तिरुवनंतपुरम, 22 अक्टूबर (भाषा) स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) से पीड़ित बच्चों के लिए किफायती भारतीय दवाओं के वितरण को लेकर जारी विवाद के बीच केरलम के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन की एक घरेलू दवा कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात की तस्वीरें बृहस्पतिवार को सामने आईं।
मुरलीधरन के कार्यालय में हुई इस हालिया मुलाकात की तस्वीरें कुछ टीवी चैनल द्वारा दिखाए जाने के बाद मंत्री ने पहले तो किसी भी कंपनी प्रतिनिधि से मिलने की बात से इनकार किया लेकिन बाद में कहा कि हो सकता है कि उन्होंने अपने कार्यालय में कई लोगों से मुलाकात की हो।
उन्होंने कोझिकोड में पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘इसका सरकार के (भारत में बनी एसएमए दवाएं उपलब्ध कराने के) फैसले से कोई लेना-देना नहीं है।’’
तस्वीरों में उन्हें कुछ दस्तावेज सौंपे जाते दिखने के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि लोग अक्सर उन्हें तरह-तरह के दस्तावेज और रिपोर्ट देते रहते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन सरकार विशेषज्ञों से चर्चा किए बिना कोई फैसला नहीं लेगी। विशेषज्ञों ने एसएमए दवाओं को लेकर सरकार के फैसले का समर्थन किया है।’’
मुरलीधरन ने यह भी कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी इस तरह की बीमारियों के इलाज के लिए दवाएं उपलब्ध नहीं होना शर्म की बात है।
मंत्री ने बुधवार को कहा था कि किफायती भारतीय दवाएं एसएमए से पीड़ित बच्चों को एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर दी जा रही हैं और समिति ने दवाओं की गुणवत्ता का आकलन किया था।
उन्होंने यह भी कहा था कि यह प्रक्रिया पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उन्होंने कहा था कि सरकार ने एसएमए के लिए नयी दवा कम कीमत पर अधिक से अधिक लोगों को उपलब्ध कराने का फैसला किया है। एसएमए एक आनुवंशिक विकार होता है।
एसएमए के मरीजों को ‘डॉक्टर के लिए नमूने’ और ‘क्लीनिकल ट्रायल के लिए’ लेबल वाली दवाएं दिए जाने के मुद्दे पर मुरलीधरन ने कहा था कि इस संबंध में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है।
विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने हाल में एक फेसबुक पोस्ट में उन खबरों पर हैरानी जताई थी जिनमें कहा गया था कि एसएमए से पीड़ित बच्चों को उनके माता-पिता की सहमति के बिना ‘क्लीनिकल ट्रायल’ वाली प्रायोगिक दवाएं दी गईं। उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
एसएमए एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी होती है जिसके कारण मांसपेशियों में लगातार कमजोरी आती है और मांसपेशियों का क्षय होने लगता है।
भाषा सुरभि अमित
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