scorecardresearch
Friday, 22 May, 2026
होमदेशनक्सलवाद के बाद शाह ने BSF को दिया नया एजेंडा—घुसपैठियों को सिर्फ रोकें नहीं, पहचान करें, डिपोर्ट करें

नक्सलवाद के बाद शाह ने BSF को दिया नया एजेंडा—घुसपैठियों को सिर्फ रोकें नहीं, पहचान करें, डिपोर्ट करें

अमित शाह ने BSF से आग्रह किया कि वह केवल सीमा की सुरक्षा तक ही सीमित न रहे, बल्कि जनसांख्यिकीय बदलाव के विरुद्ध व्यापक राष्ट्रीय रणनीति के तहत अवैध घुसपैठियों की पहचान करे, उन पर नज़र रखे और उन्हें देश से बाहर निकाले.

Text Size:

नई दिल्ली: वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चलाए गए व्यापक अभियान से प्रेरणा लेते हुए, जिसने नक्सलवाद और उसके सशस्त्र संगठनों को खत्म करने में सफलता पाई, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को सीमा सुरक्षा बल (BSF) से कहा कि वह अवैध घुसपैठ के खिलाफ भी उसी तीव्रता से काम करे.

“अब समय आ गया है कि वर्षों से बिना किसी रोक-टोक के चल रही घुसपैठ को रोका जाए. कई रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों ने मुझे नक्सल-मुक्त अभियान शुरू न करने की सलाह दी थी, और उन्होंने यही बात प्रधानमंत्री से भी कही थी. लेकिन भारत सरकार अपने फैसले पर डटी रही, और पांच दशक पुरानी समस्या अब खत्म हो रही है. भारत नक्सल-मुक्त बन चुका है,” शाह ने अपने संबोधन में कहा.

“अब BSF को भी उसी दृढ़ता के साथ घुसपैठ के खिलाफ आगे बढ़ना चाहिए. प्रधानमंत्री ने हाई पावर डेमोग्राफी मिशन शुरू किया है, जिसकी घोषणा कुछ दिनों में की जाएगी. यह मिशन BSF और सीमा सुरक्षा बल के जवानों को चिन्हित स्थान भी उपलब्ध कराएगा,” उन्होंने आगे कहा.

“BSF को जनसंख्या में बदलाव लाने की साजिश को रोकना होगा, और मैं आपको पूरी शांति और विश्वास के साथ कह रहा हूं कि त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल—इन तीनों राज्यों में ऐसी सरकारें हैं जो अपनी नीति के स्तर पर मानती हैं कि अवैध घुसपैठ नहीं होनी चाहिए,” उन्होंने कहा.

“BSF की जिम्मेदारी सिर्फ सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए. स्थानीय पटवारी, पुलिस स्टेशन, जिला कलेक्टर, एसपी और DDO (जिला विकास अधिकारी) से भी संपर्क होना चाहिए. BSF की जिम्मेदारी है कि वह अवैध घुसपैठ और गौ-तस्करी के रास्तों की पहचान करे और उन्हें बंद करे,” उन्होंने जोर देकर कहा.

शाह राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के शीर्ष अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक तपन डेका, बॉर्डर मैनेजमेंट सचिव राजेंद्र कुमार और सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) व केंद्रीय पुलिस के प्रमुख मौजूद थे. वह रुस्तमजी मेमोरियल लेक्चर दे रहे थे. यह कार्यक्रम हर साल नई दिल्ली में BSF द्वारा उसके संस्थापक और पहले महानिदेशक पद्म विभूषण के.एफ. रुस्तमजी के सम्मान में आयोजित किया जाता है.

शाह ने BSF के वरिष्ठ अधिकारियों और जवानों से कहा कि वे सीमा पार से आने वाले नशीले पदार्थों और ड्रोन जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य प्रशासन और एजेंसियों के साथ मिलकर काम करें.

“आने वाले दिनों में आपकी भूमिका और ज्यादा व्यापक और जुड़ी हुई होनी चाहिए. हम पारंपरिक तरीकों से सीमा की सुरक्षा नहीं कर सकते. हमें राज्य पुलिस, अन्य सशस्त्र बलों, NCB (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो), खुफिया एजेंसियों और राज्य प्रशासन के साथ मिलकर काम करना होगा ताकि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो सके और उभरती चुनौतियों का सामना किया जा सके,” उन्होंने कहा.

