नई दिल्ली: विश्व धरोहर का दर्जा पाने के लिए संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) के सामने भारत की नई कोशिश में, महात्मा गांधी का सत्याग्रह दक्षिण अफ्रीका के पीटरमैरिट्जबर्ग के एक रेलवे प्लेटफॉर्म से शुरू होता है और बिरला हाउस के लॉन में खत्म होता है.
भारत ने 3 सितंबर को UNESCO के सामने ‘The Sites of Satyagraha: The Emergence and Institutionalization of the Non Violent Movement’ (सत्याग्रह के स्थल: अहिंसक आंदोलन का उदय और संस्थागतकरण) नाम से अपना दस्तावेज जमा किया. इसमें नौ जगहों के नाम हैं. इनमें सात भारत में और दो दक्षिण अफ्रीका में हैं. यह 2014 की सूची से काफी छोटी है.
2014 के प्रस्ताव में 22 जगहें थीं और वह अभी भी UNESCO की वेबसाइट की अस्थायी सूची (Tentative List) में है. किसी जगह को औपचारिक रूप से नामित करने से पहले उसे कम से कम एक साल तक अस्थायी सूची में होना जरूरी है. भारत ने 2014 के प्रस्ताव को कभी औपचारिक नामांकन के लिए आगे नहीं बढ़ाया.
2014 की सूची में से सिर्फ चार जगहों को रखा गया है. ये हैं साबरमती, सेवाग्राम, मणि भवन और चंपारण. जबकि 18 जगहों को हटा दिया गया है.
2026 के प्रस्ताव में बाकी पांच जगहें नई हैं. इनमें दक्षिण अफ्रीका का पीटरमैरिट्जबर्ग रेलवे स्टेशन और फीनिक्स सेटलमेंट, दिल्ली में हरिजन सेवक संघ और गांधी स्मृति, और पुणे में आगा खान पैलेस शामिल हैं.
लेकिन 2026 में दांडी मार्च का रास्ता सूची में शामिल नहीं किया गया. वैकोम मंदिर-प्रवेश आंदोलन, बारडोली सत्याग्रह, जामिया मिलिया इस्लामिया और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी भी शामिल नहीं किए गए. ये सभी 2014 में भारत की UNESCO को भेजी गई सूची में थे.
अस्थायी सूची में किसी जगह का नाम होना सिर्फ इरादा बताता है और UNESCO इसकी जांच नहीं करता. आगे बढ़ने के लिए, सूची में शामिल होने के कम से कम एक साल बाद भारत को पूरा नामांकन दस्तावेज जमा करना होगा. हर साल 1 फरवरी तक नामांकन जमा किए जाते हैं और इनका मूल्यांकन सलाहकार संस्था ICOMOS, यानी International Council on Monuments and Sites, करती है.
इसके बाद वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी अपने सालाना सत्र में फैसला करती है. आमतौर पर यह नामांकन जमा होने के करीब 18 महीने बाद होता है. इसका मतलब है कि सत्याग्रह की इन जगहों पर कोई भी फैसला कम से कम दो से तीन साल दूर है.
UNESCO में भारत के स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी शर्मा ने कहा कि 2026 का नामांकन ऐसे समय में “शांति का संदेश” है, जब दुनिया अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन जैसे संघर्षों में फंसी हुई है.
उन्होंने कहा कि भारत हमेशा शांति का संदेश देने वाला देश रहा है और हमेशा सॉफ्ट पावर पर भरोसा करता रहा है. उन्होंने कहा कि यह उसी तरह की सॉफ्ट पावर है, जिसका भारत इस्तेमाल करना चाहता है.
शर्मा ने युवा भारतीयों के लिए भी एक संदेश दिया. उन्होंने कहा कि देश में युवाओं की तरफ से हिंसा देखने को मिल रही है, दिल्ली के प्रदर्शनों से लेकर दूसरी जगहों पर छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलनों तक. उन्होंने कहा कि उन्हें यह दिखाने की जरूरत है कि पत्थर फेंकना इसका जवाब नहीं है. शर्मा ने कहा कि गांधी और उनके साथ खड़े युवा लोगों ने अपने बीच इससे भी ज्यादा खराब उपनिवेशवाद और नस्लवाद का सामना किया, लेकिन उन्होंने पत्थर नहीं फेंके.
