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Thursday, 23 July, 2026
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युवा बाहर बैठे हैं, लेकिन पीएम संसद में नहीं: प्रियंका गांधी का केंद्र पर हमला

संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा, "इतना बड़ा आंदोलन चल रहा है. देश के युवा बाहर बैठे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री संसद में नहीं आए. और आप मुझसे पूछ रहे हैं कि संसद क्यों नहीं चल रही?"

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नई दिल्ली: नीट-यूजी पेपर लीक विवाद और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि देशभर के युवा आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद नहीं आ रहे हैं.

संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा, “इतना बड़ा आंदोलन चल रहा है. देश के युवा बाहर बैठे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री संसद में नहीं आए. और आप मुझसे पूछ रहे हैं कि संसद क्यों नहीं चल रही?”

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों में शामिल लोगों को जल्द और कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया. उन्होंने एक्स पर लिखा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को “बख्शा नहीं जाएगा” और संबंधित अधिकारियों को सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं.

हालांकि विपक्षी नेताओं ने सरकार पर हमला जारी रखा और कहा कि लोगों को सोशल मीडिया पोस्ट नहीं, बल्कि न्याय चाहिए.

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “देश की जनता को ट्वीट नहीं, कार्रवाई और न्याय चाहिए. धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे हैं? हमें नैतिकता की उम्मीद नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री को जनता की आवाज सुननी चाहिए.”

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि अगर सरकार मानती है कि NEET विवाद की वजह से 20 छात्रों ने आत्महत्या की, तो वह इसकी जिम्मेदारी क्यों नहीं ले रही है.

उन्होंने कहा, “सरकार नहीं चाहती कि छात्र बाहर आकर अपनी बात रखें. क्या भाजपा के सहयोगी दल भी उन्हें नहीं बता सकते कि वे गलत हैं? छात्र मंत्री का इस्तीफा चाहते हैं. छात्रों के साथ जो हिंसा हुई, उसके लिए गृह मंत्री अमित शाह जिम्मेदार हैं.”

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने भी सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “क्या आपने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के प्रति संवेदना जताई? क्या आप सोनम वांगचुक की मौत का इंतजार कर रहे हैं? छात्रों को पीटने के लिए गुंडों का इस्तेमाल किया गया. लड़कियों को पीटते समय शर्म नहीं आई? क्या वे सच में पुलिसकर्मी थे? क्या यही हमारा संविधान है? पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लीजिए, फिर बात कीजिए.”

लगातार हंगामे के बीच संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई.

यह घटनाक्रम 20 जुलाई को सीजेपी के ‘चलो संसद’ मार्च के बाद दिल्ली और दूसरे शहरों में जारी प्रदर्शनों के बीच सामने आया है.

इस बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है और छात्र प्रतिनिधियों को कई बार औपचारिक रूप से चर्चा का निमंत्रण भेजा जा चुका है.

उन्होंने ANI से कहा, “सरकार ने कल दोपहर से अब तक चार बार छात्र प्रतिनिधियों को बातचीत का औपचारिक प्रस्ताव भेजा है. सरकार सभी मुद्दों पर, आपकी सुविधा के अनुसार, किसी भी समय बातचीत के लिए तैयार है.”

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