नई दिल्ली: नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA ने मुंबई की एक अदालत में याचिका दायर कर वकील और एक्टिविस्ट सुधा भारद्वाज और तेलुगु कवि-एक्टिविस्ट वरवरा राव को भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में मिली जमानत रद्द करने की मांग की है. एजेंसी का आरोप है कि दोनों ने मुंबई प्रेस क्लब में एक कार्यक्रम में शामिल होकर जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया.
भारद्वाज और राव को दिसंबर 2021 और अगस्त 2022 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी. ट्रायल कोर्ट ने शर्त रखी थी कि वे किसी अन्य सह-आरोपी से नहीं मिलेंगे.
शुक्रवार को विशेष अदालत में दाखिल 20 से ज्यादा पन्नों की याचिका में NIA ने कहा कि 19 जनवरी को मुंबई प्रेस क्लब की छत पर हुई एक बैठक में दोनों मौजूद थे. वहां अन्य सह-आरोपी भी मौजूद थे, जिनमें अरुण फरेरा, डॉ. आनंद तेलतुंबड़े, रोना विल्सन, सुधीर ढवाले, हनी बाबू, वर्नन गोंजाल्विस और गौतम नवलखा शामिल थे.
एजेंसी के एक पुलिस अधीक्षक रैंक के अधिकारी ने कहा, “आदरपूर्वक प्रस्तुत है कि जो आरोपी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं, उन्होंने इस माननीय अदालत द्वारा लगाई गई शर्तों का जानबूझकर उल्लंघन किया है. अभियोजन पक्ष के पास भरोसेमंद सबूत हैं कि आरोपी डॉ. पी. वरवरा राव (ए-6) ने अन्य सह-आरोपियों के साथ 19.01.2026 को मुंबई प्रेस क्लब की छत पर आयोजित बैठक में हिस्सा लिया और उसमें सक्रिय रूप से शामिल हुए.”
एनआईए ने आरोप लगाया, “यह बैठक प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) की विचारधारा फैलाने और ‘अर्बन नक्सल’ आंदोलन को आगे बढ़ाने की भविष्य की रणनीति पर चर्चा करने के इरादे से आयोजित की गई थी. यह देश की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है.”
NIA ने दोनों की मौजूदगी साबित करने के लिए मोबाइल फोन रिकॉर्ड का हवाला दिया है.
विशेष NIA अदालत ने राव और भारद्वाज को एजेंसी की याचिका पर 22 मई तक जवाब दाखिल करने को कहा है. राव के वकील सत्यनारायण अय्यर ने द प्रिंट से कहा कि राव एजेंसी की याचिका को चुनौती देने के लिए जवाब दाखिल करेंगे.
इसके बाद क्या हुआ
27 अप्रैल को मुंबई प्रेस क्लब ने अपने तीन सदस्यों—गुरबीर सिंह, बर्नार्ड डी’मेलो और श्रीकांत मोडक—को निष्कासित कर दिया. इन पर आरोप था कि उन्होंने 19 जनवरी को जमानत पर बाहर आए आरोपियों की बैठक आयोजित कराने में मदद की थी. इसके दो दिन बाद NIA की एक टीम जांच के लिए क्लब के दफ्तर पहुंची.
मुंबई प्रेस क्लब ने उसी दिन जारी बयान में कहा, “29 अप्रैल 2026 को NIA ने क्लब के पदाधिकारियों से पूछताछ की और इस घटना से जुड़े कुछ दस्तावेज मांगे हैं. मुंबई प्रेस क्लब एजेंसी के साथ पूरा सहयोग कर रहा है और कानून व तय प्रक्रियाओं के मुताबिक हर जरूरी मदद दे रहा है.”
एजेंसी ने प्रेस क्लब की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट भी याचिका के साथ लगाई है. इसमें 19 जनवरी की उस बैठक के आयोजन की पुष्टि की गई है, जिसमें भीमा कोरेगांव मामले के आरोपी शामिल हुए थे.
मुंबई प्रेस क्लब की रिपोर्ट में कहा गया, “इस बैठक में 2018 भीमा कोरेगांव मामले के आरोपी शामिल थे. इनमें वरवरा राव, अरुण फरेरा, आनंद तेलतुंबड़े, रोना विल्सन, सुधीर ढवाले, हनी बाबू, वर्नन गोंजाल्विस और गौतम नवलखा शामिल थे. सीसीटीवी फुटेज और कर्मचारियों के बयान बताते हैं कि गुरबीर सिंह ने कार्यक्रम के समन्वय और व्यवस्थाओं में मुख्य भूमिका निभाई.”
NIA का मामला महाराष्ट्र पुलिस द्वारा 1 जनवरी 2018 को भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा को लेकर दर्ज दो एफआईआर से जुड़ा है. पुलिस ने उसी साल जून में एक्टिविस्ट सुरेंद्र गाडलिंग, रोना विल्सन, सुधीर ढवाले, शोमा सेन और महेश राउत को गिरफ्तार किया था और मूल मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की कड़ी धाराएं जोड़ी थीं.
इसके बाद उसी साल अगस्त में राव, भारद्वाज, वर्नन गोंजाल्विस, अरुण फरेरा, आनंद तेलतुंबड़े, गौतम नवलखा और स्टैन स्वामी को गिरफ्तार किया गया.
गृह मंत्रालय के आदेश पर जनवरी 2020 में एनआईए ने यह मामला अपने हाथ में लिया. इसके बाद एजेंसी ने दलित एक्टिविस्ट आनंद तेलतुंबड़े, जेसुइट पादरी स्टैन स्वामी और दिल्ली यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर हनी बाबू को गिरफ्तार किया. 84 साल के स्टैन स्वामी की जुलाई 2021 में जेल में मौत हो गई थी.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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