A significant milestone for India’s heritage!
5 remarkable properties and serial and transnational proposals have been added to India’s UNESCO Tentative List, taking India’s total to 78.
From the Buddhist murals of Bagh and the Gupta era Udaigiri to the temple heritage of the…
— Gajendra Singh Shekhawat (@gssjodhpur) September 29, 2026
गांधी युवा थे और बुद्ध भी युवा थे, और दोनों ने हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया. उन्होंने कहा कि Gen Z को बताया जाना चाहिए कि हिंसा इसका जवाब नहीं है और यह नामांकन यही करता है.
उन्होंने जिन दिल्ली प्रदर्शनों का जिक्र किया, उनका नेतृत्व इस गर्मी में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने किया था. इस समूह की शुरुआत मई में अभिजीत दिपके ने ऑनलाइन की थी, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” से की थी.
20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों का संसद की ओर मार्च लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के साथ खत्म हुआ. 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए और उन्हें RML अस्पताल ले जाया गया. दिल्ली पुलिस ने कहा कि उसके 118 जवान घायल हुए और प्रदर्शनकारियों के एक समूह पर पत्थरबाजी करने का आरोप लगाया.
एक अंतरराष्ट्रीय सूची
भारत के 2026 के UNESCO को दिए गए दस्तावेज में नौ जगहों के नाम हैं. सात भारत में और दो दक्षिण अफ्रीका में हैं. इनमें पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन शामिल है, जहां 7 जून 1893 को गांधी को फर्स्ट क्लास के डिब्बे से बाहर फेंक दिया गया था, और डरबन के पास फीनिक्स सेटलमेंट शामिल है, जिसे उन्होंने 1904 में बनाया था.
भारत की सात जगहें हैं बिहार के पूर्वी चंपारण में महात्मा गांधी सत्याग्रह स्मारक, गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती आश्रम, दिल्ली में हरिजन सेवक संघ और गांधी स्मृति, और महाराष्ट्र में वर्धा का सेवाग्राम आश्रम, पुणे का आगा खान पैलेस और मुंबई का मणि भवन.
शर्मा ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका भी इसके लिए तैयार था. उन्होंने कहा कि भारत कुछ समय से कूटनीतिक माध्यमों से इस नामांकन को आगे बढ़ा रहा था और पिछले महीने प्रोजेक्ट मौसम की एक वर्कशॉप में इस पर विस्तार से चर्चा हुई थी, जिसमें दक्षिण अफ्रीका भी शामिल हुआ था. इसके बाद नामांकन किया गया.
प्रोजेक्ट मौसम, संस्कृति मंत्रालय की भारतीय महासागर विरासत परियोजना है, जिसे आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) चलाता है. इसे जून 2014 में दोहा में हुई वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी की बैठक में शुरू किया गया था. इसका एक घोषित लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा जगहों को वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल करवाना है.
भारत का पहला सत्याग्रह दस्तावेज इससे कुछ महीने पहले, 15 अप्रैल 2014 को, लोकसभा चुनावों के बीच जमा किया गया था. उस समय कांग्रेस की अगुवाई वाली UPA सरकार सत्ता में थी.
इसका नाम “Sites of Saytagrah, India’s non-violent freedom movement” (सत्याग्रह के स्थल, भारत के अहिंसक स्वतंत्रता आंदोलन) था. इसमें गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, बिहार, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, केरल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में फैली 22 जगहों को शामिल किया गया था.
नई सूची में इनमें से सिर्फ चार जगहों के नाम हैं. ये बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र और दिल्ली हैं.
जिन जगहों को हटा दिया गया है, उनके बारे में शर्मा ने कहा कि नया नामांकन ज्यादा अंतरराष्ट्रीय प्रकृति का है और सिर्फ भारत पर केंद्रित नहीं है. उन्होंने कहा कि ASI दस्तावेज तैयार करता है और जगहों का चुनाव उसका फैसला है. उन्होंने कहा कि नया दस्तावेज अलग मानदंडों के तहत तैयार किया गया है और इन मानदंडों को बाद में जोड़ा जा सकता है.
