नई दिल्ली: मणिपुर के सेनापति जिले में मंगलवार देर रात तनाव बढ़ गया. अधिकारियों के मुताबिक, NSCN (IM) के हथियारबंद कैडरों की तलाश में इलाके में चलाए गए सर्च ऑपरेशन के कुछ घंटों बाद एक भीड़ ने असम राइफल्स के कैंप पर पथराव किया, तोड़फोड़ की और कई वाहनों में आग लगा दी.
NSCN-IM यानी नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम (इसाक-मुइवा) एक नागा राष्ट्रवादी और उग्रवादी संगठन है, जो पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय है. यह संगठन 1997 से भारत सरकार के साथ युद्धविराम समझौते के तहत है.
मंगलवार की यह घटना 6 जुलाई को उखरूल जिले में घात लगाकर किए गए हमले में असम राइफल्स के दो जवानों की हत्या और 13 जुलाई को नागालैंड के चुमौकेदिमा जिले में संदिग्ध IED विस्फोट में एक असम राइफल्स जवान की मौत के बाद हुई है. दूसरी घटना में चार अन्य जवान घायल हुए थे.
रक्षा सूत्र ने दिप्रिंट को बताया कि 14 और 15 जुलाई की रात सेनापति जिले में भीड़ ने असम राइफल्स के कैंप पर पथराव किया, आगजनी की और तोड़फोड़ की.
सूत्र ने कहा, “मकुइलोंगडी इलाके में हथियारबंद कैडरों की मौजूदगी की विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिलने के बाद असम राइफल्स ने इलाके में गश्त और सर्च ऑपरेशन शुरू किया. यह इलाका ओकलोंग स्थित NSCN (IM) के निर्धारित कैंप से करीब दो किलोमीटर पश्चिम में है.”
उन्होंने बताया कि खुफिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट से यह जानकारी मिली थी कि हथियारबंद कैडर तय किए गए कैंपों से बाहर घूम रहे हैं. यह भी माना गया कि उनके पास हथियार थे और वे वर्दी पहने हुए थे, जो युद्धविराम के तय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन था.
इसी दौरान युद्धविराम निगरानी समूह (Ceasefire Monitoring Group) को भी इन कथित उल्लंघनों की औपचारिक जानकारी दी गई और सुरक्षा संबंधी चिंताओं से अवगत कराया गया.
सूत्र के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान मकुइलोंगडी और ओकलोंग गांवों की ओर बढ़ रही असम राइफल्स की टुकड़ियों को स्थानीय लोगों ने, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, रोक दिया.
उन्होंने कहा, “असम राइफल्स की टुकड़ियों ने पूरी तरह संयम बरता और स्थानीय प्रतिनिधियों से बातचीत की. उन्हें भरोसा दिलाया गया कि यह अभियान सिर्फ इलाके की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए है और प्रशासन की अनुमति के बिना कोई भी जवान गांव में प्रवेश नहीं करेगा.”
तनाव बढ़ने के बीच रात करीब 9 बजे खबर मिली कि सेनापति शहर में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो रहे हैं और असम राइफल्स कैंप की ओर मार्च करने की तैयारी कर रहे हैं.
सूत्र के अनुसार, सर्च ऑपरेशन में लगी टुकड़ियों के वापस लौटने के बावजूद रात करीब 9:30 बजे बड़ी भीड़ कैंप तक पहुंच गई और “पथराव किया, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और आग लगाने की कोशिश की.”
मणिपुर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि भीड़ को तितर-बितर करने और हालात बिगड़ने से रोकने के लिए “न्यूनतम बल” का इस्तेमाल किया गया. भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) को भी मौके पर तैनात किया गया.
रक्षा सूत्र ने बताया, “सुरक्षा बलों ने हवा में फायरिंग की और आंसू गैस के गोले छोड़े.”
इसके बाद भीड़ के एक हिस्से ने कथित तौर पर असम राइफल्स के वाहनों में तोड़फोड़ की और उन्हें नुकसान पहुंचाया.
सूत्र ने कहा, “एक हल्के वाहन में आग लगा दी गई. दो ट्रकों को पलटकर नुकसान पहुंचाया गया. हिंसा के दौरान एक निजी कार भी जला दी गई.”
सुरक्षा बलों ने आखिरकार हालात पर काबू पा लिया और आधी रात तक पूरी भीड़ को वहां से हटा दिया. इस घटना में न तो किसी स्थानीय व्यक्ति और न ही किसी सुरक्षा कर्मी को चोट आई है.
‘नागा समुदाय मानसिक तनाव से गुजर रहा है’
नागा पीपुल्स नेटवर्क फोरम, जो नागालैंड, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और अन्य जगहों के नागा नागरिकों, जनजातियों और पेशेवरों का एक स्वतंत्र और स्वैच्छिक मंच है, उसके एक सदस्य ने ThePrint को बताया कि उखरूल और चुमौकेदिमा की घटनाओं के बाद से सुरक्षा बलों और नागा समुदाय के बीच तनाव बना हुआ है.
उन्होंने कहा, “इन हमलों के पीछे नागाओं का हाथ होने के आरोप लगाए गए. लेकिन अब तक यह साबित नहीं हुआ है कि इन हमलों के लिए कौन जिम्मेदार था.” उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल नागा बहुल इलाकों के हर कोने में जाकर तलाशी अभियान चला रहे हैं.
उन्होंने कहा, “2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से नागा समुदाय तटस्थ रहा है. हम तब भी तटस्थ रहे, जब हमारे नागा भाइयों की हत्या हुई थी, जिनमें लेलोन वैफेई गांव के छह नागा भाई भी शामिल थे.”
उनके मुताबिक, जिन लोगों की मौत हुई, उनके परिवार और नागा समुदाय के लोग “बेचैन हो जाते हैं, जब सुरक्षा बल उनके गांवों में प्रवेश करते हैं.”
उन्होंने कहा, “वे अपनी सुरक्षा खुद करने की कोशिश कर रहे हैं. वे 24 घंटे निगरानी रखते हैं. बंकरों में रहते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई अजनबी गांव में न आए.”
उन्होंने कहा, “हर बार जब सुरक्षा बल बड़ी संख्या में गांवों में जाकर जांच करते हैं, तो लोग बेचैन हो जाते हैं. इसलिए मंगलवार रात भी भीड़ की प्रतिक्रिया कुछ ऐसी ही थी. वे मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं.”
रक्षा सूत्र ने कहा कि नागरिक समाज संगठनों और जिला प्रशासन के साथ मिलकर लोगों की चिंताओं को दूर करने और सामुदायिक सौहार्द बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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