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Saturday, 7 November, 2026
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दिल्ली के बाहर के गैर बीएस-6 मानक वाले वाहनों पर नवंबर-जनवरी में हर साल प्रतिबंध लागू रहेगा

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नयी दिल्ली, सात नवंबर (भाषा) दिल्ली सरकार ने शनिवार को कहा कि वह अन्य राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में पंजीकृत बीएस-6 उत्सर्जन मानकों से नीचे के वाहनों पर हर साल एक नवंबर से 31 जनवरी के बीच प्रतिबंध लागू करेगी।

सरकार ने सर्दियों के मौसम के लिए अपनी कार्य योजना के तहत, इस साल की उक्त अवधि के लिए दिल्ली के बाहर पंजीकृत ऐसे मोटर वाहनों के परिचालन प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है, जो बीएस-6 उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते। इस अवधि के दौरान शहर में वायु प्रदूषण सबसे अधिक होता है और हवा की गुणवत्ता सबसे खराब रहती है। इस कदम का उद्देश्य वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को सीमित करना और सड़कों पर उड़ने वाली धूल को कम करना है।

दिल्ली परिवहन विभाग की ओर से शनिवार को जारी एक सार्वजनिक अधिसूचना के अनुसार, ‘‘हर साल एक नवंबर से 31 जनवरी तक, दूसरे राज्यों में पंजीकृत बीएस-6 और उससे नीचे के वाहनों को दिल्ली में परिचालित करने की अनुमति नहीं होगी।’’

अधिसूचना के अनुसार, एक नवंबर 2026 से, बीएस-6 और उससे नीचे के वाणिज्यिक मालवाहक वाहनों (जिनमें बड़े, मध्यम और भारी मालवाहक वाहन शामिल हैं) और बसों को दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। इसमें ‘ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट’ और अन्य व्यवस्थाओं के तहत चलने वाली बसें भी शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार, परिवहन विभाग ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रमुख प्रवेश स्थलों, टोल प्लाजा और अत्यधिक प्रदूषण वाले स्थानों पर लगभग 250 प्रवर्तन कर्मियों को तैनात किया है, ताकि तय मानकों का पालन न करने वाले वाहनों पर सख्ती से रोक लगाई जा सके।

उन्होंने बताया कि डीएनडी, रजोकरी-राष्ट्रीय राजमार्ग 48, गाजीपुर, सिंघू बॉर्डर, टीकरी, बदरपुर और अन्य प्रमुख टोल प्लाजा पर कर्मियों की तैनाती की गई है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।

एक अधिकारी ने बताया, ‘‘परिवहन विभाग ने पंजाब, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों को भी पत्र लिखा है, जिसमें उनसे इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने या डीजल वाहनों को बीएस-6 मानकों में बदलने का आग्रह किया गया है।’’

हवा की गुणवत्ता खराब होने के कारण, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर में चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (ग्रैप) के तहत तीसरे चरण के आपातकालीन उपाय लागू कर दिए हैं, ताकि प्रदूषण की स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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