हटाई गई 18 जगहों में से हर एक भारत में है. इनमें अहमदाबाद का कोचरब आश्रम भी शामिल है, जो 1915 में दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद गांधी का पहला आश्रम था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मार्च 2024 को कोचरब आश्रम के नए रूप का उद्घाटन किया था. इसी दिन उन्होंने साबरमती के मास्टर प्लान की शुरुआत भी की थी. सोडेपुर का खादी प्रतिष्ठान, दांडी और वेदारण्यम नमक मार्च के रास्ते, और खेड़ा, बारडोली और धरासणा के सत्याग्रह स्थल भी अब सूची में नहीं हैं.
नागपुर, जबलपुर, मैसूर और मुंबई के Flag Satyagraha के स्थल भी बाहर हैं. इसी तरह गोवालिया टैंक और वर्धा के भारत छोड़ो के स्थल, चौरी चौरा, कोलकाता के बेलीघाटा में गांधी भवन, जहां गांधी ने 1947 के दंगों के दौरान उपवास किया था, और चेन्नई का तिलक घाट भी बाहर हैं.
2014 की सूची में शामिल शांतिनिकेतन को 2023 में अलग से वर्ल्ड हेरिटेज साइट के रूप में शामिल किया जा चुका है.
2014 के प्रस्ताव में चंपारण सत्याग्रह के तीन स्थलों को एक ही हिस्से में रखा गया था. इनमें पटना का सदाकत आश्रम, जो अब बिहार कांग्रेस का कार्यालय है, चंपारण आश्रम और मोतिहारी का कोर्टरूम शामिल थे. नई सूची में इन तीनों की जगह एक ही स्मारक, मोतिहारी का महात्मा गांधी सत्याग्रह स्मारक रखा गया है. इस स्मारक में 48 फुट ऊंचा चुनार पत्थर का खंभा और एक संग्रहालय है. यह उस जगह को चिन्हित करता है, जहां अप्रैल 1917 में गांधी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया था.
2014 में भारत ने जामिया, BHU और गुजरात विद्यापीठ को राष्ट्रीय आंदोलन के केंद्रों के रूप में बताया था. इसमें कहा गया था कि मदन मोहन मालवीय ने 1916 में BHU की स्थापना की थी और गांधी के आह्वान के जवाब में 1920 में जामिया की स्थापना हुई थी. नई सूची में इन तीनों विश्वविद्यालयों का जिक्र नहीं है.
छुआछूत के खिलाफ लड़ाई
2014 से 2026 की सूची में सबसे बड़े बदलावों में से एक उन जगहों को लेकर है, जो छुआछूत के खिलाफ भारत की लड़ाई को दिखाती हैं.
2014 की सूची में केरल के वैकोम और गुरुवायुर शामिल थे, जहां मंदिर में प्रवेश के लिए दो सत्याग्रह हुए थे. दोनों को हटा दिया गया है. उनकी जगह हरिजन सेवक संघ को शामिल किया गया है, जिसकी स्थापना गांधी ने 1932 में बीआर अंबेडकर के साथ पूना पैक्ट के बाद की थी. दस्तावेज में संघ को “छुआछूत के खिलाफ गांधी के जीवनभर के सत्याग्रह का प्रतीक” बताया गया है.
इसमें यह नहीं बताया गया है कि बाद में अंबेडकर ने इस समझौते को खारिज कर दिया था. अपनी 1945 की किताब “What Congress and Gandhi Have Done to the Untouchables” (कांग्रेस और गांधी ने अछूतों के लिए क्या किया) में उन्होंने लिखा था कि इस समझौते के कारण दलित विधायक जाति-हिंदू मतदाताओं पर निर्भर हो गए थे और संघ को जाति-हिंदू चला रहे थे.
वैकोम दो विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों के लिए एक बड़ा आंदोलन केंद्र रहा है. अप्रैल 2023 में, केरल और तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्रियों, पिनराई विजयन और एम के स्टालिन, ने मिलकर सत्याग्रह के शताब्दी समारोह की शुरुआत की थी. स्टालिन ने इस आंदोलन का श्रेय पेरियार को दिया था.
