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Wednesday, 7 October, 2026
होमदेशन्यायालय ने दिव्यांग अधिकारी कैडेटों के मामले में आदेश का पालन न करने पर केंद्र को फटकार लगाई

न्यायालय ने दिव्यांग अधिकारी कैडेटों के मामले में आदेश का पालन न करने पर केंद्र को फटकार लगाई

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नयी दिल्ली, सात अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने प्रशिक्षण के दौरान हुई किसी भी दिव्यांगता के कारण सेवा के लिए अयोग्य हुए सैन्य अधिकारी कैडेटों के कल्याण से जुड़े उपायों पर पुनर्विचार करने के अपने निर्देश का पालन नहीं करने पर बुधवार को केंद्र सरकार को फटकार लगाई।

न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना, न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति डीके उपाध्याय की पीठ प्रशिक्षण के दौरान चोट लगने या दिव्यांग होने के कारण सैन्य प्रशिक्षण से बाहर किए गए कैडेटों की परेशानियों से संबंधित स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि चार अगस्त 2026 को दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद 2015 की सभरवाल समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों पर वास्तव में पुनर्विचार नहीं किया गया।

साल 2015 में सेवा और पेंशन से जुड़े मामलों, संभावित विवादों, मुकदमों को कम करने और शिकायतों के समाधान से संबंधित संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभरवाल समिति का गठन किया गया था।

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने मौखिक रूप से कहा, ‘‘आप अदालत के प्रति इस तरह का रवैया क्यों दिखा रहे हैं? आप कहते हैं कि हमने 2022 में इसका निपटारा कर दिया और मामला वहीं खत्म हो गया। विभाग का यह कैसा रवैया है?’’

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में केवल 2022 में हुई बैठकों और उन पुराने फैसलों का उल्लेख किया गया है, जिनमें प्रशिक्षण से बाहर किए गए अधिकारी कैडेटों को दिव्यांगता पेंशन और पूर्व सैनिक का दर्जा देने से इनकार किया गया था।

अदालत ने कहा कि इसमें ऐसा ‘‘एक शब्द भी नहीं’’ है, जिससे यह पता चले कि चार अगस्त को अदालत के दिए गए निर्देश के अनुसार सभरवाल समिति की सिफारिशों पर दोबारा विचार किया गया।

पीठ ने कहा, ‘‘केंद्र की ओर से केवल यह बताया गया है कि 2022 में बैठकें हुई थीं। इसके अलावा संबंधित निर्णय के बारे में दोबारा जानकारी दी गई है। यह पूरी तरह स्पष्ट है कि प्रतिवादी ने रिपोर्ट पर दोबारा विचार नहीं किया।’’

इसने कहा, ‘‘प्रतिवादी विभागों के खिलाफ कोई और फैसला लेने से पहले, हम उन्हें अपने उपरोक्त निर्देश का पालन करने का अवसर देते हैं।’’

सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सामान्य भर्ती वाले सैनिकों को प्रशिक्षण से बाहर किए जाने पर दिव्यांगता पेंशन और अन्य लाभ मिलते हैं, जबकि अधिकारी कैडेटों को इसी तरह का लाभ नहीं दिया जाता।

इस मामले में न्याय मित्र के रूप में सहायता कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता रेखा पाली ने बताया कि पिछले कई वर्षों में ऐसे लगभग 400 अधिकारी कैडेट रहे हैं।

मामले पर अगली सुनवाई सुनवाई 30 नवंबर को होगी।

भाषा जोहेब नेत्रपाल

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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