जयपुर, 26 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने सोमवार को कहा कि समाज को जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए और जिन लोगों को समाज से सहयोग मिला है, उन्हें भी समाज के प्रति अपना दायित्व निभाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सेवा भारती का उद्देश्य सेवा लेने वाले लोगों को इस तरह सक्षम बनाना है कि वे भविष्य में दूसरों की सेवा कर सकें।
होसबाले ने यहां सेवा भारती समिति, जयपुर के वार्षिकोत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ है और वर्तमान समय में मानव सेवा की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि समाज में सामर्थ्य, क्षमता और सेवा की भावना मौजूद है। जरूरत केवल इस भावना को जागृत करने की है।
मानसरोवर स्थित टैगोर इंटरनेशनल स्कूल के दीप स्मृति सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों की बस्तियों को ‘मलिन बस्ती’ या ‘स्लम’ कहने के बजाय ‘सेवा बस्ती’ कहा जाना चाहिए। ऐसी बस्तियों में रहने वाले लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, सुरक्षा और स्वाभिमान के क्षेत्र में सहयोग की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि समाज के सक्षम लोगों का सामाजिक कर्तव्य है कि वे जरूरतमंद भाई-बहनों का जीवन स्तर बेहतर बनाने के लिए आगे आएं। सेवा का अर्थ केवल आर्थिक सहायता देना या शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि लोगों को सम्मान और स्वाभिमान के साथ जीने में सक्षम बनाना भी है।
होसबाले ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में ईश्वर का अंश है और हर किसी को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। किसी व्यक्ति के भीतर मौजूद स्वाभिमान को पहचानना और उसे आत्मसम्मान का बोध कराना भी महत्वपूर्ण सेवा है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक प्रारंभ से ही विभिन्न प्रकार के सेवा कार्य करते रहे हैं। इन कार्यों को व्यवस्थित रूप से संचालित करने और समाज के इच्छुक लोगों को उनसे जोड़ने के उद्देश्य से सेवा भारती की शुरुआत की गई।
उन्होंने कहा कि सेवा भारती के कार्यों को केवल संघ की पहल तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इन्हें आगे बढ़ाने में समाज के अनेक लोगों का योगदान रहा है।
होसबाले ने बताया कि सेवा भारती से जुड़ी संस्थाएं देशभर में लगभग डेढ़ लाख छोटे-बड़े सेवा कार्य संचालित कर रही हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे केवल सेवा कार्यों के लिए आर्थिक सहयोग देने तक सीमित न रहें, बल्कि उनमें स्वयं भी सक्रिय भागीदारी निभाएं।
भाषा
बाकोलिया रवि कांत
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