प्रयागराज (उप्र), 16 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि उप्र राजस्व संहिता की धाराओं 154 और 157-ए का यदि कोई उल्लंघन होता है तो उप जिलाधिकारी (एसडीएम) कृषि भूमि के किसी सौदे को शून्य घोषित करने का सक्षम अधिकारी है और जिला मजिस्ट्रेट के पास इस संबंध में कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अरुण कुमार ने संत कबीर नगर के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश और बस्ती मंडल के आयुक्त द्वारा इसकी पुष्टि को दरकिनार कर दिया जिसमें एक सोसाइटी के पक्ष में जमीन की बिक्री का विलेख शून्य घोषित कर दिया गया था।
उस सोसाइटी ने खलीलाबाद में खरीदी गई जमीन पर अल-हुदा मदरसा का निर्माण कराया था और चूंकि जमीन के सौदे के समय सोसाइटी का चेयरमैन समशुल हुदा खान विदेशी नागरिक था, इसलिए जमीन का सौदा शून्य घोषित कर दिया गया था।
बिक्री विलेख को शून्य घोषित करते हुए जिला मजिस्ट्रेट और मंडलायुक्त दोनों ने संपूर्ण संपत्ति राज्य में निहित करने का निर्देश दिया था।
‘कुलियातुल बनतीर रजविया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी’ की रिट याचिका शुक्रवार को स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि उप्र भूमि राजस्व अधिनियम को आसान भाषा में पढ़ने पर यह स्पष्ट है कि यह कानून कलेक्टर (डीएम) को धाराओं 154 या 157-ए का उल्लंघन किए जाने पर एक सौदे को शून्य घोषित करने का अधिकार नहीं देता।
अदालत ने कहा कि यह अधिकार केवल एसडीएम में निहित है जिसे जिला मजिस्ट्रेट के सभी या किसी कार्य को करने के लिए राज्य सरकार द्वारा अधिकृत किया जा सकता है। लेकिन जिला मजिस्ट्रेट को एसडीएम के अधिकार का प्रयोग करने की अनुमति नहीं है।
भाषा सं राजेंद्र
राजकुमार
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