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Saturday, 25 July, 2026
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Gen Z का आंदोलन UP विधानसभा चुनाव में क्या असर डाल सकता है

यूपी पुलिस पूरी तरह अलर्ट है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी विरोध-प्रदर्शन बड़े पैमाने पर न फैल जाए. हाल ही में कथित पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों को कुछ ही घंटों में तितर-बितर कर दिया गया था.

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लखनऊ: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे Gen Z के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार हालात पर करीब से नजर रख रही है. सरकार को चिंता है कि यह आंदोलन राज्य में भी फैल सकता है, खासकर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले.

बुधवार को गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस पर “नफरत फैलाने और छात्रों को भड़काने” का आरोप लगाया.

मुख्यमंत्री ने कहा, “समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस छात्रों के बीच नफरत फैला रही हैं और उन्हें भड़का रही हैं.” मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई कि उनकी सरकार बढ़ते प्रदर्शन को लेकर सतर्क है.

मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश पुलिस को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं. पुलिस से कहा गया है कि किसी भी प्रदर्शन को बड़े आंदोलन में बदलने से रोका जाए. अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि विरोध प्रदर्शनों को जल्द से जल्द नियंत्रित किया जाए.

फिलहाल यह रणनीति काम करती दिख रही है. प्रयागराज और कानपुर में हाल ही में पेपर लीक के आरोपों को लेकर हुए प्रदर्शन कुछ घंटों में ही खत्म करा दिए गए.

राज्य के कई हिस्सों से पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन की खबरें आ रही हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह आंदोलन अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों पर असर डालेगा.

राज्य प्रशासन को ऐसा नहीं लगता. मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि जंतर-मंतर का प्रदर्शन उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति पर बड़ा असर डालने की संभावना नहीं है.

उन्होंने कहा, “पेपर लीक एक मुद्दा है, लेकिन मतदाताओं के लिए कानून व्यवस्था ज्यादा बड़ा मुद्दा है. लोगों का मानना है कि योगी सरकार में वे ज्यादा सुरक्षित हैं. समाजवादी पार्टी के शासन के दौरान अपराध और रंगदारी को लेकर चिंता थी. प्रशासन के पास ऐसी व्यवस्था है कि कोई भी प्रदर्शन बड़ा आंदोलन न बन सके. मुख्यमंत्री योगी की छवि एक सख्त प्रशासक की है, जो किसी भी तरह की अशांति को बर्दाश्त नहीं करते.”

विशेषज्ञों की राय में असर संभव

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर कविराज का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन अक्सर राजनीतिक असर डालते हैं, खासकर जब उनमें युवा मतदाता शामिल हों.

उन्होंने द प्रिंट से कहा, “राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन बड़े स्तर पर चर्चा पैदा करते हैं और उनका असर भी होता है. यह आंदोलन युवाओं द्वारा चलाया जा रहा है, जिनमें से कई पहली या दूसरी बार वोट देने वाले हैं. उनके लिए मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है और वे उसी पर ध्यान दे रहे हैं. यह सत्ताधारी सरकारों के लिए चुनौती है, खासकर उन पांच राज्यों में जहां आने वाले महीनों में चुनाव होने हैं. इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह आंदोलन उत्तर प्रदेश की राजनीति को भी प्रभावित करे.”

लखनऊ के गिरी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शिल्प शिखा सिंह का मानना है कि अभी चुनावी असर का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी, क्योंकि राजनीतिक मुद्दे अक्सर चुनाव के करीब जाकर तय होते हैं.

उन्होंने कहा, “2024 के लोकसभा चुनाव में भी पेपर लीक एक मुद्दा था, लेकिन ‘संविधान बचाओ’ का मुद्दा ज्यादा प्रभावी रहा. 2027 के विधानसभा चुनाव के करीब ही पता चलेगा कि कौन सा मुद्दा मतदाताओं पर ज्यादा असर डालता है.”

SP की Gen Z तक पहुंच बनाने की योजना

SP सांसद डिंपल यादव के जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के बाद समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को पूरे राज्य में ले जाने की तैयारी कर रही है. पार्टी ‘Gen Z संवाद’ नाम से अभियान शुरू करेगी, जिसके तहत पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव अलग-अलग जिलों में युवाओं से बातचीत करेंगे. SP नेताओं के अनुसार, अखिलेश यादव इस योजना को अंतिम रूप देने के लिए लखनऊ पहुंच चुके हैं.

SP प्रवक्ता मनोज काका ने द प्रिंट से कहा कि यह आंदोलन अब राज्य के घर-घर तक पहुंच चुका है.

उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश के हर घर में Gen Z के युवा हैं. वे इन मुद्दों को समझ रहे हैं और अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. पेपर लीक, महंगी शिक्षा और बढ़ती बेरोजगारी उनके बड़े मुद्दे हैं. वे अब रुकने वाले नहीं हैं और वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ वोट करेंगे. हम भी अपना पक्ष लोगों के सामने रखेंगे.”

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुधांशु बाजपेयी ने कहा कि Gen Z आंदोलन का चुनावों पर असर जरूर पड़ेगा.

उन्होंने कहा, “Gen Z प्रदर्शन का चुनावी असर निश्चित रूप से होगा. हम उत्तर प्रदेश में जंतर-मंतर जैसे संयुक्त प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं. यह किसी राजनीतिक पार्टी के बैनर तले नहीं होगा, बल्कि सिविल सोसाइटी के समर्थन से होगा ताकि आम लोग भी इसमें शामिल हो सकें.”

BJP प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि पहले भी ऐसे दावे किए गए थे, लेकिन वे चुनावों में सही साबित नहीं हुए.

उन्होंने कहा, “किसान आंदोलन, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) आंदोलन और कोरोना संकट के समय भी कहा गया था कि इन मुद्दों का असर 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ और नतीजे हमारे पक्ष में आए. इस बार भी विपक्ष मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा, लेकिन नतीजे फिर से BJP के पक्ष में होंगे.”

युवाओं को पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर जोड़ने की कोशिश के बीच BJP चुनावी रणनीति में शासन और कानून व्यवस्था को मुख्य मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है.

गोरखपुर में अपने भाषण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली समाजवादी पार्टी सरकार पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्तियों में गड़बड़ी का आरोप लगाया.

उन्होंने आरोप लगाया कि 86 पदों में से 56 पद एक ही जाति के उम्मीदवारों को दिए गए थे और एक अयोग्य उम्मीदवार को टॉपर बना दिया गया था. उन्होंने विपक्षी दलों पर जाति के आधार पर समाज को बांटने, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए नफरत फैलाने और छात्रों को भड़काने का भी आरोप लगाया.

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विपक्ष की सहानुभूति आम लोगों के बजाय माफियाओं के साथ है.

उन्होंने कहा, “आज उत्तर प्रदेश माफिया मुक्त, गुंडा मुक्त, दंगा मुक्त और कर्फ्यू मुक्त है. विपक्ष इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहा है, क्योंकि उनके शासन में राज्य ने दंगे, कर्फ्यू, लूट और अराजकता देखी थी.”

मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों ने बताया कि योगी आदित्यनाथ अपने चुनावी भाषणों में पिछली SP सरकार की कथित नाकामियों का जिक्र करते रहेंगे.

उनके अनुसार, BJP की रणनीति 2027 के चुनाव को इस रूप में पेश करने की है कि मतदाताओं के सामने दो विकल्प हैं. एक तरफ ‘योगी आदित्यनाथ का सख्त शासन’ और दूसरी तरफ ‘समाजवादी पार्टी के दौर की कानून व्यवस्था की स्थिति’.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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