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Saturday, 18 April, 2026
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शिवसेना ने केंद्र सरकार से किशोर न्याय कानून में किया गया संशोधन वापस लेने को कहा

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मुंबई, 19 फरवरी (भाषा) शिवसेना ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2021 में हाल में किये गए संशोधन को वापस लिया जाए। संशोधन के जरिये यह सुनिश्चित किया गया है कि बच्चों के विरुद्ध गंभीर अपराध के मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट की विशेष अनुमति के बिना प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी।

शिवसेना से राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि संशोधन वापस लिए जाएं और इस प्रकार के अपराधों की संज्ञेय श्रेणी को बहाल किया जाए। चतुर्वेदी ने कहा, “इस संशोधन से बच्चों पर बेहद बुरा असर पड़ेगा क्योंकि इससे वह अपराधी बच जाएंगे, जो बच्चों का भीख मांगने, मजदूरी और मादक पदार्थ बेचने के लिए शोषण करते हैं।”

शिवसेना नेत्री ने कहा कि संशोधन के कारण इन गंभीर अपराधों में प्राथमिकी दर्ज नहीं होगी और जांच नहीं होगी। केंद्र सरकार ने किशोर न्याय अधिनियम 2015 में 2021 में संशोधन किया, जिससे बच्चों के प्रति गंभीर अपराध गैर संज्ञेय श्रेणी में चले गए हैं।

भाषा यश दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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