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Saturday, 7 November, 2026
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कर्नाटक ने लगाया E20 पेट्रोल में जरूरत से ज्यादा इथेनॉल का आरोप, तेल कंपनियों ने जांच पर उठाए सवाल

IOCL, BPCL और HPCL का कहना है कि 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जांचे गए 893 नमूने (जिनमें कर्नाटक के 56 नमूने भी शामिल हैं) E20 मानकों के अनुरूप पाए गए; उन्होंने राज्यों द्वारा एकत्र किए गए नमूनों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है.

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नई दिल्ली/बेंगलुरु: पेट्रोल में तय सीमा से ज्यादा एथेनॉल मिलाने के आरोपों को लेकर शुक्रवार को कर्नाटक सरकार और तीन सरकारी तेल कंपनियों के बीच टकराव हो गया. राज्य के मंत्री रिजवान अरशद ने कहा था कि जांच में कुछ पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले ईंधन में एथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत तक पाई गई है. यह तय E20 स्तर (80 प्रतिशत पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाना) से काफी ज्यादा है.

अरशद के आरोपों के कुछ घंटे बाद इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने संयुक्त बयान जारी कर इन नतीजों को खारिज कर दिया. उन्होंने कर्नाटक सरकार की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए.

राज्य सरकार ने बेंगलुरु, कोलार, चिक्कबल्लापुर, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु समेत सात जिलों से पेट्रोल के 63 नमूने लिए थे. इनकी जांच बेंगलुरु के श्रीराम रिसर्च इंस्टीट्यूट में की गई. अरशद ने कहा कि जांच में IOCL के एक नमूने में एथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत और HPCL के एक नमूने में 30.5 प्रतिशत पाई गई. बाकी नमूनों में यह मात्रा 25.5 प्रतिशत से 27 प्रतिशत के बीच थी.

कर्नाटक सरकार में खाद्य और नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता मामलों का विभाग संभाल रहे अरशद ने E20 में एथेनॉल मिलाने का विरोध कर रहे वाहन निर्माताओं और बीमा कंपनियों के पुराने बयानों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को कम से कम 62,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने वाला है. उन्होंने यह अनुमान वाहन निर्माताओं और बीमा कंपनियों के हवाले से दिया.

अरशद ने कहा, “अगर हम मान लें कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से गाड़ियों का माइलेज 10 प्रतिशत कम होता है, तो अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 तक के औसत आंकड़ों को देखें. इस दौरान 46 मिलियन टन ईंधन बेचा गया. ऐसे में उपभोक्ताओं को हर साल 62,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है. यह हिसाब पेट्रोल की औसत कीमत 100 से 110 रुपये प्रति लीटर मानकर लगाया गया है.”

उन्होंने कहा कि अगर देश में 35 करोड़ गाड़ियों में E20 की वजह से सर्विसिंग का औसत खर्च 2,000 से 3,000 रुपये आता है, तो उपभोक्ताओं को हर साल करीब 39,000 से 40,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मांग है कि केंद्र सरकार सार्वजनिक रूप से साफ करे कि उपभोक्ताओं को असल में कितनी मात्रा में एथेनॉल मिला पेट्रोल दिया जा रहा है.

कर्नाटक सरकार ने यह भी मांग की है कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर यह बताना अनिवार्य किया जाए कि पेट्रोल में एथेनॉल की कितनी मात्रा मिली है. इससे उपभोक्ता उपलब्ध अलग-अलग मिश्रणों में से अपनी पसंद का पेट्रोल चुन सकेंगे.

तेल कंपनियों ने कर्नाटक के नतीजों पर उठाए सवाल

तीनों तेल कंपनियों ने अपने बयान में कहा कि तय प्रक्रिया के तहत की गई जांच से इन आरोपों की पुष्टि नहीं होती.

उन्होंने कहा कि अक्टूबर में कर्नाटक सरकार की ओर से नमूने लेने की प्रक्रिया में तेल कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल नहीं थे. कंपनियों ने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार से मांग करने के बावजूद उन्हें सुरक्षित रखे गए नमूने, जांच किए गए पेट्रोल पंपों की पूरी जानकारी और लैब की रिपोर्ट नहीं मिली हैं.

