चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने परिसीमन पर अपनी सरकार के रुख में एक दिन पहले ‘पूरी तरह रोक’ से नरम ‘न्यायसंगत’ रुख में बदलाव किया था. इसके एक दिन बाद तमिलगा वेत्रि कझगम (TVK) सरकार ने फिर से ‘पूरी तरह रोक’ की मांग सामने रखी. हालांकि, इससे स्थिति और उलझ गई.
शुक्रवार को पार्टी ने साफ कर दिया कि उसे परिसीमन पर ‘पूरी तरह रोक’ चाहिए. इसका मतलब है कि लोकसभा में सीटों की संख्या नहीं बदली जानी चाहिए. वहीं, ‘न्यायसंगत परिसीमन’ का मतलब है कि सदन में किसी राज्य की आनुपातिक ताकत वही बनी रहे. राज्य सरकार का यह रुख मुख्यमंत्री विजय के एक दिन पहले दिए बयान के बाद आया, जिसमें ऐसा लगा था कि उन्होंने अपनी पार्टी के रुख में बदलाव किया है. उन्होंने केंद्र से ऐसी ‘न्यायसंगत परिसीमन’ की मांग की थी, जो कई लोगों को विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) के रुख जैसी लगी.
गुरुवार को चेन्नई के पास महाबलीपुरम में हुई 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में यह बात रखी गई. इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की. परिसीमन पर विजय का यह सोचा-समझा रुख उनकी अपनी सरकार के रुख से अलग माना गया. अभी 12 अगस्त को ही TVK सरकार ने पहल करते हुए विधानसभा में एक प्रस्ताव पास कराया था, जिसमें लोकसभा की सीटों की संख्या 543 पर रोकने की मांग की गई थी. DMK और वाम दलों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया था.
महाबलीपुरम में विजय ने शाह की मौजूदगी में कहा था, “1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों के बंटवारे पर लगी रोक खत्म होने वाली है और परिसीमन विधेयक 2026 पर विचार किया जा रहा है. ऐसे में दक्षिणी राज्यों में यह चिंता है कि मुख्य रूप से आबादी के आधार पर होने वाला परिसीमन संसद में हमारी सामूहिक आवाज को कमजोर कर सकता है.”
उन्होंने आगे कहा, “दक्षिणी राज्य जनसंख्या को स्थिर करने, मानव विकास और आर्थिक विकास में सबसे आगे रहे हैं. ये उपलब्धियां राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को लागू करने का नतीजा हैं और इनकी वजह से हमारे प्रतिनिधित्व में कमी नहीं होनी चाहिए. जनसंख्या को स्थिर करने जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा करने वाले राज्यों को सार्वजनिक नीति के जरिए नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए.”
उन्होंने कहा कि ऐसा रुख समानता के सिद्धांत को बनाए रखेगा, संविधान में तय संघीय संतुलन को सुरक्षित रखेगा और लोकतांत्रिक संस्थाओं में सभी राज्यों का भरोसा मजबूत करेगा.
आलोचकों ने कहा कि विजय ने केंद्र सरकार से साफ कानूनी गारंटी मांगकर ‘न्यायसंगत परिसीमन’ का रुख अपना लिया है. इसके तहत जनसंख्या को स्थिर करने में सफल होने की वजह से किसी भी राज्य के संसद में प्रतिनिधित्व के प्रतिशत में कमी नहीं होनी चाहिए.
DMK के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने विजय और TVK सरकार पर “शानदार यू-टर्न” लेने का आरोप लगाया. उन्होंने मीडिया से कहा कि बैठक में TVK सरकार और मुख्यमंत्री विजय के रुख में यू-टर्न सामने आया और उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया.
उन्होंने कहा, “पहले परिसीमन के मुद्दे पर TVK का रुख था ‘कोई परिसीमन नहीं’. उन्होंने कहा था, ‘कृपया कोई परिसीमन मत करो, 543 सीटों पर इसे रोक दो.’ लेकिन उस बैठक में उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को नुकसान नहीं होना चाहिए और तमिलनाडु के पास अभी जितना राजनीतिक प्रभाव है, उसका उतना ही प्रतिशत बरकरार रहना चाहिए.”
