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Wednesday, 12 August, 2026
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17 साल बाद भी मुंबई-गोवा हाईवे विस्तार परियोजना क्यों गड्ढों और राजनीति के बीच फंसी हुई है

जब से इस प्रोजेक्ट की घोषणा हुई है, तब से ही इसमें कई मुश्किलें आ रही हैं. काम अभी भी अधूरा है, जबकि इसकी अनुमानित लागत शुरुआती 7,500 करोड़ रुपये से बढ़कर दोगुनी यानी 15,000 करोड़ रुपये हो गई है.

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मुंबई: 17 साल बीत चुके हैं, लेकिन मुंबई-गोवा हाईवे को चौड़ा करने का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है. गड्ढों और राजनीति ने इस काम को परेशान कर रखा है, जिससे हजारों यात्री सालों से लगातार परेशान हैं.

हर साल गणेश उत्सव से ठीक पहले निर्माणाधीन NH-66 हाईवे की खराब हालत फिर चर्चा में आ जाती है. इस दौरान मुंबई में रहने वाले कोंकण के कई लोग रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों में अपने गांव जाने के लिए इसी सड़क का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन त्योहार खत्म होते ही हाईवे को फिर भुला दिया जाता है और देरी जारी रहती है.

जमीन अधिग्रहण में देरी से लेकर ठेकेदारों से मंजूरी लेने में आने वाली दिक्कतों तक, मुंबई-गोवा हाईवे को चौड़ा करने की परियोजना शुरू होने के बाद से ही कई समस्याओं से घिरी रही है.

470 किलोमीटर लंबा यह हाईवे मुंबई को गोवा से जोड़ने वाला एक अहम रास्ता है. यह पश्चिमी तट के साथ पनवेल, इंदापुर और रायगढ़ के महाड जैसे औद्योगिक इलाकों से लेकर कोंकण के दक्षिणी छोर पर रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जैसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों तक जाता है.

रविवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने रायगढ़ का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया.

ठाकरे ने पत्रकारों से कहा कि जब उन्होंने पहले केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से बात की थी, तो मंत्री ने उनसे कहा था, “ठेकेदार बोर हो गए और भाग गए.”

ठाकरे ने आगे कहा, “हर बार ठेकेदारों का वही मुद्दा सामने आता है, लागत बढ़ गई है, कमीशन खा लिया गया है और सड़क की हालत खराब बनी हुई है. और यह सालों से हो रहा है.”

यह परियोजना अब राजनीतिक मुद्दा भी बन गई है.

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, MNS और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सभी कोंकण क्षेत्र में अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं और अक्सर इस परियोजना को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं.

रायगढ़ के महाड जिले से आने वाले मंत्री भरत गोगावले ने दिप्रिंट को बताया कि काम ठीक से चल रहा है और सिर्फ सर्विस रोड पर गड्ढे हैं.

गोगावले ने कहा, “पिछले महीने जब बारिश हुई थी, तब नागोठाने में दरारें आ गई थीं. लेकिन इसकी जांच की जा रही है. हम सर्विस रोड को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं और एक-दो जगहों को छोड़कर सड़क की हालत अच्छी है. हम भरोसा दिलाते हैं कि गणेशोत्सव से पहले स्थिति बेहतर हो जाएगी.”

हाईवे का काम सालों तक चलता रहा और अभी भी अधूरा है. इस बीच, इसकी अनुमानित लागत शुरुआत में 7,500 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 15,000 करोड़ रुपये हो गई है.

NH-66 पर जगह-जगह गड्ढे हैं, जिनकी वजह से कई हादसे हुए हैं.

हाईवे की यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राज्य के PWD विभाग की संयुक्त परियोजना है.

मुंबई से आने वाले रास्ते के शुरुआती हिस्से पनवेल से इंदापुर तक 84 किलोमीटर की जिम्मेदारी NHAI की है और हाईवे के बाकी हिस्से की जिम्मेदारी PWD विभाग की है.

रायगढ़ के सांसद सुनील तटकरे ने भी स्थिति का जायजा लिया और भरोसा दिलाया कि मुंबई-गोवा हाईवे का बाकी काम गणेश उत्सव से पहले पूरा कर लिया जाएगा.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “पिछले तीन महीनों में मैंने इस काम को लेकर कई बैठकें की हैं. मैंने गडकरी जी से भी बात की है. NHAI और राज्य PWD के अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते हैं, लेकिन 15 अगस्त तक खराब काम की समस्या को हल करना मेरा प्रयास रहेगा.”

काम अभी जारी है…

लेकिन इस परियोजना का सफर आसान नहीं रहा है.