जब दिसंबर 2024 में समारोह खत्म हुआ, तो स्टालिन ने वैकोम में नए रूप में तैयार किए गए पेरियार स्मारक का उद्घाटन किया.
आगा खान पैलेस, जहां महात्मा गांधी, कस्तूरबा गांधी और महादेव देसाई को 1942 से 1944 तक रखा गया था, को 2014 में जानबूझकर बाहर रखा गया था. उस दस्तावेज में कहा गया था कि जलियांवाला बाग की तरह यह महल भी अहिंसक विरोध से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं था.
नए दस्तावेज में जलियांवाला बाग के बारे में अभी भी यही कहा गया है, लेकिन अब महल सूची में है. इसे “अहिंसा का कैद और बलिदान वाला पक्ष” बताया गया है.
गांधी स्मृति के हिस्से में कहा गया है कि महात्मा गांधी को 30 जनवरी 1948 को शाम 5.17 बजे इसके लॉन में गोली मारी गई थी, “जब वह सामुदायिक सद्भाव बहाल कर रहे थे”. नाथूराम गोडसे का नाम नहीं लिया गया है.
शीर्षक भी बदल गया है. पहले यह ‘Sites of Satyagrah, India’s non-violent freedom movement’ (सत्याग्रह के स्थल, भारत का अहिंसक स्वतंत्रता आंदोलन) था और अब यह ‘The Sites of Satyagraha: The Emergence and Institutionalization of the Non Violent Movement’ (सत्याग्रह के स्थल: अहिंसक आंदोलन का उदय और संस्थागतकरण) है.
2014 में लिखी गई यह बातें भी हटा दी गई हैं कि भारत की आजादी “सिर्फ भारतीयों” ने हासिल की थी, कि जाति, समुदाय, धर्म और लिंग से अलग-अलग लोग इसमें शामिल हुए थे, और 1966 से 60 से ज्यादा सरकारें अहिंसक विरोध के जरिए बदली थीं.
2014 में भारत ने UNESCO के वर्ल्ड हेरिटेज चयन के मानदंड के बिंदु (iv) का हवाला दिया था. इसमें ऐसी इमारतें और वास्तु समूह शामिल होते हैं, जो मानव इतिहास के महत्वपूर्ण चरणों को दिखाते हैं. भारत ने तर्क दिया था कि आश्रम सत्याग्रहियों के प्रशिक्षण केंद्र थे.
नए दस्तावेज में इसे मानदंड (iii) से बदल दिया गया है, जिसमें किसी सांस्कृतिक परंपरा की असाधारण गवाही शामिल होती है. साथ ही मानदंड (vi) भी जोड़ा गया है, जिसमें ऐसी जगहें शामिल होती हैं जो असाधारण वैश्विक महत्व के विचारों या मान्यताओं से जुड़ी हों.
पुराने दस्तावेज के बड़े हिस्से लगभग उसी तरह नए दस्तावेज में भी रखे गए हैं. प्रामाणिकता वाला हिस्सा लगभग बिल्कुल एक जैसा है. इसमें यह दावा भी है कि मूल इमारतों में किए गए बदलाव “प्रकृति में बहुत बड़े नहीं हैं” और यह वादा भी है कि संस्कृति मंत्रालय ने उनकी सुरक्षा के लिए गांधी हेरिटेज साइट्स मिशन बनाया है.
2014 के दस्तावेज में एक गलती भी थी. उसमें कहा गया था कि दांडी मार्च सेवाग्राम से शुरू हुआ था, जबकि सेवाग्राम 1936 में बनाया गया था, यानी महात्मा गांधी के साबरमती से निकलने के छह साल बाद.
नए दस्तावेज में कहा गया है कि साबरमती में महात्मा गांधी का कमरा, हृदय कुंज, “बिल्कुल उसी तरह सुरक्षित रखा गया है, जैसे वह इसे छोड़कर गए थे”. आश्रम के पांच एकड़ हिस्से को 1,200 करोड़ रुपये की लागत से नए रूप में तैयार किया जा रहा है. इसका डिजाइन बिमल पटेल की कंपनी ने बनाया है, जो सेंट्रल विस्टा के आर्किटेक्ट हैं. इससे आश्रम का क्षेत्र पांच एकड़ से बढ़कर 55 एकड़ हो जाएगा.
