नई दिल्ली: ढाका में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने सोमवार को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की. यह पिछले हफ्ते नई दिल्ली में अपदस्थ PM शेख हसीना के ‘वापसी’ वाले भाषण को लेकर नए तनाव के बीच दोनों नेताओं की पहली मुलाकात थी.
बांग्लादेश के स्थानीय मीडिया ने पहले बताया था कि इन चिंताओं के कारण रहमान के सितंबर में भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने की संभावना कम है. अब भारतीय उच्चायुक्त और प्रधानमंत्री के बीच हुई इस मुलाकात से शिखर सम्मेलन से पहले दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद है.
ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक बयान में कहा, “उच्चायुक्त ने भारत के माननीय प्रधानमंत्री की ओर से शुभकामनाएं दीं और बांग्लादेश की सरकार और वहां के लोगों के साथ सकारात्मक, रचनात्मक और आगे की ओर देखने वाले तरीके से मिलकर काम करने की इच्छा जताई.”
“दोनों ने आपसी हित के मुद्दों पर विचार साझा किए और लोगों को केंद्र में रखते हुए भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की.”
इस बीच, भारत में बांग्लादेश उच्चायोग के एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट में कहा गया, “आधे घंटे की बातचीत से भारत-बांग्लादेश के संबंधों और आपसी जुड़ाव को मजबूत करने और आगे बढ़ाने में काफी मदद मिलने की उम्मीद है.”
High Commissioner Dinesh Trivedi paid a courtesy call on Hon'ble Prime Minister of Bangladesh, H.E. Tarique Rahman on 10 August 2026.
High Commissioner conveyed greetings from Hon’ble Prime Minister of India and the intent to work together with the Government and the people of… pic.twitter.com/hkTmUYb1Bs
— India in Bangladesh (@ihcdhaka) August 10, 2026
High Commissioner of #India, @DinTri (HE Dinesh Trivedi) paid maiden courtesy Call to Hon. Prime Minister of #Bangladesh, HE Tarique Rahman (@trahmanbnp), in Dhaka, this morning.
The half an hr discussion is expected to go distance in cementing | advancing 🇧🇩 🇮🇳 ties |… pic.twitter.com/aPp6CVU6WI— Bangladesh High Commission, New Delhi (@bdhc_delhi) August 10, 2026
रविवार को त्रिवेदी ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से मुलाकात की थी और PM तारिक रहमान को “PM मोदी की तरह लोगों के बीच रहने वाला व्यक्ति” बताया था.
यह बंद कमरे में हुई बैठक थी, लेकिन बाद में मीडिया से बातचीत में त्रिवेदी ने कहा, “मुझे लगता है कि जब दोनों नेता मिलते हैं, तो कई समस्याएं हल हो जाती हैं. जब हम एक-दूसरे से बात करते हैं, तो समस्याएं हल होती हैं. मेरा पूरा विश्वास है कि लोग एक हैं. कोई समाधान जरूर निकलेगा. यहां कुछ भी नकारात्मक नहीं है. सब कुछ सकारात्मक है.”
उन्होंने कहा, “हम सभी बांग्लादेश के प्रधानमंत्री का बहुत सम्मान करते हैं. मैंने उनके भाषण कई बार सुने हैं. वह लोगों के करीब रहने वाले व्यक्ति हैं. हमारे प्रधानमंत्री भी लोगों के करीब रहने वाले व्यक्ति हैं.”
इस साल की शुरुआत में पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता रहे त्रिवेदी की नियुक्ति एक बड़े राजनयिक पद पर भारत सरकार की ओर से की गई दुर्लभ राजनीतिक नियुक्ति थी. यह पहली बार था जब इस तरह की नियुक्ति की गई.
PM मोदी ने BIMSTEC के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर रहमान को 12-13 सितंबर को होने वाले सत्र में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था. यह निमंत्रण 14 जुलाई को ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के जरिए बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय को भेजे गए एक राजनयिक पत्र के माध्यम से दिया गया था.
दिल्ली में हसीना के मीडिया कार्यक्रम के बाद बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा था कि भारत “हसीना कार्ड खेलकर बांग्लादेश के साथ दोस्ताना संबंध नहीं बना सकता; ये दोनों बातें एक-दूसरे के खिलाफ हैं.”
हसीना ने पिछले हफ्ते नई दिल्ली के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब में वीडियो के जरिए मीडिया से बातचीत की थी. उन्होंने दावा किया था कि बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था खत्म हो गई है, अर्थव्यवस्था बर्बाद हो चुकी है और दिसंबर में उनकी घर वापसी बांग्लादेश के नागरिकों के प्रति “एक कर्तव्य” होगी.
बांग्लादेश सरकार ने एक कड़े बयान में हसीना को ये बातें कहने की अनुमति देने के लिए भारत की आलोचना की थी. उसने इसे “लोगों की भावनाओं के लिए बेहद दुखद और बांग्लादेश और भारत के बीच अच्छे द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए नुकसानदायक” बताया था.
बयान में कहा गया, “बांग्लादेश इस बात से नाराज है कि फरार और दोषी नरसंहार की आरोपी शेख हसीना को आज शाम नई दिल्ली में मीडिया के साथ लाइव बातचीत करने की अनुमति दी गई, जहां उन्होंने और उनके समर्थकों ने बांग्लादेश राज्य और उसके लोगों के खिलाफ जहरीली बातें कहीं.”
कार्यक्रम से पहले विदेश मंत्रालय ने साफ किया था कि हसीना की इस तरह की दूसरी ऑनलाइन बातचीत में “भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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