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Wednesday, 4 November, 2026
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तमिलनाडु के GST राजस्व में सिर्फ 3% की बढ़ोतरी, DMK ने लगाया आरोप— ‘TVK राज में आर्थिक विकास ठप’

फाइनेंस मिनिस्ट्री के डेटा से पता चलता है कि TN, आंध्र जैसे पड़ोसी राज्यों से पीछे है, जहां GST रेवेन्यू ग्रोथ 24% है, केरल में 23%, कर्नाटक में 18%, तेलंगाना में 14% और महाराष्ट्र में 13% है.

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चेन्नई: तमिलनाडु में अक्टूबर में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) के कुल संग्रह में सालाना आधार पर सिर्फ 3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह बढ़कर 11,661 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 11,298 करोड़ रुपये था. वहीं, इसी अवधि में भारत का कुल जीएसटी राजस्व 22.9 फीसदी बढ़कर 2.31 लाख करोड़ रुपये के मजबूत स्तर पर पहुंच गया.

केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जीएसटी राजस्व में बढ़ोतरी के मामले में तमिलनाडु पड़ोसी राज्यों से पीछे रहा. आंध्र प्रदेश में जीएसटी राजस्व 24 फीसदी, केरल में 23 फीसदी, कर्नाटक में 18 फीसदी, तेलंगाना में 14 फीसदी और महाराष्ट्र में 13 फीसदी बढ़ा. देश में घरेलू जीएसटी संग्रह में 15.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि आयात से मिलने वाले राजस्व में 42.2 फीसदी का उछाल आया. इसी वजह से कुल जीएसटी राजस्व में इतनी बढ़ोतरी दर्ज की गई.

बड़े राज्यों में तमिलनाडु का प्रदर्शन सबसे कमजोर राज्यों में शामिल रहा.

विपक्षी नेताओं का कहना है कि तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार के शासन में राज्य की आर्थिक वृद्धि कमजोर हुई है. द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने लिखा कि तमिलनाडु में जीएसटी की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे गिर गई है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “TVK के शासन में तमिलनाडु की आर्थिक विकास पूरी तरह ठप हो गया है.”

पूर्व मंत्री और DMK नेता थंगम थेन्नारासु ने पड़ोसी राज्यों के साथ अंतर को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि इससे पहले अगस्त में तमिलनाडु के जीएसटी राजस्व में 1 फीसदी और सितंबर में 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. उन्होंने कहा, “यह चिंता की बात है कि कभी भारत के आर्थिक रूप से सबसे आगे रहने वाले राज्यों में शामिल तमिलनाडु में TVK सरकार के शासन में लगातार गिरावट देखी जा रही है.”

उन्होंने कहा कि कुल कर राजस्व में बढ़ोतरी केवल आयात से जुड़े करों से हो रही है, न कि राज्य में अपने स्तर पर होने वाले उत्पादन से मिलने वाले करों से. उन्होंने आगे कहा, “जब हम पड़ोसी राज्यों के राजस्व में बढ़ोतरी की तुलना करते हैं, तो यह साफ है कि हम काफी पीछे हैं. सरकार को राज्य में उत्पादन और बिक्री बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि आर्थिक सुधार और रोजगार के अवसर पैदा हो सकें. किसी घाव पर पर्दा डालने की कोशिश करने के बजाय उसका इलाज करना चाहिए, क्योंकि उससे कोई फायदा नहीं होगा.”

बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने कहा कि कई महीनों तक गिरावट के बाद त्योहारों के मौसम, स्कूलों की लंबी छुट्टियों और पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बावजूद जीएसटी संग्रह में एक अंक की वृद्धि पर्याप्त नहीं है. उन्होंने सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं और टिकाऊ राजस्व जुटाने की उसकी क्षमता पर सवाल उठाए.

वित्त मंत्री मैरी विल्सन ने आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि जीएसटी का कुल संग्रह राज्य के वास्तविक राजस्व को सही तरीके से नहीं दिखाता. उन्होंने मंगलवार को मीडिया से कहा कि अक्टूबर में जीएसटी की वृद्धि दर नकारात्मक से बढ़कर 3.2 फीसदी हो गई है. वहीं, राज्यों के बीच राजस्व का बंटवारा होने के बाद राज्य के पास बचने वाले राजस्व में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने इस सुधार का श्रेय मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व में की गई नीतिगत पहलों को दिया और विपक्ष पर केवल नकारात्मक बातें करने का आरोप लगाया.

वाणिज्यिक कर और पंजीकरण मंत्री डी. लोगेश तमिलसेल्वन ने कहा कि तमिलनाडु के जीएसटी राजस्व में, IGST के बंटवारे के बाद राज्य के पास वास्तव में बचने वाली राशि के आधार पर, चालू वित्त वर्ष में अक्टूबर तक 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. अकेले अक्टूबर में इसमें 8 फीसदी का इजाफा हुआ.

उन्होंने बताया कि जीएसटी के कुल संग्रह में SGST, CGST और IGST शामिल होते हैं. लेकिन राज्य में जमा हुआ पूरा IGST तमिलनाडु का नहीं होता, क्योंकि बाद में इसे अलग-अलग राज्यों के बीच बांटा जाता है. मंत्री ने कहा, “केवल जीएसटी के कुल संग्रह के आधार पर तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था का आकलन करना सही तरीका नहीं है.” उन्होंने सितंबर 2025 में लागू जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने के फैसले के असर का भी जिक्र किया. इसके तहत कई वस्तुओं पर जीएसटी की दरें घटाई गई थीं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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