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Monday, 26 October, 2026
होमदेशअदालत ने मस्जिद परिसर में जैन तीर्थंकर की मूर्ति मिलने के दावे संबंधी याचिका पर नोटिस जारी किया

अदालत ने मस्जिद परिसर में जैन तीर्थंकर की मूर्ति मिलने के दावे संबंधी याचिका पर नोटिस जारी किया

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अहमदाबाद, 26 अक्टूबर (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने भरूच की जामी मस्जिद के मूल रूप से जैन धार्मिक स्थल होने के दावे और वहां पूजा करने की अनुमति देने के अनुरोध संबंधी याचिका पर सोमवार को राज्य, केंद्र सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) तथा मस्जिद प्रबंधन से जवाब मांगा।

याचिका में अदालत से एएसआई की केंद्र संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल ‘14वीं सदी’ की जामी मस्जिद को ‘अश्वबोध तीर्थ शाकुणिक विहार’ घोषित करने और जैन समुदाय को स्मारक के भीतर कथित तौर पर मिली भगवान मल्लिनाथ की प्रतिमा की पूजा करने की अनुमति देने संबंधी निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

याचिका में अंतरिम निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि स्मारक में कथित तौर पर मौजूद जैन पूजा से जुड़े चिह्नों, प्रतीकों, पुरावशेषों, मूर्तियों और अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को सील कर सुरक्षित रखा जाए।

न्यायमूर्ति देवन एम. देसाई की एकल पीठ ने गुजरात और केंद्र सरकार, एएसआई, भरूच के जिलाधिकारी तथा जामी मस्जिद के प्रबंधन को नोटिस जारी कर दो नवंबर तक जवाब मांगा है।

प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत जामी मस्जिद एएसआई का संरक्षित स्मारक है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि कानून के तहत किसी स्मारक के मूल स्वरूप में बदलाव नहीं किया जा सकता। उन्होंने 19वें जैन तीर्थंकर भगवान मल्लिनाथ की प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई है।

याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय को बताया है कि जामी मस्जिद परिसर में रखी प्रतिमा को नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका है।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के भोजशाला मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 19वें जैन तीर्थंकर मल्लिनाथ की प्रतिमा स्मारक परिसर में रखी गई है, जहां की मूर्तियों और पुरावशेषों को नुकसान पहुंचाया गया है।

भाषा आशीष माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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