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Wednesday, 28 October, 2026
होमदेशटाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: बिश्नोई गैंग से जुड़े 11 आरोपी मकोका के तहत दोबारा गिरफ्तार

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: बिश्नोई गैंग से जुड़े 11 आरोपी मकोका के तहत दोबारा गिरफ्तार

गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों में से तीन को राजस्थान के कोटा से पकड़ा गया था, जबकि बाकी आरोपियों को दिल्ली और हरियाणा के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार किया गया. सभी आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं.

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मुंबई: अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में गिरफ्तार किए गए सभी 11 आरोपियों को बुधवार को मुंबई पुलिस ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत दोबारा गिरफ्तार किया. एक दिन पहले ही उनके खिलाफ इस सख्त कानून के तहत कार्रवाई की गई थी.

आरोपियों को मकोका मामलों की सुनवाई करने वाली मुंबई की विशेष अदालत में पेश किया गया. पुलिस ने 1999 के इस कानून के तहत उन्हें दोबारा गिरफ्तार करने की मांग की. इस कानून के तहत आरोपियों के लिए जमानत पाना काफी मुश्किल हो जाता है.

अदालत ने पुलिस की मांग को मंजूरी दे दी.

अब आरोपियों को गुरुवार को पुलिस रिमांड के लिए अदालत में पेश किया जाएगा.

पुलिस ने मंगलवार को 18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू इलाके में अभिनेता श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए 11 लोगों के खिलाफ मकोका की सख्त धाराएं लगाई थीं.

दो हमलावरों ने श्रॉफ की कार पर पांच गोलियां चलाई थीं. उस समय वह फुटबॉल ग्राउंड से निकल रहे थे. 36 साल के ‘बागी’ अभिनेता को ज्यादा चोट नहीं आई, लेकिन उनकी कार का ड्राइवर और वहां मौजूद एक व्लॉगर घायल हो गए थे.

लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्यों ने इस फायरिंग की जिम्मेदारी ली थी.

पुलिस ने जेल में बंद गैंगस्टर बिश्नोई के सहयोगी अनिल पंडित को इस मामले में वांछित आरोपी बताया है.

गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों में से तीन को राजस्थान के कोटा से पकड़ा गया था, जबकि बाकी आरोपियों को दिल्ली और हरियाणा के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार किया गया. सभी आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं.

मकोका के तहत अदालत किसी आरोपी को तभी जमानत दे सकती है, जब उसे यह भरोसा हो कि आरोपी के दोषी नहीं होने की बात मानने के उचित आधार हैं. इस कानून के तहत पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने के लिए सामान्य आपराधिक कानून में मिलने वाले 90 दिनों के बजाय 180 दिनों तक का समय मिलता है. इसके अलावा, पुलिस आरोपियों को ज्यादा समय तक हिरासत में रखने की मांग भी कर सकती है.

मकोका के तहत, डीसीपी रैंक के अधिकारी के सामने दर्ज कराया गया कबूलनामा अदालत में सबूत के तौर पर माना जा सकता है. सामान्य आपराधिक कानून के तहत, केवल मजिस्ट्रेट की अदालत के सामने दर्ज कराया गया कबूलनामा ही सबूत के तौर पर मान्य होता है.


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