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Tuesday, 27 October, 2026
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उमर खालिद की किताब पुणे के संस्थान के पुस्तकालय से हटाई गई

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पुणे, 26 अक्टूबर (भाषा) जेल में बंद कार्यकर्ता उमर खालिद की लिखी एक किताब को पुणे स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) के पुस्तकालय में नयी पुस्तक के रूप में शामिल किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर आपत्ति जताए जाने पर हटा लिया गया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संस्थान ने सोमवार को कहा कि उसने ‘गलतफहमी या अशांति’ से बचने के लिए किताब को पुस्तकालय से हटा दिया है।

‘फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज: आदिवासी हिस्ट्रीज एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर’ नाम की यह किताब खालिद के पीएचडी शोध पर आधारित है। इसमें वर्तमान झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र में दो सदियों के दौरान राज्य के गठन, औपनिवेशिक शासन और आदिवासी समुदायों तथा राज्य के बीच सत्ता संबंधों का अध्ययन किया गया है। इसमें मुख्य रूप से ‘हो समुदाय’ पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

संस्थान ने एक बयान में कहा कि उसके पुस्तकालय में किताबों का संग्रह आईआईएसईआर के सदस्यों की सिफारिशों और पुस्तकालय के कामकाज की निगरानी करने वाली एक समिति के सुझावों के आधार पर तैयार किया जाता है।

बयान में कहा गया, ‘‘हर महीने विभिन्न विषयों की औसतन 50 से अधिक किताबें नियमित रूप से पुस्तकालय में जोड़ी जाती हैं। खालिद की लिखी संबंधित किताब के मामले में, जैसे ही यह विषय संस्थान के अधिकारियों के संज्ञान में आया, किसी भी गलतफहमी या अशांति से बचने के लिए एहतियाती कदम के तौर पर किताब को वापस लेने का फैसला किया गया। संस्थान इस बात की समीक्षा करेगा कि आगे क्या कार्रवाई या कदम उठाए जा सकते हैं।’’

संस्थान ने यह कदम सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक खाते से किए गए पोस्ट के बाद उठाया। पोस्ट में कहा गया था, ‘‘उमर खालिद के शोध प्रबंध को आईआईएसईआर, पुणे में एक किताब के रूप में शामिल किया गया है। यह विज्ञान अनुसंधान के लिए केंद्र सरकार का संस्थान है।’’

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। उस पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज है। उस पर फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए दंगों का कथित “मुख्य साजिशकर्ता” होने का आरोप है। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

भाषा शोभना देवेंद्र

देवेंद्र

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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