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Wednesday, 4 November, 2026
होमदेश'10% माओवादी मारे गए, 90% ने किया आत्मसमर्पण': छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस समारोह में अमित शाह का दावा

‘10% माओवादी मारे गए, 90% ने किया आत्मसमर्पण’: छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस समारोह में अमित शाह का दावा

गृह मंत्री ने कहा कि जो लोग कानून का पालन करेंगे, उनके साथ नागरिक जैसा व्यवहार किया जाएगा, लेकिन जो लोग इसे तोड़ेंगे, उनसे सुरक्षा बल सख्ती से निपटेंगे - J&K से लेकर नॉर्थ ईस्ट और बस्तर तक.

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नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि संसद से माओवादियों से की गई उनकी अपील सफल रही है. उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के अभियानों में सिर्फ 10 फीसदी माओवादी मारे गए, जबकि 90 फीसदी ने अपने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया.

शाह ने कहा कि जो लोग देश के कानून का पालन करेंगे, उनके साथ नागरिकों जैसा व्यवहार किया जाएगा. लेकिन कानून तोड़ने वालों से सुरक्षा बल सख्ती से निपटेंगे. चाहे जम्मू-कश्मीर हो, पूर्वोत्तर हो या बस्तर.

उनकी यह टिप्पणी रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव समारोह के समापन कार्यक्रम के दौरान आई. इस कार्यक्रम का आयोजन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने किया था. यह समारोह नवंबर 2000 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य के गठन की याद में आयोजित किया गया था.

गृह मंत्री ने समयसीमा तय करके वामपंथी उग्रवाद (LWE) से निपटने की सरकार की नीति की आलोचना करने वालों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने यूपीए सरकार के कार्यकाल में नक्सलियों को लेकर पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम की टिप्पणियों पर निशाना साधा.

उन्होंने कहा, “पी. चिदंबरम ने कहा था कि नक्सलियों को हथियार डालने की जरूरत नहीं है, बस हिंसा मत करो और गोलियां मत चलाओ. चिदंबरम जी, इस तरह हिंसा नहीं रुकती. मैं आज यह बात कह रहा हूं. मैंने संसद में भी यह साफ कर दिया था. जो भी आत्मसमर्पण करना चाहता है, वह हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर सकता है. उसे मुख्यधारा में लाया जाएगा. ऐसा नहीं करने वालों को हमारे सुरक्षा बल चुनौती देंगे.”

उन्होंने कहा, “और नतीजे देखिए. सिर्फ 10 फीसदी लोग मारे गए, जबकि 90 फीसदी ने अपने हथियार डाल दिए. अब पूरा देश नक्सलवाद से मुक्त है. यही नरेंद्र मोदी सरकार की नीति है. जो कानून का पालन करेंगे, उनके साथ नागरिकों जैसा व्यवहार होगा. लेकिन जो कानून तोड़ेंगे, चाहे बस्तर हो, पूर्वोत्तर हो या कश्मीर, उनसे नागरिकों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा बल निपटेंगे.”

शाह ने आगे कहा कि बीजेपी सरकार ने दिसंबर 2023 में राज्य में सत्ता में लौटने के दो महीने के भीतर छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प लिया था.

वामपंथी उग्रवाद के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस इलाके के जंगलों में रेड कॉरिडोर बना दिया गया था और वहां महुआ, तेंदू के पत्तों और लोकगीतों की जगह बारूदी सुरंगों ने ले ली थी.

शाह ने कहा, “जिस बच्चे के हाथ में कलम होनी चाहिए थी, उसे स्कूल से अगवा करके बंदूक थमा दी गई. जहां स्कूल की घंटी बजनी चाहिए थी, वहां स्कूल की इमारत ही उड़ा दी गई. विकास लाने के लिए सड़क बनाने वाले व्यक्ति को उसके परिवार के सामने जिंदा जला दिया गया.”

उन्होंने मानवाधिकारों के नाम पर नक्सलवाद का समर्थन करने वालों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “क्या मानवाधिकार सिर्फ उन लोगों के लिए हैं, जो बंदूक उठाते हैं और विकास रोकते हैं? क्या गरीब आदिवासियों के मानवाधिकार नहीं हैं?”

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने शाह के हवाले से आगे कहा, “मोदी सरकार ने दिखाया है कि गरीब आदिवासियों के भी मानवाधिकार हैं. पिछले 30 साल में बम धमाकों में जिन लोगों के हाथ-पैर उड़ गए, उन्हें कृत्रिम अंग दिए गए हैं, ताकि उनकी जिंदगी थोड़ी आसान हो सके.”

उन्होंने कहा कि जो लोग इस समस्या से निपटने के तरीके पर सलाह देते हुए लंबे-लंबे लेख लिखते रहे हैं, उनमें से कोई भी बस्तर आकर एक दिन भी बिताने की हिम्मत नहीं जुटा पाया. उन्होंने कहा, “आइए और विकास की हवा को महसूस कीजिए. अगर आपके दिल में श्रीराम जाग जाएं, तो उनके दर्द पर दो लेख लिख दीजिए.”

‘विपक्ष हमेशा असंवैधानिक सरकारों का समर्थन करता रहा है’

चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी दलों की ओर से ‘मॉक संसद’ आयोजित करने की तुलना माओवादी पार्टी की ‘जनताना सरकार’ से करते हुए शाह ने कहा कि ये दल हमेशा से असंवैधानिक व्यवस्थाओं का समर्थन करते रहे हैं.

उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी हमेशा असंवैधानिक सरकारों और संसदों का समर्थन करती रही है. यहां नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में ‘जनताना सरकार’ नाम से एक समानांतर सरकार बना रखी थी. उनका अपना गृह मंत्री, मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री और दूसरे अधिकारी थे. किस संविधान में ‘जनताना सरकार’ चलाने की इजाजत है? आपको न्याय करने का अधिकार किसने दिया? नक्सलियों ने कई निर्दोष पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों को पेड़ों से लटकाकर फांसी दी थी.”

उन्होंने कहा, “कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी संसद में इसका समर्थन करते हैं. पहले वे ‘जनताना सरकार’ और असंवैधानिक सरकारों का समर्थन करते थे और अब उन्होंने ‘मॉक संसद’ आयोजित करके संसद का मजाक उड़ाया और चर्चा का नाटक किया. मैं राहुल जी से कहना चाहता हूं कि नरेंद्र मोदी संसद में हर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं.”

शाह ने आगे कहा, “संसद को चलने दीजिए. हम संसद का विशेष सत्र बुलाएंगे और SIR के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं. मैं आपको चुनौती देता हूं कि SIR पर जनता के सामने चर्चा कीजिए. सिर्फ हाथ में संविधान की प्रति लेकर घूमने से आप संविधान का समर्थन नहीं करते. आपका आचरण भी संवैधानिक होना चाहिए. आपने संसद का कामकाज रोक रखा है. संसद को चलने दीजिए और चर्चा होने दीजिए. इससे देश की जनता को पता चल जाएगा कि इस मुद्दे पर कौन सही है और कौन गलत.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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