विजय के भाषण में ‘रोक’ वाली बात नहीं होने पर विधानसभा में विपक्ष ने भी हमला किया. चार दिन के ब्रेक के बाद शुक्रवार को विधानसभा की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ TVK और विपक्षी DMK के बीच बहस हुई. विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने पूछा कि दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री विजय ने ‘रोक’ शब्द का इस्तेमाल क्यों नहीं किया, जबकि उनकी सरकार ने विधानसभा में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 पर रोकने का प्रस्ताव पास किया था.
जवाब में TVK विधायक CTR निर्मल कुमार ने कहा कि दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक का एजेंडा सभी दक्षिणी राज्यों से जुड़े बड़े मुद्दों पर चर्चा करना था और मुख्यमंत्री विजय ने वही बात कही थी. हाईवे मंत्री आधव अर्जुन ने बीच में कहा, “परिसीमन को लेकर हमारी सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं हुआ है. हमें ‘न्यायसंगत परिसीमन’ नहीं चाहिए, हमें ‘परिसीमन पर रोक’ चाहिए.”
DMK पर हमला करते हुए आधव ने पार्टी पर परिसीमन का मजबूती से विरोध नहीं करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “आपको विरोध करना चाहिए, बहिष्कार नहीं. जब DMK सत्ता में थी, तब उन्होंने परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाई थीं और प्रदर्शन किया था. उन्होंने कहा था कि सांसदों की संख्या नहीं बढ़नी चाहिए. जब यह विधेयक संसद में आए, तो DMK को सदन से बाहर नहीं जाना चाहिए. केंद्र सरकार को वाजपेयी की तरह एक विशेष कानून लाना चाहिए, ताकि अगले 25 साल के लिए लोकसभा की सीटों की संख्या पर रोक लगाई जा सके.”
उन्होंने कहा कि DMK के सभी 39 सांसदों को सदन के अंदर रहना चाहिए और अपना विरोध दर्ज कराना चाहिए. “अगर आप बहिष्कार करते हैं, तो यह भी सत्तारूढ़ पार्टी के लिए फायदेमंद साबित होगा. अगर लोकसभा सीटों का परिसीमन आबादी के आधार पर किया गया, तो दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अधिकार खत्म हो जाएंगे.”
TVK की IT विंग, जो पार्टी की सूचना तकनीक और सोशल मीडिया इकाई है, ने गुरुवार को आलोचना शुरू होते ही अपने नेता का बचाव किया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक स्पष्टीकरण में कहा गया कि दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री का भाषण उन दक्षिणी राज्यों के मौजूदा प्रतिनिधित्व को बचाने के लिए “व्यापक और दूरदर्शी सोच” को दिखाता है, जो जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहे हैं.
बयान में कहा गया कि यह 12 अगस्त के विधानसभा प्रस्ताव के अनुरूप ही है. इस प्रस्ताव में लोकसभा सदस्यों की संख्या 543 तय रखने, राज्यों के बीच मौजूदा सीट बंटवारे के अनुपात को बिना बदलाव के जारी रखने और महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित करने की मांग की गई थी. स्पष्टीकरण में कहा गया कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को सीधे एक पत्र भी लिखा गया है और आलोचकों पर स्थिति को समझे बिना “गलत राय” फैलाने का आरोप लगाया गया.
1971 की जनगणना के आधार पर सीटों के बंटवारे पर लगी रोक खत्म होने वाली है. ऐसे में इस बात की व्यापक चिंता है कि आबादी के आधार पर होने वाला परिसीमन उन राज्यों का सामूहिक राजनीतिक प्रभाव कम कर सकता है, जिन्होंने जनसंख्या वृद्धि को सफलतापूर्वक स्थिर किया है. अब भी सवाल है कि व्यवहार में ‘प्रतिशत की सुरक्षा’ को कानूनी तौर पर कैसे सुनिश्चित किया जाएगा और क्या लोकसभा का विस्तार उत्तर भारतीय राज्यों की संख्यात्मक बढ़त को और मजबूत करेगा.
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