नई दिल्ली: एक समय था जब बड़े-बुजुर्गों की बात बिना सवाल किए मान ली जाती थी, लेकिन आज की पीढ़ी सवाल पूछती है और हर बात का तर्क चाहती है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अब लोगों को नई पीढ़ी के साथ संवाद करना होगा, उन्हें आदेश देने के बजाय बातचीत करनी होगी और सहमति बनानी होगी.
भागवत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब देशभर, खासकर दिल्ली में, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में नीट-यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. संसद का मानसून सत्र भी जारी है.
आरएसएस प्रमुख ने ये बातें विश्व मांगल्य सभा की ओर से अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘समकालीन मातृत्व’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक के समापन सत्र में कहीं.
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी हर बात को तर्क से समझना चाहती है और आदेश नहीं, बल्कि चर्चा में विश्वास करती है.
उन्होंने कहा, “हमें अपना तरीका बदलना होगा. एक समय था जब हम छोटे थे और माता-पिता जो कहते थे, वही मान लिया जाता था. उनकी बात पर सवाल नहीं उठाया जाता था. हमें विश्वास होता था कि उन्होंने जीवन देखा है और उनके अनुभव के अनुसार चलने से सब ठीक होगा.”
लेकिन अब ऐसा नहीं है.
उन्होंने कहा, “आज की पीढ़ी सवाल पूछती है और हर बात का कारण जानना चाहती है. इसलिए उन्हें समय देना, अपनापन दिखाना और उनसे लगातार बातचीत करना बहुत ज़रूरी है. आदेश देने के बजाय चर्चा होनी चाहिए और फैसले सहमति से होने चाहिए. आज तो परिवारों में भी बातचीत कम हो गई है, इसे बदलना होगा.”
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि नई पीढ़ी को हर बात का कारण समझाना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि आज परिवारों में सबसे बड़ी ज़रूरत है कि युवाओं को समय दिया जाए और उनसे लगातार संवाद रखा जाए. उन्होंने कहा कि माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों के सवालों का जवाब दें और उनकी जिज्ञासाओं को दूर करें. इसके लिए जरूरी है कि वे खुद भी लगातार अपना ज्ञान बढ़ाते रहें.
उन्होंने कहा, “बच्चे सीखने से ज्यादा देखकर सीखते हैं. इसलिए माता-पिता को खुद अपने व्यवहार से अच्छा उदाहरण पेश करना चाहिए.”
उन्होंने आगे कहा, “बच्चा जीवन में कितना भी आगे निकल जाए, आखिर में उसे अपनी जड़ों की अहमियत समझ आती है. पहले 12 साल तक बच्चों का पालन-पोषण हमारे हाथ में होता है. अगर हम उन्हें कुछ नहीं सिखाएंगे, तो वे कैसे सीखेंगे? हमें खुद ज्ञान बढ़ाना होगा, उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करना होगा और उनके सवालों के जवाब देने होंगे.”
भागवत ने कहा कि समाज में कई विवाद भ्रम की वजह से पैदा होते हैं और कई बार जानबूझकर भी भ्रम फैलाया जाता है.
उन्होंने कहा कि भारत के लोगों को बिना सोचे-समझे विदेशी जीवनशैली अपनाने के बजाय भारतीय संस्कृति और मूल्यों के अनुसार जीवन जीना चाहिए.
उन्होंने कहा, “लंबे समय तक भारतीय संस्कृति के बारे में गलत धारणाएं फैलाई गईं. कहा गया कि हमारी परंपराएं गलत हैं, जबकि सच यह है कि हमारी सांस्कृतिक नींव बहुत मजबूत है. हमें अपने इतिहास, अपने ज्ञान और अपनी परंपराओं पर भरोसा रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए.”
आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी जानकारी भी शामिल की जानी चाहिए.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: JNU से जामिया और अब जंतर-मंतर तक—बल प्रयोग को लेकर फिर सवालों के घेरे में दिल्ली पुलिस