवेटेड कॉरिडोर सर्विस रोड से मिलता है, सही साइनेज और ट्रैफिक का चैनलाइज़ेशन ज़रूरी है. GOACAN, जो एक NGO है और कंज्यूमर और सिविक मामलों पर काम करता है, उसके कन्वीनर और नॉर्थ गोवा डिस्ट्रिक्ट रोड सेफ्टी कमेटी के मेंबर, रोलैंड मार्टिंस ने तो यहां तक कहा कि इस कॉरिडोर को लेकर समिति से कभी सलाह ही नहीं ली गई.

खाउंटे से भी सलाह नहीं ली गई थी. फ्लाईओवर शुरू होने से कुछ दिन पहले मंत्री ने एक गोवा के न्यूज आउटलेट को फ्लाईओवर पर इंटरव्यू दिया था. उन्होंने इस दौरान कहा था कि पोर्वोरिम के लोगों ने उन पर भरोसा जताया है, लेकिन हादसे के कुछ दिनों बाद उन्होंने कहा कि फ्लाईओवर से जुड़े फैसलों को लेकर उनसे सलाह नहीं ली गई थी.

एक और इंटरव्यू में उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों का पक्ष लिया. उन्होंने कहा कि कॉरिडोर तक पहुंच को लेकर शिकायत कर रहे नाराज पोर्वोरिम के लोग सिर्फ सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं जाहिर कर रहे थे. उन्होंने भी बातचीत का रुख धीरे-धीरे नागरिकों की जिम्मेदारी, लेन में सही तरीके से गाड़ी चलाने और तेज व लापरवाही से ड्राइविंग की ओर मोड़ दिया. उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने एक Ducati को इतनी तेज़ रफ्तार से जाते देखा था, जैसे फिल्म धूम के किसी सीन में हो.

‘प्रोजेक्ट से सिर्फ बिल्डरों को फायदा हुआ’

अब राज्य सरकार का जवाब यह है कि इस संकट को हल करने के लिए जल्दबाजी में आईआईएम नागपुर से एक तकनीकी टीम बुलाई गई है. इस संस्थान ने पणजी के कुछ हिस्सों में ट्रैफिक सिमुलेशन मॉडल बनाने के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए थे और अब उससे हाईवे की डिजाइन से जुड़ी समस्या का पता लगाने को कहा जा रहा है. इस पर AAP नेता वाल्मीकि नाइक ने कहा, “इंजीनियरिंग की खराबी किसी मैनेजमेंट स्कूल को नहीं सौंपी जा सकती.”

फ्लाईओवर की लगातार सामने आ रही समस्याओं की एक साफ कड़ी है. डिजाइन की वे कमियां, जो अब जानलेवा हादसों की वजह बन रही हैं, प्रोजेक्ट की नींव में ही मौजूद थीं.

हाल ही में हुई एक बैठक में खाउंटे ने बताया कि मूल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में 45 मीटर जगह की ज़रूरत बताई गई थी. इतनी जगह होती तो रैंप बनाने के लिए पर्याप्त जगह मिल जाती. फिर राज्य सरकार ने सिर्फ 25 मीटर जमीन ही क्यों खरीदी?

गोवा PWD के नेशनल हाईवे डिविजन के पूर्व प्रमुख और रिटायर्ड इंजीनियर गणपत सिधाये ने कहा कि हाईवे के किनारे तय की गई खाली जगह में इमारतों को बनाने की अनुमति दिए जाने के कारण जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शायद रुक गई थी.

सिधाये ने कहा, “कॉन्ट्रैक्टर बहुत ज्यादा सीमाओं के बीच काम कर रहा है. लेकिन क्या किसी ने कॉन्ट्रैक्टर के काम का दायरा देखा है? क्या ट्रैफिक सेफ्टी ऑडिट किए गए हैं? इस पूरे प्रोजेक्ट से सिर्फ बिल्डरों को फायदा हुआ है. जब जमीन ही उपलब्ध नहीं है, तो पुल कौन बना सकता है?”

अर्बन प्लानर ताहिर नोरोंहा ने कहा कि सबसे बड़ी कमी यह है कि जिस सड़क पर गाड़ियां 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिए बनाई गई थीं, अब उसी पर अचानक 65 किलोमीटर प्रति घंटे की सीमा लगानी पड़ रही है.

इसके अलावा, एलिवेटेड कॉरिडोर की 6 लेन को सिर्फ 300 मीटर के अंदर अटल सेतु की 4 लेन में जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है. नोरोंहा ने कहा कि इंडियन रॉड्स कांग्रेस की गाइडलाइंस के मुताबिक, ट्रैफिक को जुड़ने के बाद रफ्तार पकड़ने के लिए करीब 200 मीटर की समानांतर लेन और फिर मर्ज होने के लिए 50 मीटर की जगह होनी चाहिए.

उनके अनुमान के मुताबिक, पोर्वोरिम के “रैंप” करीब 50 मीटर और 25 मीटर की ही जगह देते हैं. उन्होंने कहा, “यहां ट्रैफिक न तो हाईवे की रफ्तार पकड़ पा रहा है और न ही उसे आराम से दूसरी लेन में मिलने के लिए पर्याप्त समय मिल रहा है.”

नोरोंहा समझते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन का अधिग्रहण हमेशा मुश्किल होता है. लेकिन उन्होंने कहा, “लंबे समय में इसका नतीजा इंसानी जान का नुकसान होता है.”

और यह नुकसान हमेशा बराबर नहीं होता.

उन्होंने कहा, “कार चलाने वाले आमतौर पर सुरक्षित रहते हैं, लेकिन मध्यम आय वाले दोपहिया वाहन चलाने वालों को जानलेवा नतीजे भुगतने पड़ते हैं.”

फ्लाईओवर के उद्घाटन के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इस हाईवे का “बहुत बड़ा भावनात्मक और आर्थिक महत्व” है. उन्होंने यह भी कहा कि अक्टूबर में वह मुंबई एयरपोर्ट से गोवा के बीच पूरे रास्ते कार से जाएंगे और “बन चुके कॉरिडोर के हर किलोमीटर का खुद निरीक्षण करेंगे.”

पोर्वोरिम के लोगों को उम्मीद है कि उनका यह दौरा उनके फ्लाईओवर को कम से कम कारों के लिए ज्यादा सुरक्षित बनाने में मदद करेगा.

दोपहिया वाहन चलाने वालों को अपना रास्ता खुद ढूंढना होगा.

यह लेख Goa Life सीरीज़ का हिस्सा है, जिसमें गोवा की संस्कृति के नए और पुराने दोनों पहलुओं को समझाया जाता है.

करनजीत कौर पत्रकार हैं, Arré की पूर्व संपादक हैं और TWO Design में पार्टनर हैं. उनका एक्स हैंडल @Kaju_Katri है. व्यक्त किए गए विचार निजी है.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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