नयी दिल्ली, सात नवंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की बाबरी विध्वंस पर की गई टिप्पणी को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि इससे जाहिर होता है कि बाबर पहले भी कांग्रेस के दिल में था और आज भी है।
सोनिया गांधी ने कहा था कि 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस देखते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए थे।
पार्टी ने गांधी के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि उन्होंने मस्जिद का विध्वंस टेलीविजन पर देखा था।
अपनी संस्मरण पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग : अ जर्नी ऑफ लव’ के विमोचन से पहले ‘द गार्डियन’ को दिए एक साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने याद किया कि टेलीविजन पर मस्जिद का विध्वंस देखते हुए वह रो पड़ी थीं।
ब्रिटिश अखबार के मुताबिक, सोनिया गांधी ने कहा कि उन्हें उस समय ही एहसास हो गया था कि महात्मा गांधी, नेहरू और उनके सहयोगियों ने जिस धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रयास किया था, उसके लिए उन्हें ‘‘लंबी लड़ाई’’ लड़नी होगी।
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने स्वीकार किया कि उनकी पार्टी की विफलताओं ने भाजपा और उसकी कट्टर हिंदुत्व की राजनीति के उभार में कुछ हद तक योगदान दिया। उन्होंने कहा था, ‘‘मुझे लगता है कि कई मायनों में हम बहुत निश्चिंत रहे हैं। हमारा रवैया कुछ हद तक लापरवाही भरा था।’’
सोनिया गांधी की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, ‘‘इससे जाहिर होता है कि बाबर उस समय भी कांग्रेस के दिल में था और आज भी उसके दिल में है।’’
त्रिवेदी ने कहा कि सोनिया गांधी की टिप्पणी का मतलब है कि कांग्रेस अब महात्मा गांधी के ‘राम राज्य’ से दूर होकर ‘बाबर राज’ तक सिमट गई है।
भाजपा प्रवक्ता ने यह आरोप भी लगाया कि सोनिया गांधी की टिप्पणी से स्पष्ट है कि कांग्रेस दोहरे चेहरे वाली पार्टी है और ये केवल मुस्लिम समुदाय के साथ नहीं खड़ी होती, बल्कि ‘‘मुसलमानों के कट्टरपंथी तत्वों के साथ भी खड़ी होती है।’’
भाजपा के राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘‘राजीव गांधी ने 1989 में अयोध्या से भगवान राम का नाम लेकर अपना चुनाव प्रचार शुरू किया था। आज सोनिया गांधी बाबरी का जिक्र करके, गाजा के लिए दुख जताकर और बाटला हाउस मुठभेड़ के आरोपियों के लिए आंसू बहाकर कांग्रेस की असली सोच उजागर कर रही हैं।’’
त्रिवेदी ने कहा, ‘‘सोनिया गांधी, आपके परिवार की तीन पीढ़ियों ने बिना आमंत्रण के बाबर की कब्र पर जाकर सजदा किया है। जवाहरलाल नेहरू ने 1959 में, इंदिरा गांधी ने 1968 में और राहुल गांधी ने मनमोहन सिंह के साथ 2005 में उसकी कब्र पर जाकर सजदा किया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आपके दिल में वास्तव में क्या है, यह अब सामने आ गया है।’’
भाषा शफीक सुरेश
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