“हमें सीमा सुरक्षा को सिर्फ एक अलग काम की तरह नहीं बल्कि क्षेत्रीय जिम्मेदारी की तरह देखना होगा. हमें सीमा पार से आने वाली चुनौतियों के लिए पहले से तैयार रहना होगा. हमारी जिम्मेदारी है कि हम सतर्क रहें और घुसपैठ, जनसंख्या में कृत्रिम बदलाव, और नशीले पदार्थों व नकली मुद्रा के जरिए अर्थव्यवस्था पर हमले जैसी चुनौतियों का सामना करें. हमें साइबर सुरक्षा और ड्रोन युद्ध से निपटने के लिए नई रणनीति बनानी होगी,” शाह ने कहा.

‘बातचीत का दौर पीछे छूट चुका है’

शाह ने आगे कहा कि मोदी सरकार ने देश की सुरक्षा व्यवस्था का नजरिया बदल दिया है और आतंकवादी हमलों के जवाब में प्रतिक्रिया और जवाबी कार्रवाई का रास्ता चुना है. उन्होंने कहा कि सरकार ने उस पुराने दौर को पीछे छोड़ दिया है जब माओवादी हिंसा और हत्याएं करते थे और सरकारें उनसे बातचीत में लगी रहती थीं.

“2014 में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार आने के बाद हमने सुरक्षा नीति और सीमा सुरक्षा के दृष्टिकोण में बड़े बदलाव किए हैं. पाकिस्तान द्वारा किए गए तीनों आतंकी हमलों—उरी, पुलवामा और पहलगाम—का हमने जवाब दिया. पहले सर्जिकल स्ट्राइक, फिर एयर स्ट्राइक और उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान के संवेदनशील ठिकानों पर हमला किया गया,” शाह ने कहा.

“हम उस दौर को पीछे छोड़ चुके हैं जब आतंकी हमलों के बाद बातचीत होती थी, माओवादी बिना डर के हत्याएं करते थे और सरकारें उनसे बात करती थीं. हमने भारतीय संविधान की भावना के अनुसार अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है. यह नई रक्षा नीति की घोषणा जैसी है और मेरा मानना है कि इसमें BSF का बहुत बड़ा योगदान है,” केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा.

“सरकार ने फैसला किया है कि BSF को 6000 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्मार्ट बॉर्डर व्यवस्था बनाने के लिए सभी जरूरी तकनीकें दी जाएंगी. BSF ने कई वर्षों तक अलग-अलग प्रयोग किए हैं और हमने मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बनाने के लिए उनका विश्लेषण किया है. स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट के लिए सभी तकनीकों को उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं. इस नए प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद BSF का काम आसान भी होगा और मजबूत भी,” उन्होंने कहा.

“गृह मंत्रालय ने स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट के अलग-अलग हिस्सों के लिए कई योजनाएं बनाई हैं. मैं सभी BSF जवानों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हम BSF की स्थापना के 60वें वर्ष के भीतर इस प्रोजेक्ट को शुरू करेंगे और पाकिस्तान व बांग्लादेश की सीमा को अभेद्य बना देंगे.”

त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और असम

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बांग्लादेश सीमा पर BSF की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होगी, लेकिन उन्होंने भरोसा भी दिलाया. उन्होंने कहा कि त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और असम—तीनों राज्यों की सरकारें, जहां उनकी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार है, घुसपैठ का विरोध अपनी नीति के स्तर पर करती हैं और इससे BSF को मदद मिलेगी.

त्रिपुरा और असम में पहले से BJP की सरकार थी, जबकि हाल ही में हुए चुनावों में पार्टी ने पहली बार पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को हराकर सत्ता हासिल की. उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करने जा रहा है ताकि अवैध घुसपैठ से निपटने के लिए नई रणनीति बनाई जा सके.

“चूंकि मैं आज BSF के कार्यक्रम में हूं, इसलिए मैं घुसपैठ के मुद्दे पर भी बात करना चाहता हूं. भारत सरकार ने फैसला किया है कि यह बल सिर्फ अवैध घुसपैठ को नहीं रोकेगा, बल्कि एक-एक घुसपैठिए की पहचान कर उन्हें देश से बाहर भी भेजेगा, और हमारी जनसंख्या में कृत्रिम बदलाव नहीं होने देगा.

“गृह मंत्रालय इन तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करने जा रहा है और हम अवैध घुसपैठ के खिलाफ व्यापक रणनीति बनाएंगे, लेकिन BSF को भी घुसपैठ रोकने और अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर भेजने के लिए मजबूत व्यवस्था बनानी होगी.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: मोदी सरकार ने देश के युवाओं को निराश किया, परीक्षा घोटालों ने ली है जान


 

share & View comments