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Thursday, 30 July, 2026
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ओडिशा में बाढ़ से तीन लोगों की मौत, पांच लाख से अधिक प्रभावित

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भुवनेश्वर/बालासोर, 29 जुलाई (भाषा) उत्तर ओडिशा में बुधवार को बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी रही। अधिकारियों के अनुसार, अग्निशमन सेवा के एक कर्मी सहित कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

राज्य सरकार ने गहरे दबाव के कारण ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के मद्देनजर महानदी नदी तंत्र में ‘मध्यम बाढ़’ की आशंका जताते हुए तैयारियां शुरू कर दी हैं।

फिलहाल दिल्ली में मौजूद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तीन मंत्रियों-सूर्यवंशी सूरज, गणेश राम सिंह खुंटिया और के. सी. महापात्र को मौके पर जाकर बाढ़ की स्थिति की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।

इससे पहले, बाढ़ प्रबंधन और राहत कार्यों की निगरानी के लिए तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को उत्तर ओडिशा भेजा गया था। अधिकारियों के अनुसार, बुधवार शाम तक 1,88,002 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर 396 राहत शिविरों में ठहराया गया। बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज और क्योंझर जिलों में बाढ़ से एक हजार से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री माझी ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘राज्य में बाढ़ की स्थिति पर मैं लगातार नजर रखे हुए हूं। तीनों मंत्रियों को प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करते हुए राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। जिला अधिकारियों को पूरी तरह सतर्क रहने और प्रत्येक प्रभावित परिवार तक सहायता पहुंचाने को कहा गया है।’’

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है और नागरिकों से स्थानीय प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।

उत्तर ओडिशा के जिले जहां बाढ़ से जूझ रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के महानदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण महानदी नदी तंत्र में जलस्तर बढ़ने से नई चिंता पैदा हो गई है।

जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता दिलीप कुमार राउत ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘महानदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश से नदी तंत्र में मध्यम बाढ़ की आशंका बढ़ गई है।’’

उन्होंने बताया कि बुधवार शाम छह बजे हीराकुंड जलाशय का जलस्तर 617.91 फुट था, जबकि इसकी पूर्ण जलभराव क्षमता 630 फुट है।

राउत ने कहा, ‘‘फिलहाल दो फाटकों से पानी छोड़ा जा रहा है और यह तब तक जारी रहेगा, जब तक जलस्तर 620 फुट तक नहीं पहुंच जाता। यदि ऊपरी क्षेत्रों से जलप्रवाह बढ़ता है तो और फाटक खोलने पड़ सकते हैं।’’

उन्होंने बताया कि बुधवार शाम छह बजे कटक के निकट मुंडली में 5.87 लाख क्यूसेक पानी बह रहा था, जो बृहस्पतिवार शाम तक बढ़कर लगभग नौ लाख क्यूसेक होने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि मुंडली में 8.5 लाख क्यूसेक से अधिक जलप्रवाह को महानदी नदी तंत्र में ‘मध्यम बाढ़’ माना जाता है और इससे डेल्टा क्षेत्र के कई हिस्से जलमग्न हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने बड़ी बाढ़ की आशंका से इनकार किया।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि तीनों मौतें क्योंझर जिले में हुईं। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के दौरान करंट लगने से अग्निशमन सेवा के एक कर्मी की मौत हो गई, जबकि एक बुजुर्ग की दीवार गिरने से जान चली गई। इसके अलावा, बाढ़ के पानी में एक बच्चे का शव मिला।

मुख्यमंत्री ने अग्निशमन सेवा के कर्मी चंदन पटनायक के निधन पर शोक व्यक्त किया।

अग्निशमन सेवा के महानिदेशक सुधांशु सारंगी ने बताया कि जलभराव वाले क्षेत्र से पानी निकालने के दौरान करंट लगने से पटनायक की मौत हुई। उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में अग्निशमन सेवा के कर्मियों ने बाढ़ग्रस्त गांवों से 212 लोगों को सुरक्षित निकाला।

अधिकारियों के अनुसार, बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज, संबलपुर और ढेंकानाल जिले बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

इसके अलावा, क्योंझर, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़, नुआपाड़ा, कालाहांडी, रायगढ़ा, गजपति और मल्कानगिरि जिलों में भी गहरे दबाव के कारण हुई भारी बारिश से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।

प्रशासन ने 1.88 लाख से अधिक विस्थापित लोगों को बहुउद्देशीय चक्रवात आश्रयों, विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों में ठहराया है।

बुधाबालंगा और जलका नदियों का पानी बालासोर के कई गांवों में घुस गया है, जबकि बैतरणी, बूढ़ा और सालंदी नदियों के उफान से भद्रक और जाजपुर जिलों के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं।

जल संसाधन विभाग के अनुसार, क्षेत्र की सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

बचाव एवं राहत कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ) और अग्निशमन सेवा की टीमें तैनात की गई हैं।

राज्य सरकार ने बाढ़ प्रबंधन और राहत कार्यों के समन्वय के लिए तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को बालासोर, भद्रक और जाजपुर जिलों में नियुक्त किया है।

पुजारी ने कहा कि सरकार महानदी के बढ़ते जलस्तर पर लगातार नजर रख रही है और बाढ़ प्रभावित जिलों में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।

इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 30 जुलाई को नुआपाड़ा, कालाहांडी, नबरंगपुर और कोरापुट जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है।

मौसम विभाग के अनुसार बृहस्पतिवार को बरगढ़, सोनपुर, बौद्ध, बलांगीर, कंधमाल, रायगढ़ा और मल्कानगिरि जिलों में भी भारी बारिश होने की आशंका है।

भाषा रवि कांत पारुल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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