अहमदाबाद, 21 अक्टूबर (भाषा) गुजरात सरकार ने बुधवार को उच्च न्यायालय से कहा कि व्यापार करने के अधिकार का मतलब यह नहीं है कि किसी तीर्थ स्थल के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्वरूप की अनदेखी की जाए।
राज्य सरकार ने यह दलील उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दी, जिसमें भगवान शिव को समर्पित प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे में मांसाहार की बिक्री और भंडारण पर रोक लगाने संबंधी सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी गई है।
सरकार की ओर से पेश वकील जी एच वर्क ने प्रतिबंध का समर्थन करते हुए न्यायमूर्ति निशा एम ठाकोर की पीठ से कहा कि सोमनाथ को केवल एक व्यावसायिक शहर के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि ऐसा करने से देशभर के करोड़ों हिंदुओं के लिए इसके असाधारण धार्मिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व की अनदेखी हो जाएगी।
उन्होंने दलील दी कि कोई भी व्यक्ति मंदिर के दरवाजे पर या लाखों हिंदू श्रद्धालुओं की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले पवित्र मार्गों पर मांसाहारी भोजन बेचने के पूर्ण मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकता।
गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में स्थित सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे में मांसाहारी भोजन की बिक्री पर राज्य सरकार की ओर से दो महीने पहले लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को छह रेस्तरां मालिकों ने चुनौती दी है।
भाषा पारुल राजकुमार
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