हाईवे पहले दो लेन का था, लेकिन 2007 में केंद्र की तत्कालीन UPA सरकार ने इसे चार लेन का करने का फैसला किया था. सरकार ने एक आसान और गड्ढों से मुक्त सफर का वादा किया था.

हालांकि, जमीन अधिग्रहण में देरी के कारण काम 2010 में शुरू हो पाया. शुरुआत में परियोजना को 2016 तक पूरा करने की समय सीमा तय की गई थी. लेकिन कई मंजूरियां लेने में दिक्कतों और ठेकेदारों से जुड़ी समस्याओं के कारण परियोजना बार-बार टलती रही.

उदाहरण के लिए, पनवेल-इंदापुर हिस्से को चौड़ा करने का काम, जो संरक्षित कर्नाला पक्षी अभयारण्य से होकर गुजरता है, करीब पांच साल तक कानूनी विवाद में फंसा रहा.

शुरुआत में जंगल की जमीन के बाहरी हिस्से में 10 किलोमीटर के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में ही काम की अनुमति थी. लेकिन 2015 में लंबे कानूनी विवाद के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इस हिस्से को चौड़ा करने की मंजूरी दे दी.

इसके बाद ठेकेदार आर्थिक परेशानियों में फंस गया, जिससे काम में और देरी हुई.

शुरुआत में यह परियोजना बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल के तहत बनाई जा रही थी. इसमें एक निजी ठेकेदार परियोजना को बनाता, चलाता और फिर उसे सरकार को सौंप देता है.

हालांकि, जमीन से जुड़ी कई समस्याओं और कन्सेशनायर के कथित तौर पर काम ठीक से नहीं करने के कारण NHAI ने 2021 में समझौता खत्म कर दिया. NHAI ने परियोजना के लिए ठेकेदार को 500 करोड़ रुपये की मदद दी थी, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ने के कारण बाद में ठेका खत्म कर दिया.

ठेकेदार ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने NHAI के पक्ष में फैसला दिया और 2022 में एक नए ठेकेदार ने काम संभाल लिया.

पुराना समझौता खत्म होने के बाद प्राधिकरण ने इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल के तहत काम दिया. इसमें साइट पर किए गए काम के लिए ठेकेदारों को भुगतान NHAI करता है.

2023 में नितिन गडकरी ने घोषणा की थी कि हाईवे के बाकी हिस्से का 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. हालांकि, पनवेल और इंदापुर के बीच 84 किलोमीटर के विवादित हिस्से की खराब सड़क अब भी यात्रियों और बस ऑपरेटरों के लिए चिंता बनी हुई है.

हाईवे पर जगह-जगह गड्ढे हैं और नए बने फ्लाईओवर पर भी कई जगह दरारें आ गई हैं.

अप्रैल में जनता के लिए खोले गए नागोठाने फ्लाईओवर में सिर्फ एक मानसून के बाद ही दरारें आ गई हैं. इसके साथ वाली सर्विस रोड को भी जनता के लिए खोल दिया गया था, लेकिन उस पर भी बहुत सारे गड्ढे हैं.

तटकरे ने मीडिया से कहा, “नागोठाने के मामले में फ्लाईओवर के खराब काम की जांच चल रही है. दिल्ली से टीमें इसकी जांच के लिए आ रही हैं और तब तक करीब दो महीने तक यह फ्लाईओवर जनता के लिए बंद रहेगा.”

इस समानांतर सर्विस रोड पर गड्ढों को पेवर ब्लॉक से भरा गया था, जो कैबिनेट मंत्री अदिति तटकरे को पसंद नहीं आया. वह रायगढ़ की प्रभारी मंत्री भी हैं.

सोमवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय या राज्य हाईवे पर पेवर ब्लॉक का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यहां भारी वाहन चलते हैं और पेवर ब्लॉक इतना भार नहीं सह सकते. मैंने अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों से कहा है कि ये पेवर ब्लॉक ज्यादा समय तक नहीं टिकेंगे और निकल सकते हैं. इसके बजाय गड्ढे भरने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए.”

तटकरे ने कहा कि इस सर्विस रोड की मरम्मत का काम 25 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा.

लोगों ने सर्विस रोड की वजह से बढ़ रही परेशानी की शिकायत की है. मुख्य सड़क पर जहां निर्माण का काम चल रहा है, वहां कई हिस्सों में इसी सर्विस रोड का इस्तेमाल किया जा रहा है.

सुनील तटकरे ने कहा, “हां, यह सही है कि सर्विस रोड की हालत खराब है और इसके लिए DPR (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार की जा रही है. लापरवाही, ध्यान न देने और जरूरी व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई है.”

