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Monday, 3 August, 2026
होमदेश'मेरे दुखों ने मुझे कानून सिखाया': राजीव गांधी हत्या केस में दोषी पेरारिवलन बने वकील

‘मेरे दुखों ने मुझे कानून सिखाया’: राजीव गांधी हत्या केस में दोषी पेरारिवलन बने वकील

1991 में, 19 साल की उम्र में अपनी गिरफ़्तारी का ज़िक्र करते हुए, पेरारिवलन ने दिप्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में कहा: ‘उस उम्र में, हमें लगता था कि अगर हमने कुछ गलत नहीं किया है, तो हमारे साथ कुछ भी गलत नहीं होगा.’

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नई दिल्ली: मद्रास हाई कोर्ट में ए.जी. पेरारिवलन अब वकील की पोशाक में नजर आते हैं. कई दशक पहले वह इसी अदालत के कटघरे में खड़े थे, जब वे भारत के सबसे चर्चित हत्या मामलों में से एक में आरोपी थे.

1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को निशाना बनाकर किए गए आत्मघाती हमले के मामले में 19 साल की उम्र में गिरफ्तार किए गए पेरारिवलन ने 30 साल से ज्यादा समय जेल में बिताया. इसमें मौत की सजा का इंतिजार करते हुए बिताया गया समय भी शामिल है. 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया था.

हालांकि उनकी जेल की सजा खत्म हो गई, लेकिन कानून से उनका रिश्ता वहीं नहीं रुका.

अब 54 साल की उम्र में पेरारिवलन फिर अदालत लौटे हैं. इस बार एक ऐसे वकील के रूप में, जिसे कानूनी व्यवस्था के उतार-चढ़ावों ने तैयार किया है.

1998 में टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज एक्ट यानी टाडा अदालत ने पेरारिवलन को दोषी ठहराया था. उन पर आरोप था कि उन्होंने वह बैटरी खरीदी थी, जिसका इस्तेमाल लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी LTTE ने राजीव गांधी की हत्या में इस्तेमाल किए गए बम में किया था. 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन साथ ही उनके खिलाफ लगाए गए टाडा के आरोप हटा दिए. इसके बाद पेरारिवलन 2014 तक मौत की सजा का इंतजार करते रहे. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दया याचिका पर फैसला लेने में 11 साल की देरी होने के कारण 2014 में उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था.

पेरारिवलन ने कहा कि कानून पढ़ने का फैसला उन्होंने किसी महत्वाकांक्षा से नहीं, बल्कि अपने अनुभवों से लिया. अप्रैल के आखिरी हफ्ते में तमिलनाडु और पुडुचेरी बार एसोसिएशन में वकील के रूप में नाम दर्ज कराने के बाद पेरारिवलन ने दिप्रिंट से कहा, “मेरे अपने दुख ने ही मुझे कानून सीखने पर मजबूर किया.”

Perarivalan at the event in which he was enrolled with the Bar Association of Tamil Nadu and Puducherry as a lawyer | By Special Arrangement
तमिलनाडु और पुडुचेरी बार एसोसिएशन में वकील के रूप में नाम दर्ज कराने वाले कार्यक्रम में पेरारिवलन | फोटो: विशेष व्यवस्था

जेल में बिताए गए 31 सालों के दौरान उन्होंने ऐसे कैदियों को देखा जो गरीबी के कारण अपील नहीं कर पाते थे या अच्छे वकील नहीं कर सकते थे. इसके चलते कई अंडरट्रायल ऐसे सिस्टम में फंसे रह जाते थे, जिसे वे न समझ पाते थे और न ही उसमें अपनी पहुंच बना पाते थे. पेरारिवलन ने दिप्रिंट से कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य ऐसे कैदियों के अधिकारों के लिए लड़ना है.

उन्होंने कहा कि उस समय जेल के नियमों के कारण वह औपचारिक रूप से कानून या कोई दूसरा प्रोफेशनल कोर्स नहीं पढ़ सकते थे. लेकिन उन्होंने खूब पढ़ाई की और कानूनी अधिकारों, प्रक्रियाओं और उस सिस्टम को समझना शुरू किया जिसने उनकी जिंदगी की दिशा तय की.

अपनी गिरफ्तारी को याद करते हुए पेरारिवलन ने दिप्रिंट से कहा कि पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए ले गई थी और भरोसा दिलाया था कि जल्द छोड़ दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि उनका परिवार पुलिस का पूरा सहयोग कर रहा था और सिस्टम पर भरोसा कर रहा था. लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि उनकी हिरासत कानून में तय सीमा से ज्यादा लंबी हो चुकी थी. उन्होंने कहा, “उस उम्र में हमें लगता था कि अगर हमने कुछ गलत नहीं किया है तो कुछ नहीं होगा.” उन्होंने कहा कि उनकी यही मासूमियत उन पर भारी पड़ गई.

पेरारिवलन के मुताबिक उनका केस सिर्फ अंदाजों पर खड़ा किया गया था.

उन्होंने कहा, “इलेक्ट्रॉनिक्स की पढ़ाई को आधार बनाकर मुझे विस्फोटक बनाने से जोड़ दिया गया. उसी के आसपास एक कहानी तैयार की गई.” गिरफ्तारी के समय उनके पास डिप्लोमा इन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की डिग्री थी.

अभियोजन पक्ष का आरोप था कि पेरारिवलन ने वह 9 वोल्ट बैटरी खरीदी थी, जिसका इस्तेमाल आत्मघाती हमले में हुआ था. लेकिन उनका कहना था कि जांच एजेंसियां कभी यह साबित नहीं कर पाईं कि उन्हें पता था कि बैटरी का इस्तेमाल किस काम में होने वाला है. उन्होंने कहा, “बैटरी खरीदना कोई अपराध नहीं है. अपराध तब बनता है जब आप जानते हुए किसी अपराध में मदद करें.”

कई साल बाद इस मामले में एक बड़ा मोड़ आया. 2017 में वह पुलिस अधिकारी, जिसने पेरारिवलन का बयान दर्ज किया था, उसने एक हलफनामे में कहा कि उसने बयान सही तरीके से दर्ज नहीं किया था. पेरारिवलन ने कहा, “उस एक कमी ने सब कुछ बदल दिया.” उनका आरोप है कि इसी आधार पर उन्हें 2022 तक जेल में रखा गया.

उन्होंने कहा, “आज भी कई लोग मुझे दोषी मानते हैं.” साथ ही उन्होंने कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था में कमियां हो सकती हैं, लेकिन फिर भी यह जरूरी है.

हालांकि पेरारिवलन की सबसे बड़ी चिंता कानून तक पहुंच में असमानता को लेकर है. उन्होंने कहा, “कानूनी फैसले अक्सर इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपके पास कितने पैसे हैं. अगर आपके पास पैसा है तो आप अच्छे वकील कर सकते हैं. अगर नहीं है तो संघर्ष करना पड़ता है.” उनके मुताबिक यह स्थिति कानून के सामने बराबरी के सिद्धांत को कमजोर करती है.

पेरारिवलन ने कहा कि मौत की सजा जरूरी नहीं है. उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे देशों में सजा के बाद मामलों की दोबारा समीक्षा करने वाली व्यवस्था ने कई गलत सजा पाए लोगों को राहत दिलाई है. उन्होंने कहा, “हमें भी ऐसी व्यवस्था चाहिए.”

जब उनसे पूछा गया कि वह आम लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगे, तो उम्मीद से भरे इस वकील ने कहा, “अगर आपने कुछ गलत नहीं किया है और आप लड़ते रहते हैं, तो एक दिन आप जरूर जीतेंगे.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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