नई दिल्ली: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपना 26 दिन का अनशन खत्म कर दिया. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि खतरा अभी टला नहीं है. लंबे समय तक भूखे रहने के बाद शरीर अब एक और गंभीर मेडिकल दौर में पहुंच गया है. डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसे अनशन के बाद पूरी तरह ठीक होने में कई हफ्ते से लेकर कई महीने तक लग सकते हैं. सबसे बड़ा खतरा अब अनशन नहीं, बल्कि दोबारा खाना शुरू कराने के तरीके से है.
मैक्स हेल्थकेयर में एंडोक्राइनोलॉजी और डायबिटीज विभाग के चेयरमैन डॉ. अम्बरीश मित्तल ने कहा, “उनका शरीर अब ऊर्जा के लिए कीटोन बॉडीज पर निर्भर हो गया होगा.” कीटोन बॉडीज पानी में घुलने वाले ऐसे अणु होते हैं, जिन्हें लीवर तब बनाता है जब शरीर ग्लूकोज की जगह जमा चर्बी को ऊर्जा के लिए जलाना शुरू कर देता है.
डॉ. मित्तल ने दिप्रिंट से कहा, “उनकी मांसपेशियां काफी कमजोर हो चुकी होंगी और शरीर की ऊर्जा लगभग खत्म हो चुकी होगी. ऐसे में अचानक खाना नहीं दिया जा सकता. खाना बहुत धीरे-धीरे शुरू करना पड़ता है, खासकर पहले तीन दिनों में.”
वांगचुक ने 28 जून से नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (अंडरग्रेजुएट) 2026 पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी. गुरुवार को केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उनसे मुलाकात की, जिसके बाद उन्होंने अनशन खत्म कर दिया.
कई हफ्तों तक खाना नहीं मिलने पर शरीर ऊर्जा के लिए ग्लूकोज की जगह जमा चर्बी का इस्तेमाल करने लगता है और धीरे-धीरे मांसपेशियों के प्रोटीन को भी तोड़ना शुरू कर देता है. डॉ. मित्तल ने कहा कि इन बदलावों को ठीक करने के लिए डॉक्टरों की निगरानी में धीरे-धीरे पोषण देना और ब्लड शुगर व इलेक्ट्रोलाइट्स पर लगातार नजर रखना जरूरी होता है. जो मरीज 10 दिन से ज्यादा समय तक भूखे रहे हों या जिनका वजन 10 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गया हो, उन्हें शुरुआत में शरीर के प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से सिर्फ 5 से 10 किलो कैलोरी प्रतिदिन दी जाती है. इसके बाद अगले कुछ दिनों में धीरे-धीरे कैलोरी बढ़ाई जाती है.
रीफीडिंग सिंड्रोम
लंबे समय तक भूखे रहने के बाद सबसे बड़ी चिंता रीफीडिंग सिंड्रोम की होती है. यह एक जानलेवा स्थिति हो सकती है, जो तब होती है जब लंबे अनशन के बाद बहुत जल्दी खाना शुरू करा दिया जाता है. डॉ. मित्तल ने बताया कि कार्बोहाइड्रेट खाने से इंसुलिन निकलता है, जिससे फॉस्फेट, पोटैशियम और मैग्नीशियम तेजी से कोशिकाओं के अंदर चले जाते हैं. इससे खून में इनकी मात्रा अचानक कम हो सकती है. इससे दिल की धड़कन अनियमित होना, दौरे पड़ना, भ्रम की स्थिति और शरीर में ज्यादा पानी भरने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
उन्होंने कहा, “अक्सर लोगों को लगता है कि अगर कोई लंबे समय तक भूखा रहा है तो उसे तुरंत भरपेट खाना खिला देना चाहिए. लेकिन यही सबसे बड़ी गलती होती है.” इससे बचने के लिए डॉक्टर शुरुआत में कम कैलोरी वाला खाना देते हैं और 4 से 7 दिनों में धीरे-धीरे उसकी मात्रा बढ़ाते हैं.
डॉ. मित्तल ने कहा कि दोबारा खाना शुरू करने से पहले और उसके दौरान थायमिन (विटामिन B1) देना भी बहुत जरूरी होता है, क्योंकि लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में इसकी कमी हो जाती है. उन्होंने कहा, “अगर शरीर में पर्याप्त थायमिन नहीं होगा तो वह ग्लूकोज को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाएगा. इससे खाना शुरू करने के कुछ घंटों या कुछ दिनों के भीतर दिमाग से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.”
ठीक होने में समय क्यों लगता है
दिल्ली की न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी के मुताबिक, लंबे समय तक भूखे रहने पर शरीर सबसे पहले अपने ग्लाइकोजन भंडार का इस्तेमाल करता है. इसके बाद ऊर्जा के लिए चर्बी और मांसपेशियों को जलाना शुरू कर देता है.
उन्होंने कहा, “शरीर कीटोसिस की स्थिति में चला जाता है. इसमें चर्बी भी कम होती है और मांसपेशियां भी कमजोर होती हैं, क्योंकि शरीर को कार्बोहाइड्रेट नहीं मिल रहा होता.”
उन्होंने सलाह दी कि अनशन खत्म होने के तुरंत बाद सामान्य खाना शुरू नहीं करना चाहिए.
उन्होंने कहा, “शुरुआत में सख्त या ज्यादा फाइबर वाला खाना नहीं देना चाहिए, क्योंकि पाचन की रफ्तार धीमी हो चुकी होती है. पहले नारियल पानी या जूस जैसे आसान कार्बोहाइड्रेट देने चाहिए. इसके बाद सूप या शोरबा देना चाहिए. अगर कोई सीधे रोटी-सब्जी खाने लगे तो एसिडिटी और पाचन की दिक्कत हो सकती है, क्योंकि शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो चुका होता है.”
दिव्या गांधी के मुताबिक, सिर्फ वजन बढ़ जाना ही पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं है.
उन्होंने कहा, “शरीर को पूरी तरह सामान्य होने में कम से कम दो महीने लगेंगे. मांसपेशियों को दोबारा मजबूत होने में समय लगता है. इसके लिए खाने में प्रोटीन के साथ सप्लीमेंट्स और फल-सब्जियों से मिलने वाले विटामिन और मिनरल्स की भी जरूरत पड़ सकती है.”
मुंबई के डायबिटीज और मोटापा विशेषज्ञ डॉ. राजीव कोविल ने कहा कि खाना शुरू होने के बाद भी शरीर तुरंत सामान्य नहीं हो जाता.
उन्होंने कहा, “पाचन, इंसुलिन बनना और आंतों का सामान्य कामकाज धीरे-धीरे कई दिनों में वापस शुरू होता है.” उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की निगरानी में धीरे-धीरे पोषण देना और शरीर में पर्याप्त पानी बनाए रखना जरूरी है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: CJP प्रदर्शन: युवक की आंख और गर्दन में धंसे पैलेट, दो सर्जरी के बाद निकाले गए टुकड़े