माणगांव में एक दूसरी जगह पर ट्रैफिक को आसानी से चलाने के लिए बाईपास बनाया गया है. गोगावले ने कहा कि गणेश उत्सव से पहले एक लेन शुरू कर दी जाएगी.

आगे का रास्ता मुश्किल

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मुंबई-गोवा राष्ट्रीय हाईवे पर गड्ढों की वजह से 2020 से अब तक 170 हादसों में कम से कम 97 लोगों की मौत हुई है और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं.

हालांकि, इंजीनियर और स्थानीय कार्यकर्ता चैतन्य पाटिल के अनुसार, 2011 से अब तक मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है.

पाटिल ने कहा, “गड्ढों की मरम्मत तभी होती है जब किसी की मौत हो जाती है. लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए. कई जगह हादसे हो रहे हैं, लोगों की मौत हो रही है, गाड़ियां खराब हो रही हैं और सालों से यही सब चल रहा है.”

पाटिल पिछले एक दशक से मुंबई-गोवा हाईवे के निर्माण पर नजर रख रहे हैं. उन्होंने अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों को पत्र भी लिखे हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

2025 में उन्होंने 29 दिनों में पनवेल से गोवा तक 490 किलोमीटर पैदल यात्रा की और गड्ढों, दरारों, सड़क के गायब साइन बोर्ड और दूसरी परेशानियों को दर्ज किया. इसके बाद उन्होंने ये तस्वीरें अधिकारियों को भेजीं.

उन्होंने कहा, “जब मैंने उन्हें गड्ढे दिखाए, तब अधिकारियों ने काम किया, लेकिन वे खुद से कोई काम नहीं करते. अधिकारी सिर्फ एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं, लेकिन कुछ नहीं करते.”

उन्होंने आगे कहा, “मेरा एक ही लक्ष्य है कि लोगों की जान बचाई जाए और इस मुंबई-गोवा हाईवे पर सफर आसान बनाया जाए.”

‘हाईवे की राजनीति’

हाईवे अब राजनीतिक विवाद का बड़ा मुद्दा बन गया है.

कोंकण क्षेत्र में रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, ठाणे, पालघर, मुंबई शहर और मुंबई उपनगर जिले शामिल हैं. रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग के बहुत से लोग रोजगार के लिए मुंबई और ठाणे जिलों में आकर बस गए हैं, लेकिन उनकी जड़ें अब भी अपने गांवों से जुड़ी हैं. इसलिए 10 दिन चलने वाले गणेश उत्सव के दौरान ये लोग अपने घर और गांव जाते हैं और इस अहम रास्ते का इस्तेमाल करते हैं.

एक समय में अविभाजित शिवसेना का इस इलाके में दबदबा था, लेकिन पार्टी के बंटवारे के बाद एकनाथ शिंदे की शिवसेना का प्रभाव बढ़ गया है और BJP भी ज्यादा पीछे नहीं है.

2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान हाईवे को लेकर स्थानीय रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के नेता रामदास आठवले और BJP के मंत्री रवींद्र चव्हाण के बीच राजनीतिक खींचतान हुई थी. दोनों ने निर्माण में देरी के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया था.

रविवार को राज ठाकरे ने भी हाईवे के निर्माण में हो रही बहुत ज्यादा देरी के लिए राजनीतिक दखल को जिम्मेदार ठहराया.

उन्होंने कहा, “करीब 15 साल से हम मुंबई-गोवा हाईवे परियोजना के बारे में सुन रहे हैं. लेकिन ठेकेदारों से कमीशन लेने के लिए राजनीतिक दखल के कारण ही यह काम पूरा नहीं हो सका.”

सोमवार को शिवसेना UBT के विधायक और कोंकण के अकेले विधायक भास्कर जाधव ने भी निर्माण में हो रही देरी पर सवाल उठाए.

जाधव ने मीडिया से कहा, “इस हाईवे के लिए जिम्मेदार लोगों को सामने आकर बताना चाहिए कि इस हाईवे के काम में सालों से देरी क्यों हो रही है. वे इस बारे में कभी कोई सफाई नहीं देते और न ही इस हाईवे को पूरा करने का कोई ठोस समाधान बताते हैं.”

दिप्रिंट ने परियोजना संभाल रहे NHAI के क्षेत्रीय कार्यालय से ईमेल के जरिए और PWD सचिव मिलिंद म्हैसकर से ईमेल और फोन कॉल के जरिए संपर्क करने की कोशिश की. उनके जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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