तेल कंपनियों ने कहा कि तय प्रक्रिया के तहत जांच के दौरान पेट्रोल के छह नमूने लिए जाने चाहिए, जिनमें से हर एक एक लीटर का होना चाहिए. इनमें से दो नमूने पेट्रोल पंप के डीलर को दिए जाते हैं, दो तेल कंपनी या विभाग अपने पास रखता है और दो जांच के लिए अधिकृत लैब में भेजे जाते हैं.

बयान में तीसरी पार्टी की लैब के नतीजों पर भी सवाल उठाए गए. कंपनियों ने कहा कि इन रिपोर्टों में इतनी जानकारी नहीं है कि एथेनॉल की मात्रा की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सके.

तेल कंपनियों ने कहा कि सितंबर में पहले की गई जांच के दौरान लिए गए नमूनों को उनकी तय लैब में भेजा गया था और उनकी जांच भी की गई थी.

बयान में कहा गया, “तीनों तेल कंपनियों की ओर से देशभर में, कर्नाटक समेत, सप्लाई किया जा रहा E20 पेट्रोल IS 17021 के मानकों के मुताबिक है. यह एथेनॉल मिले पेट्रोल के लिए भारतीय मानक ब्यूरो का तय मानक है.”

कंपनियों ने 893 नमूनों की जांच का दिया हवाला

अपनी बात के समर्थन में तीनों तेल कंपनियों ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत आने वाले सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी (CHT) के साथ मिलकर ईंधन की गुणवत्ता की अलग से जांच की.

बयान के मुताबिक, 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेल कंपनियों के डिपो और पेट्रोल पंपों से लिए गए 893 नमूनों की जांच की गई. सभी नमूनों में एथेनॉल की मात्रा तय सीमा यानी 19 से 21 प्रतिशत के बीच पाई गई.

इनमें से 56 नमूने कर्नाटक के अलग-अलग इलाकों और तीनों कंपनियों के पेट्रोल पंपों से लिए गए थे. इनमें एथेनॉल की मात्रा 19 से 20 प्रतिशत के बीच थी और इसका औसत 19.30 प्रतिशत था.

कंपनियों ने एथेनॉल की ज्यादा मात्रा मिलाने से उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर कर्नाटक सरकार के अनुमानों पर भी सवाल उठाए. राज्य सरकार ने अनुमान लगाया है कि माइलेज कम होने से हर साल करीब 62,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा और गाड़ियों की मरम्मत पर 39,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इस तरह कुल अनुमानित बोझ करीब 1.01 लाख करोड़ रुपये होगा.

कंपनियों ने अगस्त 2025 में जारी पेट्रोलियम मंत्रालय के एक आकलन का हवाला देते हुए कहा कि E20 ईंधन के लिए बनाई गई गाड़ियों का माइलेज करीब 1 से 2 प्रतिशत तक कम हो सकता है. वहीं, कुछ दूसरी गाड़ियों में यह कमी 3 से 6 प्रतिशत तक हो सकती है. यह गाड़ी की श्रेणी और उसके कैलिब्रेशन पर निर्भर करता है.

बयान में यह भी कहा गया कि रिफाइनरी और डिपो में एथेनॉल मिलाने का काम ऑटोमेटेड और नियंत्रित सिस्टम के जरिए होता है. कंपनियों ने इस आरोप को भी खारिज किया कि उन्हें तय सीमा से ज्यादा एथेनॉल मिलाने का कोई कारोबारी फायदा है. उन्होंने कहा कि ज्यादा एथेनॉल खरीदने से उनकी लागत बढ़ेगी.

भारत में एथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और किसानों को मदद देने के मकसद से शुरू किया गया है. तेल कंपनियों ने कहा कि 2014-15 के एथेनॉल सप्लाई वर्ष से इस कार्यक्रम के जरिए 1.97 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई गई है.

तीनों कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से नमूने लेने से जुड़े सभी रिकॉर्ड और लैब की रिपोर्ट साझा करने को कहा है. उन्होंने सुरक्षित रखे गए नमूनों की जांच की अनुमति भी मांगी है. यह जांच राज्य सरकार और तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में स्वतंत्र रूप से की जाएगी.

तेल कंपनियों ने कहा कि वे राज्य सरकार के साथ मिलकर नमूने लेने और उनकी जांच करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने यह भी कहा कि तय प्रक्रिया के तहत अगर कोई गड़बड़ी साबित होती है, तो लागू दिशा-निर्देशों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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