नई दिल्ली: सार्वजनिक जीवन में लंबे समय तक बने रहने के अपने इरादे का संकेत देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि 2047 तक भारत के विकसित देश बनने तक वह न थकेंगे, न रुकेंगे और न ही अपने रास्ते से हटेंगे.
वह सार्वजनिक जीवन में अपने 25 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने 2001 में इसी दिन गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी और इसके बाद 2014 में प्रधानमंत्री के तौर पर दिल्ली आए.
इस लक्ष्य को लेकर मोदी ने दो नए नारे दिए—‘हम इसे करके दिखाएंगे’ और ‘देश के लिए’. इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम के ऑडिटोरियम में मौजूद BJP कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने इन नारों को उत्साह के साथ दोहराया.
प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, भारत को दुनिया का एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने, अंतरिक्ष की खोज का विस्तार करने और यहां तक कि ओलंपिक की मेजबानी करने समेत जिन भी लक्ष्यों का ज़िक्र किया, भीड़ ने हर लक्ष्य के लिए ‘हम इसे करके दिखाएंगे’ का नारा लगाया.
प्रधानमंत्री ने कहा, “अगर हम छोटे और आसान लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ते हैं तो यह हमारे देश के साथ अन्याय होगा. यह समय हमारे देश के लिए बड़े, असाधारण और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करने का है.”
उन्होंने बेहतर भारत बनाने, देश को दुनिया की टॉप तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने और गरीबी खत्म करने समेत कई अहम लक्ष्यों पर जोर दिया. प्रधानमंत्री ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की आलोचना करने वालों पर भी निशाना साधा. उन्होंने करीब एक सदी पहले गुलाम देश की मानसिकता का उदाहरण देते हुए अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा, “कुछ लोग कहते हैं कि विकसित भारत का यह लक्ष्य बहुत दूर है. लेकिन मैं अपने देशवासियों से कहना चाहता हूं कि इतिहास पर नज़र डालिए. 100 साल पहले, 1920 और 1930 के दशक में, करीब 1,000 साल की गुलामी और उसके असर के बाद, टूटे हुए आत्मविश्वास, गरीबी से जूझते देश और समाज को बांटने की कोशिशों के बीच…ऐसे समय में आजादी के बारे में सोचना भी कितना मुश्किल रहा होगा. लोग इसके लिए लड़ रहे थे और अपनी जान कुर्बान कर रहे थे. लेकिन वही भारत फिर से खड़ा होगा, यह विश्वास करना कितना मुश्किल रहा होगा.”
स्व से समष्टि तक
स्वयं से वयम् तकमेरे जीवन का कण-कण, क्षण-क्षण
भारत भूमि को समर्पित रहेगा। pic.twitter.com/D1xrs878Y1— Narendra Modi (@narendramodi) October 7, 2026
अपने सार्वजनिक जीवन के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा, “लोगों की सेवा के 25 साल…मैं 140 करोड़ भारतीयों के भरोसे के लिए उनके सामने नतमस्तक हूं और आने वाले समय में और ज्यादा समर्पण के साथ देश की सेवा करने की उम्मीद रखता हूं.”
‘भारतीय पायलट और भारत में बना विमान’
करीब एक घंटे के भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने भगवद्गीता का कई बार जिक्र किया. उन्होंने ‘संकल्प’, ‘साधना’ और ‘कर्म’ जैसे शब्दों का भी बार-बार इस्तेमाल किया और इन्हें देश के प्रति कर्तव्य और गर्व से जोड़ा.
उन्होंने flydubai के पायलट कैप्टन स्मित मच्छर प्रकरण का ज़िक्र किया. पायलट के समय पर उठाए गए कदम से 170 से ज्यादा यात्रियों की जान बची थी. मोदी ने इस घटना का इस्तेमाल राष्ट्रीय गर्व की भावना जगाने और लंबे समय के लक्ष्य तय करने के लिए किया.
मोदी ने कहा, “आज दुनिया भारत के पायलट (मच्छर) की बात कर रही है. एक दिन ऐसा आएगा जब दुनिया भारत में बने विमानों की बात करेगी. ये लक्ष्य तभी पूरे होंगे जब हमारे पास लंबे समय के लक्ष्य होंगे.”
2014 से प्रधानमंत्री की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राष्ट्रीय गर्व की भावना पैदा करने के लिए अपनी प्रमुख योजनाओं की लंबी सूची में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ समेत कई अभियान जोड़े हैं.
मोदी ने इसकी तुलना 2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले के दौर से की.
उन्होंने कहा कि 2014 से पहले दुनिया भारतीय अर्थव्यवस्था को “खत्म हो चुकी” अर्थव्यवस्था के तौर पर देखती थी. उस समय कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और कई दूसरी चुनौतियां थीं. मोदी ने कहा कि उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर अपने अनुभव और सीख का इस्तेमाल करते हुए ‘हम इसे करके दिखाएंगे’ के मंत्र के साथ इन चुनौतियों का सामना किया.
उन्होंने कहा, “आज, 12 साल बाद (प्रधानमंत्री बनने के बाद), तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. उस समय (2014 से पहले) एक समस्या भी भारतीय अर्थव्यवस्था को हिला देती थी. आज अगर कोई समस्या आती है तो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती की बात होती है.”
उन्होंने कहा कि 2014 से पहले सार्वजनिक चर्चा में छाया रहने वाला ‘नीति पंगुता’ यानी ‘policy paralysis’ अब ‘reform express’ यानी सुधारों की तेज़ रफ्तार पर होने वाली चर्चाओं से बदल गया है.
उन्होंने कहा कि देश अब आयात पर ज्यादा निर्भर रहने से निकलकर निर्यात पर ध्यान देने वाला बन गया है. इसमें अपने मोबाइल फोन बनाना, कृषि क्षेत्र में ज्यादा विकास हासिल करना और सौर ऊर्जा तथा दूसरे नवीकरणीय संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना शामिल है.
उन्होंने यह भी कहा कि लोगों की कोशिशों से भारत दुनिया की टॉप पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ. उन्होंने कहा कि देश ने आज़ादी से पहले की चुनौतियों, कोविड-19, आतंकवाद और नक्सलवाद समेत सभी चुनौतियों से बाहर निकलकर आगे बढ़ा है. उन्होंने कहा कि 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाया गया है.
उन्होंने इस बदलाव का श्रेय “नीयत साफ और नीति स्पष्ट” को दिया.
उन्होंने देश की बड़ी आबादी को भी भारत की ताकत बताया. उन्होंने कहा कि भारत के पास अपनी हर चुनौती के लिए 140 करोड़ समाधान हैं. उन्होंने फिर कहा कि यह आराम करने का समय नहीं है, बल्कि दृढ़ संकल्प और स्पष्ट इरादे के साथ आगे बढ़ने का समय है.
उन्होंने कहा, “भारत कितना युवा है, हमारे पास कितने युवा हैं—इतिहास ने हमें एक बड़ा मौका दिया है और हमें इसे गंवाना नहीं चाहिए.”
उन्होंने कहा कि पिछली पीढ़ियों के लोगों ने आजादी हासिल करने के लिए अपनी जान कुर्बान की थी और मौजूदा पीढ़ी को विकसित भारत बनाने के लिए जीना होगा. उन्होंने कहा, “आज सवाल सिर्फ यह नहीं है कि हमें 2047 में कहां पहुंचना है, बल्कि यह है कि उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें आज से क्या करना होगा.”
उन्होंने कहा कि जब लोग देश के लिए एक साथ आ जाते हैं तो “कुछ भी हासिल करना असंभव नहीं होगा.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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