चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने शुक्रवार को अरुण कुमार गुप्ता को हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) का अध्यक्ष नियुक्त किया. गुप्ता पांच हफ्ते पहले तक मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रधान सचिव थे.
1992 बैच के सेवानिवृत्त IAS अधिकारी गुप्ता ऐसे समय में आयोग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए एक निजी कंपनी को लाइसेंस देने के मुद्दे पर आयोग और राज्य सरकार के बीच तीखा विवाद चल रहा है.
नियुक्ति का आदेश शुक्रवार को ऊर्जा विभाग की आयुक्त और सचिव अशिमा बरार ने जारी किया. यह आदेश बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 82 और 89 के तहत जारी किया गया है. ये धाराएं नियामक आयोगों के गठन और उनके सदस्यों के कार्यकाल और सेवा शर्तों से जुड़ी हैं.
गुप्ता का कार्यकाल पद की शपथ लेने की तारीख से पांच साल या 65 साल की उम्र पूरी होने तक रहेगा. इनमें से जो भी पहले होगा, वही लागू होगा. उनकी नियुक्ति बिजली अधिनियम और हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (अध्यक्ष और सदस्य की सेवा शर्तें) नियम, 1998 के तहत होगी.
हरियाणा कैडर के अधिकारी गुप्ता 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हुए थे. तब तक वह मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव थे. इसके साथ ही उनके पास अतिरिक्त मुख्य सचिव के तौर पर वित्त और योजना विभाग का भी प्रभार था.
सैनी ने नवंबर 2024 में उन्हें प्रधान सचिव नियुक्त किया था. उन्होंने वी. उमाशंकर की जगह ली थी, जो केंद्र सरकार में चले गए थे. इससे पहले गुप्ता नगर एवं ग्राम नियोजन और शहरी संपदा विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव थे. इसके साथ ही वह उद्योग और वाणिज्य विभाग का काम भी देख रहे थे.
मुख्यमंत्री कार्यालय में उन्हें नागरिक उड्डयन, पर्यावरण एवं वन, सामाजिक न्याय और शहरी स्थानीय निकायों समेत 11 विभागों का प्रभार दिया गया था.
गुप्ता श्रम विभाग में आयुक्त और सचिव के तौर पर भी काम कर चुके हैं. चंडीगढ़ में 2018 से अंतर-कैडर प्रतिनियुक्ति पर वह केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन में प्रधान सचिव (गृह) के पद पर तैनात थे. उनकी तीन साल की प्रतिनियुक्ति मई 2021 में खत्म हो गई थी. लेकिन कोविड के मामले बढ़ने के कारण केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने तीन महीने का सेवा विस्तार मांगा था. आखिरकार उन्हें 31 अगस्त 2021 को कार्यमुक्त किया गया.
राज्य सरकार की ओर से सेवा विस्तार दिलाने की कोशिशों के बावजूद गुप्ता सेवानिवृत्त हो गए. सितंबर में हरियाणा ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर गुप्ता की सेवा एक साल बढ़ाने की मांग की थी. केंद्र ने यह मांग खारिज कर दी और वह 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो गए. तब से मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव का पद खाली है. राज्य सरकार ने केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे चार IAS अधिकारियों को भी वापस बुलाने की मांग की है.
HERC के अध्यक्ष का पद 23 जुलाई 2026 को नंद लाल शर्मा के निधन के बाद खाली हुआ था. शर्मा 2023 से आयोग का नेतृत्व कर रहे थे और पद पर रहते हुए उनका निधन हो गया. इसके बाद आयोग के सदस्य (कानूनी) मुकेश गर्ग को अध्यक्ष के कामकाज की जिम्मेदारी दी गई थी. तब से वह सदस्य शिव कुमार के साथ कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे थे. आयोग में कुल तीन पद हैं. एक अध्यक्ष और दो सदस्य.
HERC बनाम हरियाणा सरकार
आयोग से जुड़ा विवाद उसके कार्यवाहक नेतृत्व के एक आदेश से शुरू हुआ. 19 अक्टूबर को HERC ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण का लाइसेंस दिया था. इस कंपनी को राज्य के स्वामित्व वाली दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के साथ बिजली की आपूर्ति करनी थी.
इस फैसले के बाद बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. वे बिजली वितरण में निजी कंपनी के आने के खिलाफ थे. कर्मचारियों ने 22 अक्टूबर से तीन दिन की हड़ताल की, जिससे राज्य के कई इलाकों में बिजली गुल हो गई. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के यह भरोसा दिलाने के बाद हड़ताल खत्म हुई कि निजी कंपनियों को बिजली वितरण की अनुमति नहीं दी जाएगी.
26 अक्टूबर को ऊर्जा विभाग ने बिजली अधिनियम की धारा 108(1) का इस्तेमाल करते हुए HERC को निर्देश दिया कि वह राज्य में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण के लाइसेंस न तो बनाए और न ही उन्हें लागू करे. धारा 108(2) के तहत किसी मामले में जनहित से जुड़ी नीति शामिल है या नहीं, इस पर राज्य सरकार का फैसला अंतिम होता है.
HERC ने 28 अक्टूबर को जवाब दिया कि सरकार के निर्देश लागू रहने तक वह इलेवन पावर की याचिका पर आगे कार्रवाई नहीं करेगा. हालांकि, आयोग ने लाइसेंस रद्द नहीं किया. इलेवन पावर ने कहा है कि वह कानूनी रास्ता अपनाएगी.
इस बीच, राज्य की बिजली वितरण कंपनियों ने आयोग के फैसले पर फिर से विचार करने की मांग की है. DHBVN और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने 3 नवंबर को संयुक्त रूप से पुनर्विचार याचिका दायर की. इसमें 19 अक्टूबर के आदेश पर दोबारा विचार करने की मांग की गई है.
बिजली वितरण कंपनियों ने दलील दी है कि HERC ने कंपनी के अपने निवेश अनुमानों पर भरोसा किया. उन्होंने इलेवन पावर की वित्तीय क्षमता और उसके शेयरों के मालिकाना हक पर भी सवाल उठाए हैं. इंजीनियरों के संगठनों ने बिजली के लिए अपीलीय न्यायाधिकरण के सामने कैविएट दायर की हैं.
इस तरह गुप्ता ऐसे आयोग की जिम्मेदारी संभालेंगे, जिसके उसी आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की गई है, जिसकी वजह से राज्य सरकार के साथ उसका टकराव शुरू हुआ था.
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