गांधी के परपोते तुषार गांधी ने इस परियोजना को चुनौती दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 में देरी के आधार पर उनकी याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने गुजरात सरकार के इस वादे का भी जिक्र किया कि मूल पांच एकड़ का हिस्सा वैसा ही रखा जाएगा.
दक्षिण अफ्रीका की जगहें
नई सूची में शामिल दक्षिण अफ्रीका की दो जगहों की अपनी समस्याएं हैं. अब पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन से सिर्फ मालगाड़ियां चलती हैं. दक्षिण अफ्रीका ने फीनिक्स सेटलमेंट को अपनी अलग अस्थायी सूची में शामिल करने पर विचार किया था, लेकिन बाद में ऐसा नहीं करने का फैसला किया.
जोहान्सबर्ग के टॉल्स्टॉय फार्म और सत्याग्रह हाउस को संयुक्त प्रस्ताव से बाहर रखा गया क्योंकि इनमें बहुत ज्यादा बदलाव हो चुके थे. सत्याग्रह हाउस अब फ्रांस की ट्रैवल कंपनी वोयाजर्स डू मोंडे के स्वामित्व वाला संग्रहालय और गेस्ट हाउस है.
महात्मा गांधी के सत्याग्रह से जुड़ी यह सूची उन कई UNESCO विरासत प्रस्तावों में से एक है, जिन्हें भारत ने इस साल जमा किया है.
मध्य प्रदेश ने अस्थायी सूची में चार जगहें जोड़ी हैं. इनमें गिन्नौरगढ़ किला, मुरैना के बटेश्वर, पदावली और ककर्मठ मंदिर, विदिशा के पास उदयगिरि की गुफाएं और धार की बाघ गुफाओं की चित्रकारी शामिल हैं. इससे भारत की अस्थायी सूची में शामिल 78 जगहों में मध्य प्रदेश की संख्या 19 हो गई है.
गिन्नौरगढ़ के दस्तावेज में किले को गोंड राजधानी के रूप में बताया गया है और बाद में किए गए निर्माण को “मुगल हस्तक्षेप” बताया गया है. इसमें रानी कमलापति का कोई जिक्र नहीं है. उन्हीं के नाम पर शिवराज सिंह चौहान सरकार ने 2021 में भोपाल के हबीबगंज स्टेशन का नाम बदला था. इसमें दोस्त मोहम्मद खान का भी जिक्र नहीं है, जो भोपाल राज्य का संस्थापक था और रानी के बाद उसने किले पर कब्जा किया था.
मुरैना के दस्तावेज में कहा गया है कि बटेश्वर के 60 से ज्यादा मंदिरों को “जिगसॉ पजल की तरह” फिर से जोड़ा गया था. इसमें यह नहीं बताया गया है कि यह कैसे हुआ.
ASI ने 2004 में यह काम शुरू किया था, जब पुरातत्वविद के के मुहम्मद ने डकैत निर्भय सिंह गुर्जर को इसे शुरू करने की अनुमति देने के लिए राजी किया था. बाद में पास में हो रहे अवैध खनन के कारण यह काम छह साल के लिए रुक गया था.
इस महीने की शुरुआत में भारत ने असम की अहोम राजधानी रंगपुर-सिवसागर, राजस्थान के शेखावाटी के चित्रों वाले हवेली शहरों, निकोबारी सांस्कृतिक स्थलों और अंडमान में ब्रिटिश दंड बस्ती को भी जोड़ा. इसमें सेल्यूलर जेल भी शामिल है.
अब भारत के पास 45 वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स हैं. सबसे नई साइट सारनाथ है, जिसे जुलाई में बुसान में हुई समिति की बैठक में शामिल किया गया था. किसी जगह को औपचारिक रूप से नामित करने से पहले उसे कम से कम एक साल तक अस्थायी सूची में होना जरूरी है.
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