रांची (झारखंड): रांची में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी है. इसी बीच झारखंड की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सोमवार को कहा कि सरकार प्रदर्शन करने के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान करती है, लेकिन परीक्षाओं को रद्द करने के मामले में सरकार को संविधान के दायरे में रहकर काम करना होगा.
स्थिति को लेकर बात करते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं और इसके लिए बल का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.
उन्होंने पत्रकारों से कहा, “लोकतंत्र में प्रदर्शन करने की अनुमति है. लोग प्रदर्शन करने के लिए स्वतंत्र हैं. प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है. यहां पेलेट गन, आंसू गैस या लाठीचार्ज का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.”
राज्य सरकार और प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच बातचीत में कमी के आरोपों पर मंत्री ने कहा कि पिछले कई दिनों से लगातार बातचीत हो रही है.
उन्होंने कहा, “यह बातचीत की कमी नहीं थी. हमने घंटों चर्चा की है—पिछले चार दिनों से बातचीत चल रही है. राज्य सरकार की क्षमता के अंदर जो भी मुद्दे थे, उन सभी पर हम सहमत हुए हैं.”
हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यानी CGL (संयुक्त स्नातक स्तर) परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने का मामला कानूनी नियमों के कारण जटिल है.
पांडेय सिंह ने कहा, “जिस CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग पर वे अड़े हुए हैं, उसमें न्यायपालिका के निर्देश शामिल हैं. छात्रों को समझना चाहिए कि राज्य सरकार को संवैधानिक अधिकारों और तय नियमों के दायरे में रहकर काम करना होगा. हमने लगभग हर मांग मान ली है.”
मंत्री ने सरकार की पारदर्शिता को लेकर प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि किसी भी वित्तीय गड़बड़ी की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों का स्वागत किया गया है.
उन्होंने कहा, “हमने जांच को खुला रखा है. राज्य सरकार न्यायिक निगरानी में जांच कराने के लिए तैयार है. हमने वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी आमंत्रित किया है.”
मंत्री ने यह भी बताया कि पूरी तरह सही और मजबूत व्यवस्था बनाने के लिए देश के बड़े शैक्षणिक संस्थानों को भी इसमें शामिल करने की योजना है.
उन्होंने कहा, “राज्य सरकार बड़े सुधार करने की योजना बना रही है और इन योजनाओं के बारे में छात्रों को भी बताया गया है. IIM, IIT, XLRI और ISM जैसे भरोसेमंद संस्थानों के विशेषज्ञों वाली एक समिति बनाने का प्रस्ताव है, जो इन बदलावों की निगरानी करेगी.”