नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर सहयोग का आह्वान करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर राष्ट्रीय हित एवं जन कल्याण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं लेकिन ये व्यापक जनहित के लिए मिलकर काम करने में कभी बाधा नहीं बनने चाहिए।
यहां ‘सहकारी संघवाद और कानून संबंधी सुधार: राष्ट्रीय और राज्यों के परिप्रेक्ष्य’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ‘टीम इंडिया’ की भावना के लिए परामर्श, समन्वय और साझा जिम्मेदारी की संस्कृति जरूरी है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘‘टीम इंडिया’’ का आह्वान इस बात को रेखांकित करता है कि देश के विकास के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि इसके लिए हर राज्य की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान एक ऐसा ढांचा प्रदान करता है, जिसमें विविधता देश की सामूहिक ताकत बन जाती है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद की अवधारणा पर नए सिरे से जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि 2015 में नीति आयोग की स्थापना केंद्र और राज्यों के बीच साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत बदलाव था।
विधि आयोग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी मौजूद थे।
राज्यसभा के सभापति राधाकृष्णन ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्हें देश और उसके लोगों के व्यापक हित में किए जाने वाले सामूहिक प्रयासों में बाधा नहीं बनना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ राज्यों का भौगोलिक संघ नहीं बल्कि उससे कहीं बढ़कर है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और आकांक्षाओं की एक संवैधानिक साझेदारी है।’’
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी भाषाएं, परंपराएं, संस्कृतियां, संस्थाएं और जीवन के अनुभव हमारे देश की असाधारण विविधता को दर्शाते हैं। वहीं, कानून का शासन और न्याय की हमारी साझा आकांक्षा हमें एक साझा संवैधानिक दृष्टि के तहत एकजुट करती है।’’
कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए मेघवाल ने कहा कि ‘विविधता में एकता’ भारत की सबसे बड़ी ताकत है जिसे अब लोकतंत्र की जननी के रूप में पहचाना जाता है।
उन्होंने कहा कि जनहित सर्वोपरि है और जब सरकारें मिलकर सोचती हैं और काम करती हैं, तभी लोगों की आकांक्षाएं पूरी होती हैं।
भाषा सुरभि रंजन
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