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Thursday, 4 June, 2026
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UPSC ने सिविल सेवा परीक्षा में लागू की फेस ऑथेंटिकेशन व्यवस्था, फर्जी एस्पिरेंट्स पर लगेगी रोक

UPSC के अनुसार, परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन आधारित रियल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से उम्मीदवारों की पहचान की गई. इससे फर्जीवाड़े और किसी अन्य व्यक्ति द्वारा परीक्षा देने की संभावना पूरी तरह खत्म हुई.

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नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने तथा फर्जी अभ्यर्थियों (इम्पर्सोनेशन) पर रोक लगाने के लिए फेस ऑथेंटिकेशन प्रोटोकॉल सफलतापूर्वक लागू किया है.

यह व्यवस्था हाल ही में आयोजित सिविल सेवा और भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा-2026 में लागू की गई. इसके जरिए यह सुनिश्चित किया गया कि आवेदन के समय जिस अभ्यर्थी की फोटो अपलोड की गई थी, परीक्षा केंद्र पर वही उम्मीदवार प्रवेश पत्र के साथ परीक्षा देने पहुंचे.

UPSC के अनुसार, परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन आधारित रियल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से उम्मीदवारों की पहचान की गई. इससे फर्जीवाड़े और किसी अन्य व्यक्ति द्वारा परीक्षा देने की संभावना पूरी तरह खत्म हुई.

आयोग ने देशभर के 2,072 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 में इस तकनीक का इस्तेमाल किया. यह एप्लिकेशन UPSC ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के तकनीकी सहयोग से विकसित की है.

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक अभ्यर्थी को परीक्षा कक्ष में प्रवेश से पहले फेस ऑथेंटिकेशन से गुजरना अनिवार्य किया गया. इसके लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी तैयार की गई, जिसे सभी राज्यों, जिलों और परीक्षा केंद्रों के साथ साझा किया गया.

UPSC ने बताया कि इस प्रणाली के लिए किसी महंगे हार्डवेयर की जरूरत नहीं पड़ी. यह किसी भी एंड्रॉयड स्मार्टफोन पर काम करती है. परीक्षकों ने अपने मोबाइल फोन का उपयोग कर उम्मीदवारों का सत्यापन किया, जिससे लागत और व्यवस्थागत बोझ कम हुआ.

आयोग के अनुसार, एक उम्मीदवार का फेस ऑथेंटिकेशन करने में केवल 6 से 8 सेकंड का समय लगा, जिससे परीक्षा केंद्रों पर लंबी कतारें नहीं लगीं. पीक समय में यह एप्लिकेशन प्रति मिनट करीब 12 हजार सत्यापन करने में सक्षम रही. एक साथ 7 हजार से अधिक परीक्षकों ने इसका उपयोग किया.

UPSC के अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि यह परीक्षा को पूरी तरह फर्जीवाड़ा मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने बताया कि करीब 5.5 लाख अभ्यर्थियों और 2 हजार से अधिक परीक्षा केंद्रों पर इस व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू किया गया.

आयोग ने कहा कि रियल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन का सफल क्रियान्वयन सिविल सेवा परीक्षा की निष्पक्षता, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

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